पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस बिखर रही है, वहीं पड़ोसी राज्य ओडिशा में बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने अपनी पार्टी को व्यवस्थित करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। एक अनोखे कदम के तहत पटनायक ने पार्टी को फिर से खड़ा करने का रोडमैप तैयार करने के लिए 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हारने वाले बीजेडी उम्मीदवारों के साथ लगभग तीन घंटे तक बातचीत की।
पटनायक की उम्र, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और कई नेताओं के सत्ताधारी बीजेपी में शामिल होने जैसे कारणों से बीजेडी के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। इन सब के बीच, पटनायक ने बुधवार को भुवनेश्वर में यह बैठक बुलाई। 2024 की हार के बाद यह उनकी ऐसी पहली कवायद थी ताकि पार्टी में व्यवस्था बहाल की जा सके और मोहन चरण माझी सरकार के खिलाफ लड़ाई के लिए नेताओं में आत्मविश्वास जगाया जा सके।
प्रेम पटनायक और अन्य सहयोगियों के साथ नवीन पटनायक ने बातचीत की
यह मंथन सत्र तब हुआ जब पांच बार मुख्यमंत्री रहे पटनायक दिल्ली में एक हफ्ता बिताकर लौटे थे। कहा जाता है कि इस दौरान उन्होंने पार्टी के रोडमैप पर अपने बड़े भाई प्रेम पटनायक और अन्य सहयोगियों से सलाह-मशविरा किया था। बीजेडी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान पटनायक ने अपनी आम कार्यशैली से हटकर सभी नेताओं की बात धैर्यपूर्वक सुनी और उनके सवालों व चिंताओं का जवाब दिया। उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे बीजेडी कार्यकर्ताओं में जोश भरने और अगले साल की शुरुआत में होने वाले पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारी के लिए राज्य के सभी जिलों का दौरा करेंगे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “नवीन बाबू की कभी भी किसी बैठक में एक घंटे से ज्यादा बैठने की आदत नहीं रही है। जब वे मुख्यमंत्री थे, तब भी उनकी कैबिनेट बैठकें और आधिकारिक समीक्षा बैठकें एक घंटे से कम समय की होती थीं। बुधवार की बैठक में शामिल 75 नेताओं में से उन्होंने 45 नेताओं से बातचीत की। उनके हाव-भाव से हमें यह महसूस हुआ कि वे पार्टी को फिर से खड़ा करने को लेकर गंभीर हैं।”
बीजेपी के खिलाफ रणनीति
बातचीत के दौरान, पटनायक ने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर बीजेपी के खिलाफ एक नैरेटिव तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई है।” उन्होंने आरोप लगाया, “हत्या, रेप, लूट और महिलाओं के खिलाफ अपराध की बढ़ती घटनाओं की वजह से लोगों में डर का माहौल है।”
पटनायक ने 2000 के विधानसभा चुनावों में राज्य की लड़खड़ाती कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अभियान चलाया था। इसी अभियान के कारण तत्कालीन कांग्रेस सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। बुधवार को हुई रणनीति बैठक में पटनायक ने बीजेपी सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप भी लगाया। उन्होंने 20 लाख से ज्यादा बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया, जो उनकी सरकार की लोकप्रिय योजनाओं में से एक थी।
पटनायक ने कहा, “जब बीजेडी सरकार सत्ता से हटी थी, तब ओडिशा का रेवेन्यू सरप्लस लगभग 45,000 करोड़ रुपये था। बीजेपी सरकार के कार्यकाल में राज्य पर कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया है। यह सरकार बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन तक नहीं दे पा रही है।”
राज्य सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन बांटने में देरी के लिए तकनीकी कारणों का हवाला दिया है। महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए बीजेडी के नारी अधिकार अभियान का जिक्र करते हुए पटनायक ने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद रैलियों में महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी ओडिशा में बदलते जन-मिजाज को दर्शाती है। महिला वोटर हमेशा से बीजेडी के मुख्य समर्थक आधार का हिस्सा रही हैं।
