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हाजिरी का फरमान सुन हनीमून छोड़ लौटीं सांसद अगाथा संगमा, पति संग पहुंचीं सांसद

मालूम हो कि मेघालय समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में मोदी सरकार की तरफ से पेश किए जाने वाले बिल का विरोध हो रहा है। नागरिकता संशोधन बिल मेघालय के लिए काफी संवेदनशील मामला है।

Author Edited By Anil Kumar नई दिल्ली | Published on: December 5, 2019 10:11 AM
संसद भवन परिसर में अपने पति पैट्रिक रोंगमा के साथ अगाथा संगमा। (एक्सप्रेस फोटोः रेनुका पुरी)

पार्टी की तरफ से हाजिरी का फरमान मिलने पर सांसद अपना हनीमून छोड़ संसद भवन पहुंच गईं। मौका था संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मोदी सरकार की तरफ से लोकसभा में पेश किए जाने वाले नागरिकता संशोधन बिल का। पार्टी ने बिल पेश होने के दौरान सरकार में शामिल सभी दलों के सांसदों को सदन में मौजूद रहने का फरमान सुनाया था।

इसके बाद तुरा से पार्टी की सांसद अगाथा संगमा अपना हनीमून बीच में ही छोड़कर संसद भवन पहुंची। मालूम हो कि अगाथा संगमा नेशनल पीपुल्स पार्टी की सांसद है। उनकी पार्टी एनडीए सरकार में सहयोगी के रूप में शामिल हैं। अगाथा संगमा की शादी नवंबर के तीसरे सप्ताह में हुई थी।

बुधवार को अगाथा अपने पति पैट्रिक रोंगमा के साथ संसद भवन पहुंची। मालूम हो कि नागरिकता संशोधन बिल मेघालय के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मेघालय में मोदी सरकार की तरफ से पेश किए जाने वाले बिल का विरोध हो रहा है। ऐसे में संवेदनशील मुद्दे पर अगाथा संगमा सदन में अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कोई चांस नहीं लिया।

वह चाहतीं तो वोटिंग के दौरान अनुपस्थित हो सकती थीं। लेकिन इस बिल के प्रति राज्य के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए वह संसद पहुंचीं। मालूम हो कि नागरिकता संशोधन विधेयक में पड़ोसी देश से शरण के लिए भारत आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी व ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है।

वहीं, विपक्ष की तरफ से इस बिल के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह बिल संविधान की भावना के विपरीत है। पूर्वोत्तर के राज्यों में इस बिल का व्यापक पैमाने पर विरोध हो रहा है। यहां लोगों का कहना है कि सरकार हिंदू मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के उद्देश्य से बांग्लादेश से आए हिंदुओं को यहां बसाना चाहती है।

पूर्वोत्तर से सबसे बड़े राज्य असम में भी इसका विरोध हो रहा है। स्थानीय अखबारों का कहना है कि इस विधेयक पर केंद्र सरकार आगे बढ़ती है तो भाजपा को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ेगा।

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