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‘सुदर्शन चक्र’ जैसा वार करनेवाला मिसाइल बनाएगा भारत, दुश्मनों पर हमला कर अपने बेड़े में आ जाएगा वापस

भारत वर्तमान में मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजिम (एमटीसीआर) का मुख्य सदस्य बन चुका है। इस समूह में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देश शामिल हैं।

DRDO BRAHMOS, BRAHMOS Missile news, BRAHMOS Supersonic Missile, BRAHMOS Cruise Missile, BRAHMOS Missile Rangeब्रह्मोस उन्‍नत श्रेणी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। (Source: PTI)

रक्षा, मिसाइल और अंतरिक्ष के क्षेत्र में रोज नए मुकाम बनाने वाला भारत अब ऐसी मिसाइल बनाने जा रहा है जो दुश्मनों पर हमला करने के बाद वापस अपने खेमे में आ जाएगा। ये हैरान कर देने वाली बात जरूर है, लेकिन ऐसा हो सकता है। शुक्रवार को भोपाल के विज्ञान मेले में पहुंचे डीआरडीओ के विशिष्ट वैज्ञानिक और ब्रह्मोस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट तैयार है, अनुमति मिलते ही हम काम शुरू कर देंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी तरह खुफिया रहेगा। अभी तक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता सिर्फ 290 किमी किमी प्रतिघंटा है लेकिन इसे बढ़ाकर 450 किमी प्रति घंटे करने की योजना है। उन्होंने बताया कि इसका परीक्षण मार्च के दूसरे हफ्ते में किया जाएगा। पिछले साल गोवा में हुए सॉर्क सम्मेलन में इसकी मारक क्षमता को बढ़ाने की अनुमति मिली थी।

‘नई दुनिया’ को मिश्रा ने बताया कि हम मार्च के अंतिम सप्ताह में 1000 हजार किमी प्रति घंटे की क्षमता वाले ब्रम्होस मिसाइल का परीक्षण करने वाले हैं। भारत वर्तमान में मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजिम (एमटीसीआर) का मुख्य सदस्य बन चुका है। इस समूह में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देश शामिल हैं।

मिश्रा ने कहा, ‘भारत और दुनिया के पास अभी तक ऐसी मिसाइलें हैं, जो लक्ष्य पर प्रहार कर वहीं समाप्त हो जाती हैं, लेकिन भारत ठीक वैसी मिसाइल बनाना चाहता है, जैसे सुदर्शन चक्र दुश्मन पर वार कर वापस लौट आता था। हमारी परंपरा वैदिक और आध्यात्मिक रही है, तो इस मिसाइल का विचार भी भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र से लिया गया है।’

ताजा योजना के अनुसार मिसाइल की गति 5 मैक तक करने की है और इस पर अगले दो से तीन साल में काम पूरा होने की उम्मीद है। अभी ब्रह्मोस की मारक क्षमता 300 किमी है और स्पीड 2.08 मैक। एक मैक का अर्थ होता है ध्वनि के बराबर की गति। मिश्रा ने बताया कि मिसाइल 10 मीटर तक नीचे आ सकती है और इतनी देर में दुश्मन को अंतिम प्रार्थना करने का भी वक्त नहीं मिलता। मिश्रा ने इस बेहतरीन मिसाइल को तैयार करने का श्रेय डा. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया।

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