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मैं कोई शोपीस नहीं, पंजाब के लिए अमरिंदर उनके एजेंडे पर काम करें तो पीछे चलने को भी तैयार-बोले सिद्धू

बागी नेता ने कहा कि कांग्रेस में आने के लिए चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने उनसे 50 बार मिन्नतें की थीं। लेकिन फिर भी वो पार्टी में आने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कांग्रेस में आने की बात तब स्वीकार की, जब प्रियंका जी और राहुल भाई ने निजी तौर पर आग्रह किया।

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी नेता नवजोत सिंह सिद्धू। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि वो कोई शो-पीस नहीं हैं, जिसका चुनाव में इस्तेमाल कर वापस बॉक्स में बंद कर दिया जाए। कैप्टन अमरिंदर पंजाब के विकास के लिए उनके एजेंडे पर काम करने को तैयार होते हैं तो वो उनके पीछे चलने को भी तैयार हैं। उनकी मंशा डिप्टी सीएम या फिर पीसीसी के चीफ का पद पर काबिज होने की नहीं है। उनका केवल एक मकसद है और वो है पंजाब का उज्जवल भविष्य। अगर सीएम उनकी बात मानते हैं तो वो जिला परिषद के मेंबर का चुनाव लड़कर भी खुश हो लेंगे।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सिद्धू ने कहा कि पंजाब का दुर्भाग्य है कि वो दो परिवारों के बीच पिसता रहा है। एक जाता है और दूसरा आता है, लेकिन सूबे की चिंता कोई नहीं करता। उनका कहना था कि न तो उन्हें गुजरात मॉडल की जरूरत है और न ही दिल्ली मॉडल की। पंजाब का विकास पंजाब के मॉडल से होगा। सरकार को लोगों के भले के लिए सोचना होगा। अपनी ही सरकार पर खासे हमलावर दिखे सिद्धू ने कहा कि विधायकों के बेटे-बेटियों को नौकरी देने से तो प्रतिभा दफन होकर रह जाएगी। उनका सवाल था कि कैप्टन सरकार ये कैसा विकास कर रही है।

आलाकमान से मीटिंग के सवाल पर उनका कहना था कि फिलहाल ऐसी कोई बातचीत नहीं चल रही है। सभी को पता है कि उनका बॉस कौन है। बागी नेता ने कहा कि कांग्रेस में आने के लिए चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने उनसे 50 बार मिन्नतें की थीं। लेकिन फिर भी वो पार्टी में आने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कांग्रेस में आने की बात तब स्वीकार की, जब प्रियंका जी और राहुल भाई ने निजी तौर पर आग्रह किया। उनका कहना था कि उनका तब भी मकसद पंजाब की बेहतरी के लिए काम करना था और आज भी।

सिद्धू ने कहा कि उनका एकमात्र ध्येय पंजाब की उन्नति है। सीएम से विवाद के बाद आलाकमान ने उनसे पहले भी कहा था कि आपको दिल्ली शिफ्ट कर देते हैं, लेकिन उन्होंने ये बात नहीं मानी। उनके दिल में पंजाब था, है और रहेगा। बीजेपी ने भी उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय देने की पेशकश की थी, लेकिन तब भी उन्होंने कह दिया था कि उनके लिए अमृतसर ही सबसे ऊपर है। वो अपने पंजाब को छोड़कर कहीं दूसरी जगह जाने की सोच भी नहीं सकते।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पहली कैबिनेट मीटिंग में ही उन्होंने पंजाब के विकास का मॉडल आगे बढ़ाया था, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई तो वो पीछे हट गए। लोगों ने सोचा कि वो घर बैठ गए। पर वो 24-7 अपने मिशन पर काम कर रहे थे। उनका कहना था कि वो पंजाब के लिए लोगों के बीच जाकर काम करेंगे।

सत्ता हासिल करना उनका ध्येय नहीं बल्कि पंजाब को उसका गौरव वापस देना है। इसके लिए जो कुछ करना पड़े वो करने को तैयार हैं। उनका कहना था कि वो साल में 20-25 करोड़ रुपये कमा रहे थे, पर फिर भी अपने सूबे की खुशहाली के लिए सबकुछ छोड़कर वापस आए।

उनका कहना था कि वो कोई भी स्टैंड लेने से पहले 200 बार सोचते हैं, लेकिन एक बार फैसला लेने के बाद इंच भर भी पीछे नहीं हटते। चाहें कुछ भी हो जाए। जब वो बीजेपी छोड़ रहे थे तब उन्हें मनाने की बहुत कोशिशें हुईं पर वो नहीं माने, क्योंकि फैसला ले चुके थे। जब उनसे ये सवाल किया गया कि इस बार उनका स्टैंड कांग्रेस के साथ रहकर लड़ाई लड़ने का है या फिर इससे बाहर जाने का। उन्होंने सवाल को टालते हुए कहा कि ये बातचीत का मुद्दा नहीं है।

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