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राष्ट्रीय महिला आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में की तीन तलाक और बहुविवाह पर पाबंदी लगाने की मांग

आयोग ने कहा कि अदालत के समक्ष उसने अपना यह पक्ष तब रखा है जब पीड़ित मुसलिम महिलाओं ने आयोग से कई शिकायतें की।
Author नई दिल्ली | November 9, 2016 06:25 am
( फाइल फोटो)

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में तीन तलाक या तलाक-ए-बिदत और बहुविवाह पर पाबंदी लगाने की मांग की है। आयोग ने इस आधार पर तीन तलाक और बहुविवाह पर पाबंदी की मांग की है कि ये प्रथाएं मुसलिम महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ हैं।
हलफनामे में कहा गया – तीन तलाक (तलाक-ए-बिदत), निकाह हलाला और बहुविवाह असंवैधानिक हैं क्योंकि वे मुसलिम महिलाओं (या मुसलिम समुदाय में ब्याही गई महिलाओं) के अधिकारों का हनन करते हैं, जो उनके और उनके बच्चों के लिए नुकसानदेह होता है। लिहाजा, इन प्रथाओं पर सख्ती से पाबंदी लगाई जानी चाहिए। आयोग ने हलफनामे में यह भी कहा कि वह पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से अपनाए गए रुख का समर्थन करता है।

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हलफनामे के मुताबिक, राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार के रुख का समर्थन करता है और उनकी ओर से दाखिल हलफनामे को सही मानता है। आयोग ने कहा कि अदालत के समक्ष उसने अपना यह पक्ष तब रखा है जब पीड़ित मुसलिम महिलाओं ने आयोग से कई शिकायतें की। एकतरफा तलाक की प्रथा से पीड़ित रहीं महिलाओं से जुड़े ढेरों मामलों को आयोग उठा रहा है। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले में आयोग एक प्रतिवादी है। आयोग ने पिछले शनिवार को अपना हलफनामा दाखिल किया। केंद्र ने अक्तूबर महीने में अदालत को दिए अपने जवाब में मुसलिम समुदाय की तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं का विरोध किया था और लैंगिक समानता व धर्मनिरपेक्षता के आधारों पर इन पर विचार करने की वकालत की थी।
सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक के खिलाफ दायर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। .

 

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