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NRC विवाद: बीजेपी नेता के विवादित बोल, कहा- बांग्‍लादेशी अपने देश न जाएं तो गोली मार दो

बता दें कि असम में एनआरसी का दूसरा मसौदा सोमवार (30 जुलाई) को जारी किया जा चुका है। यह देश का इकलौता राज्य, जहां एनआरसी को लागू किया गया है। इसमें देश के पूर्वोत्तर राज्य के कुल 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल हैं, जबकि 40 लाख लोगों को इसमें अवैध (अवैध तरीके से रह रहे) पाया गया।

हैदराबाद से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजा सिंह। (फोटोः फेसबुक)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता और हैदराबाद से विधायक राजा सिंह ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर बांग्लादेश के नागरिक (भारत में अवैध रूप से रह रहे) अपने मुल्क वापस लौटें तो उन्हें गोली मार दी जाए।

बता दें कि असम में एनआरसी का दूसरा मसौदा सोमवार (30 जुलाई) को जारी किया जा चुका है। यह देश का इकलौता राज्य, जहां एनआरसी को लागू किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें देश के पूर्वोत्तर राज्य के कुल 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल हैं। वहीं, 40 लाख लोगों को इसमें अवैध (अवैध तरीके से रह रहे) पाया गया।

पश्चिम बंगाल में भी इसको लागू करने के लिए आवाज बुलंद की जा रही है। गोशमहल विधानसभा से एमएलए राजा सिंह ने इसी मसले पर अपनी राय जाहिर की है। लेकिन बीजेपी की तरफ से इस मुद्दे पर आक्रामक रवैया अपनाने वाले वह इकलौते नेता नहीं है। उनसे पहले पश्चिम बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि अगर राज्य में उनकी सरकार बनी तो असम की तरह प.बंगाल में भी एनआरसी को लागू किया जाएगा।

घोष ने पत्रकारों को बताया था, “बंगाल में तकरीबन एक करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी अवैध तरीके से रह रहे हैं। हम उनमें से किसी एक को भी नहीं छोड़ेंगे। अब उन्हें बुरे हालात का सामाना करना पड़ेगा। और जो लोग उनका पक्ष ले रहे हैं, वे भी अपने बैग पैक कर लें।”

उधर, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि उनकी पार्टी में एनआरसी को लागू करने की हिम्मत है। यह वर्ष 1985 में हुए असम समझौते की आत्मा जैसी है। राजीव गांधी की सरकार ने वह समझौता तो किया था, पर एनआरसी को लागू नहीं किया।

वहीं, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने एनआरसी को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि ममता इस मसले पर राजनीति कर रही हैं। वह तो बस वोट बैंक के लिए चिंतित है, लिहाजा वह एनआरसी का विरोध कर रही हैं।

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