Israel-Iran News: सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि गुजरात के बंदरगाहों की ओर जा रहे भारत का झंडा लगे दो लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर गए। सरकार ने बताया कि बाकी बचे 22 भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए राजनयिक प्रयास जारी हैं। ये जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और युद्ध प्रभावित स्ट्रेट के पश्चिम में स्थित है।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ते समुद्री तनाव के मद्देनजर इंडियन नेवी ने भारत को ईंधन ले जा रहे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए खाड़ी क्षेत्र में कई युद्धपोत तैनात किए हैं। यह जानकारी मिली है कि ईरान द्वारा फारस की खाड़ी (पश्चिम) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर (पूर्व) से जोड़ने वाले होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी शुरू करने के बाद से कम से कम दो युद्धपोत ऑपरेशनल स्टैंडबाय पर हैं।
नौसेना के ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन और मेरीटाइम ट्रेड को सुरक्षित करने के लिए अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में युद्धपोत तैनात रहते हैं। सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पश्चिम एशियाई संकट के बाद, कई युद्धपोत इस क्षेत्र में भेजे गए हैं। उन्होंने पहले संकेत दिया था कि नई दिल्ली तेहरान के साथ बातचीत कर रही है ताकि भारत आने वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता मिल सके।
भारत सरकार के स्वामित्व वाली शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के दो LPG टैंकर, जिन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लिया है। वे ‘वेरी लार्ज गैस कैरियर्स’ (VLGCs) ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ हैं। ये दोनों मिलकर कुल 92700 टन LPG ले जा रहे हैं। इसे सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए, खपत पर बिना किसी रोक के घरेलू LPG की वार्षिक मांग 33 मिलियन टन है, जो लगभग 90000 टन प्रतिदिन के बराबर होती है।
होर्मुज स्ट्रेट की वजह से एलपीजी आयात पर पड़ा असर
होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद हो जाने के कारण देश के LPG आयात पर गंभीर असर पड़ा है। इसके चलते नई दिल्ली को 33 करोड़ से ज्यादा परिवारों की रसोई के ईंधन की जरूरतें पूरी करने के लिए, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को दी जाने वाली LPG आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, शिवालिक ने शुक्रवार देर रात होर्मुज स्ट्रेट के जोखिम भरे रास्ते को पार कर लिया और अब वह गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। इसके यहां पर सोमवार को पहुंचने की उम्मीद है। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि नंदा देवी ने भी शनिवार सुबह इस स्ट्रेट को पार कर लिया है और उसके मंगलवार को गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों VLGCs को सरकारी रिफाइनर और ईंधन विक्रेता कंपनी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने चार्टर किया था।
होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के तेल और एलएनजी का लगभग पांचवां हिस्सा और भारत के लिए आने वाली ऊर्जा का बड़ा भाग गुजरता है। लेकिन 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यहां जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। पिछले कुछ दिनों में इस इलाके में कई व्यापारिक जहाजों पर हमले भी हुए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। यह संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले किए और तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी संपत्तियां मौजूद हैं।
पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बात की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बात की। उन्होंने कहा कि सामान और ऊर्जा (तेल-गैस) की सप्लाई बिना रुके भारत तक पहुंचती रहे, यह भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पिछले कुछ दिनों में अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ कई बार बातचीत की है और इन बातचीत में पश्चिम एशिया से भारत को होने वाली ऊर्जा आपूर्ति का मुद्दा भी शामिल रहा है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकारों को बताया कि सरकार विभिन्न राजनीतिक और कूटनीतिक स्तरों पर सभी संबंधित सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है और यह सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है कि भारतीय जहाज सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के आ सकें, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।
भारत के लिए खड़ी हो गई समस्या
होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद हो जाने से भारत के लिए एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहता है। भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 40%, LNG आयात का 50% से ज्यादा और LPG आयात का एक बहुत बड़ा हिस्सा 90% तक इसी स्ट्रेट से होकर गुजरता है, यही कारण है कि भारत की LPG आपूर्ति के लिए यह समुद्री मार्ग (chokepoint) खासतौर पर अहम है।
भारत की वार्षिक LPG खपत 33 मिलियन टन से थोड़ी ज्यादा है और इस मामले में भारत की आयात पर निर्भरता का स्तर 60% है। भारत के 90% एलपीजी आयात पश्चिम एशिया से आते हैं, इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से असल में भारत की कुल LPG खपत का लगभग 54% हिस्सा गुजरता है। पहले ऐसी खबरें थीं कि ईरान सिर्फ अपने तेल टैंकरों (जो चीन जा रहे थे) और चीनी जहाजों को ही स्ट्रेट पार करने की अनुमति दे रहा था। लेकिन बुधवार और गुरुवार के बीच, लगभग 30 लाख बैरल सऊदी अरब और इराकी तेल ले जा रहे दो कच्चे तेल के टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के बाद भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचे।
अब, शिवालिक और नंदा देवी के गुजरने के साथ, इस बात की उम्मीद बढ़ रही है कि एनर्जी सप्लाई और दूसरे जरूरी सामान ले जाने वाले और भी जहाज भारत पहुंचेंगे, भले ही पश्चिम एशिया में हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं। भारत पहुंचने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने का इंतजार कर रहे ज्यादातर भारतीय जहाज तेल और गैस टैंकर हैं।
सिन्हा द्वारा दिए गए डेटा के मुताबिक, फारसी खाड़ी में मौजूद 22 भारतीय जहाजों में छह LPG टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक LNG कैरियर और एक केमिकल या पेट्रोलियम उत्पादों का टैंकर शामिल है। ये सभी ऊर्जा से जुड़े सामानों से लदे हुए हैं। बाकी भारतीय जहाजों में तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर, एक ड्रेजर और एक खाली जहाज शामिल हैं, तीन अन्य जहाज रूटीन रखरखाव के लिए ड्राई डॉक पर हैं। सिन्हा के मुताबिक, कुल मिलाकर इन 22 जहाजों पर 611 नाविक सवार हैं। तीन जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पूरब में भी फंसे हुए हैं।
सभी भारतीय नाविक सुरक्षित
सिन्हा ने बताया कि इस इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं मिली है। शिपिंग मंत्रालय और शिपिंग महानिदेशालय, विदेश मंत्रालय (MEA), भारतीय नौसेना और भारतीय मिशनों के साथ तालमेल बिठाकर हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। हाल के दिनों में इस इलाके में जिन जहाजों पर हमला हुआ था, उन पर कुल 78 भारतीय नाविक सवार थे, इनमें से 70 को सुरक्षित बचा लिया गया, चार घायल हुए थे और अब उनकी हालत स्थिर है, तीन की मौत हो गई, जबकि एक लापता है। सिन्हा ने गुरुवार को बताया था कि ये सभी भारतीय नाविक विदेशी झंडे वाले जहाजों पर सवार थे।
होर्मुज स्ट्रेट के जरिए डॉलर के आधिपत्य को चुनौती
इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जंग लड़ रहा ईरान लगातार ट्रंप की मुसीबतें बढ़ाता जा रहा है। यह युद्ध जितना लंबा खिंच रहा है, ट्रंप पर सवालों की बौछार उतनी ही ज्यादा होती जा रही है। इस बीच अब ईरान ने अमेरिका के पेट्रो डॉलर के सबसे बड़े आर्थिक अधिपत्य को चुनौती दे दी है। इस चुनौती के लिए तेहरान की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर…
