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रोजगार, कारोबार पर ग्रहण की तरह है शराबबंदी, बूचड़खानों पर रोक

शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार किसी भी शहर में राजमार्ग के किनारे स्थित पांच सितारा होटलों में भी शराब नहीं परोसी जा सकेगी।

Author April 8, 2017 6:32 PM
बूचड़खाना (Express Photo)

केंद्र सरकार के बाद देश के विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी सरकारों के प्रसार के साथ न्याय एवं कानून व्यवस्था में भगवाधारी स्वयंसेवकों की सम्मिलित गतिविधियों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जिसके कारण देश में रोजगार की समस्या के और गंभीर होने का खतरा भी पैदा हुआ है। बेरोजगार दर में हो रही बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के राजमार्गो के किनारे शराब की दुकानें बंद करने के आदेश के चलते पर्यटन बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे कम से कम 10 लाख नौकरियां जाएंगी।

शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार किसी भी शहर में राजमार्ग के किनारे स्थित पांच सितारा होटलों में भी शराब नहीं परोसी जा सकेगी। भाजपा सांसद किरन खेर तक ने इस अव्यावहारिक प्रतिबंध पर सवालिया निशान खड़े करते हुए कह दिया, “यह कौन सा तर्क है कि आप पांच सितारा होटल तक में शराब नहीं परोस सकते? होटल उद्योग बड़ी संख्या में रोजगार देता है, इसलिए यह 10 लाख से अधिक लोगों के रोजगार का सवाल है।”

ऐसा नहीं है कि रोजगार पर सिर्फ शराबबंदी के प्रसार से ही बुरा असर पड़ रहा है। उत्तर और भाजपा शासित अन्य प्रदेशों में अवैध बूचड़खानों और मांस की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई से भी रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उत्तर प्रदेश में वैध एवं अवैध बूचड़खानों को बंद करवाए जाने से तीन उद्योग प्रभावित हुए हैं, डिब्बाबंद मांस, पशुपालन और चमड़ा उद्योग। डिब्बाबंद मांस और चमड़े के उत्पाद देश से निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश बेरोजगारी दर के मामले में झारखंड के बाद देश में दूसरे स्थान पर है और इससे ज्यादा बेरोजगारों का भार उठाने में असक्षम है। बेरोजगारी दर का राष्ट्रीय स्तर जहां प्रति 1,000 व्यक्ति पर 37 का है, वहीं उत्तर प्रदेश में यह दर 58 का है।

देखिए वीडियो - बिहार शराबबंदी: पटना हाईकोर्ट ने सरकार के प्रतिबंध के कानून को ‘गैरकानूनी’ बताकर रद्द किया

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