पटनायक ने बीजेडी नेताओं से कहा कि वे आने वाले पंचायत और निकाय चुनावों के लिए नए आत्मविश्वास के साथ अपनी तैयारियां तेज करें और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रणनीतिक इस्तेमाल पर जोर देते हुए पार्टी की जमीनी पहुंच को मजबूत करें।
सूत्रों के मुताबिक, 1 जून से ओडिशा में शुरू हुई चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया का जिक्र करते हुए पटनायक ने बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर वोटरों के मताधिकार से वंचित किए जाने का हवाला दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं से सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि ओडिशा में किसी भी योग्य वोटर का नाम वोटर लिस्ट से न हटाया जाए।
बीजेडी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने कहा कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के पार्टी नेताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की और साथ ही पटनायक को भाजपा सरकार के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश से अवगत कराया। उन्होंने कहा, “नवीन बाबू के शब्दों और विचारों ने हमारे नेताओं को प्रोत्साहित किया है। हमने संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए एक कार्ययोजना पर चर्चा की है, जिसमें महिलाओं, किसानों, आदिवासियों और दलितों जैसे विभिन्न वर्गों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।”
बीजेडी सूत्रों ने बताया कि पटनायक ने नेताओं का दिल जीत लिया। इनमें से कई नेता नेतृत्व से संवाद की कमी के कारण उपेक्षित महसूस कर रहे थे। सूत्रों ने आगे बताया, “एक विशेष जिले के नेताओं से बातचीत के दौरान, पटनायक ने अपने सरकार द्वारा क्षेत्र के लिए उठाए गए कुछ कदमों को याद दिलाया। कई नेताओं ने नवीन बाबू से खुलकर बातचीत की।”
बीजेडी की एकता के लिए प्रयास
बीजेडी के कुछ नेताओं का कहना है कि पटनायक की इस कवायद का मकसद पार्टी नेताओं को एकजुट रखना और जमीनी स्तर के नेताओं को बीजेपी में जाने से रोकना हो सकता है। बीजेडी के एक नेता ने कहा, “बीजेपी ओडिशा में अपने संगठन को बढ़ाने के लिए जोर-शोर से कोशिश कर रही है। बीजेडी के तीन राज्यसभा सदस्यों को अपने पाले में करने के बाद, बीजेपी अब हमारे जमीनी स्तर के नेताओं को भी अपनी पार्टी में शामिल कर रही है।”
बीजेडी के जिन तीन राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दिया था, वे बाद में बीजेपी के टिकट पर दोबारा उच्च सदन के लिए चुने गए। जहां मोहंता और कुमार ने बीजेडी की हार के तुरंत बाद जुलाई और सितंबर 2024 में इस्तीफा दिया था, वहीं सामंतराय पिछले महीने ही पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए।
पटनायक को पार्टी में संभावित बगावत की भी चिंता हो सकती है, खासकर बंगाल में टीएमसी में चल रही बगावत और पहले महाराष्ट्र में एनसीपी और शिवसेना में हुई टूट को देखते हुए।
राज्यसभा चुनाव में बीजद को लगा था झटका
इस साल मार्च में राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजद को उस समय झटका लगा जब उसके आठ विधायकों (दो निलंबित विधायकों सहित) ने एक आम विपक्षी उम्मीदवार को समर्थन देने के पटनायक के फैसले को खारिज कर दिया और उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे के लिए क्रॉस वोटिंग की। बाद में पटनायक ने छह विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया।
हालांकि, बीजेडी नेता और कटक के मेयर सुभाष सिंह ने कहा, “बीजेपी, बीजेडी में फूट नहीं डाल पाएगी क्योंकि ओडिशा की राजनीतिक स्थिति बंगाल या महाराष्ट्र से अलग है।”
एक और बीजेडी नेता ने भी उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा, “नवीन बाबू ने पार्टी को इस तरह से तैयार किया है कि वे इसके निर्विवाद नेता बने हुए हैं। साथ ही, लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता भी बहुत ज्यादा है। इसलिए, पार्टी में कोई भी उनके खिलाफ बगावत करने के बारे में सोचेगा भी नहीं।” 2024 में अपनी ही पुरानी सहयोगी पार्टी बीजेपी से हारने से पहले, बीजेडी ने पटनायक के नेतृत्व में साल 2000 से लगातार पांच बार, यानी 24 सालों तक राज्य पर शासन किया था।
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