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आतंकवाद को शह देने वाले देशों को दंडित किया जाए: राजनाथ

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय आतंकवाद की परिभाषा का उल्लंघन करने वाले देशों और राज्य समर्थित समूहों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा दंडित किया जाना चाहिए।

Author नई दिल्ली | March 17, 2017 2:29 AM
गृहमंत्री राजनाथ सिंह (ANI)

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय आतंकवाद की परिभाषा का उल्लंघन करने वाले देशों और राज्य समर्थित समूहों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा दंडित किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी में ‘आतंकवाद निरोधक सम्मेलन 2017’ के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि हिंद महासागर से 36 देशों की सीमाएं लगती हैं और भारत समेत अन्य देशों को अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय आतंकवाद की व्यापक परिभाषा को स्वीकार करना होगा। परिभाषा का उल्लंघन करने वाले देशों को दंडित और बहिष्कृत किया जाना चाहिए।

सिंह ने कहा कि ‘आतंकवाद की व्यापक परिभाषा’ में राज्य समर्थित संगठनों और देशों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो ऐसे समूहों की मदद कर रहे हैं और उनको इस परिभाषा के तहत लाया जाना चाहिए। उन्होंने सम्मेलन के दौरान कहा, राज्य प्रायोजित आतंकवाद की पहचान और ऐसे राज्य प्रायोजित समूहों को अलग-थलग किया जाना निश्चित रूप से उल्लेखनीय बात होगी। इस सम्मेलन के दौरान ‘हिंद महासागर क्षेत्र में आतंकवाद’ विषय पर चर्चा हुई। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में आतंकवाद से जुड़े कार्यक्रम केवल बयानों तक सीमित नहीं रहने चाहिएं और इसको लेकर ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

साथ ही एक ऐसे मजबूत तंत्र को विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे मित्र देशों और क्षेत्रों के बीच सूचना का लगातार लेनदेन सुनिश्चित किया जा सके। मुंबई की 26-11 की आतंकी हमले की घटना और 1993 में महानगरों में हुए सिलसिलेवार विस्फोट की घटना का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि इस घटना को अंजाम देने वाले अपराधी और इसमें प्रयुक्त सामग्री दोनों पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते भारत में आए। उन्होंने कहा, हमें इस तरह की खुफिया जानकारी मिलती रहती है कि लश्करे-तैयबा एक बार फिर समुद्र के जरिए आतंकवादियों को भेजने की फिराक में है। सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया के आतंकी समूहों आइएसआइएस के बढ़ते प्रभाव के कारण पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के निकटवर्ती सागर समुद्री आतंकवाद के लिहाज से संवेदनशील हो गए हैं।

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