ताज़ा खबर
 

चिकित्सा शिक्षा में व्यापक बदलाव लाएगा राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने सोमवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनसीएम) बनाने के लिए लोकसभा में विधेयक 2019 पेश किया। इस विधेयक के जरिए 63 साल पुराने भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआइ) को भंग कर उसकी जगह मेडिकल की शिक्षा, चिकित्सा वृति और मेडिकल संस्थाओं के विकास और नियमन के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) गठित करने का प्रावधान किया गया है।

Author Published on: July 24, 2019 1:53 AM
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने सोमवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनसीएम) बनाने के लिए लोकसभा में विधेयक 2019 पेश किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने सोमवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनसीएम) बनाने के लिए लोकसभा में विधेयक 2019 पेश किया। इस विधेयक के जरिए 63 साल पुराने भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआइ) को भंग कर उसकी जगह मेडिकल की शिक्षा, चिकित्सा वृति और मेडिकल संस्थाओं के विकास और नियमन के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) गठित करने का प्रावधान किया गया है। 16वीं लोकसभा में भी यह विधेयक पेश किया गया था और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मामलों की संसदीय स्थायू समिति ने इस पर मुहर लगा दी। लेकिन 16वीं लोकसभा के विघटन के बाद यह समाप्त हो गया।

विधेयक में क्या हैं प्रावधान
इस विधेयक में देश में चिकित्सा की शिक्षा को एक समान बनाने का प्रस्ताव है। मेडिकल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए नीट खत्म कर एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के परिणाम को आधार बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही विदेशों से एमबीबीएस करने वालों को पीजी में दाखिला देने के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) का प्रावधान प्रस्तावित है। एमबीबीएस और पीजी कोर्स में 50 फीसद सीटों के लिए फीस के नियंत्रण का भी प्रावधान किया गया है। विधेयक में आयोग को सलाह देने और सिफारिशें करने के लिए एक आयुर्विज्ञान सलाहकार परिषद के गठन का भी प्रस्ताव है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग का गठन हो जाने के बाद आयुर्वेद और होम्योपैथिक के चिकित्सक भी प्राथमिक स्तर पर एलोपैथी की प्रैक्टिस कर सकेंगे। इसके लिए आयोग उन्हें बतौर सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाता लाइसेंस जारी करेगा।
राज्य सरकारों को छूट होगी कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरत के मुताबिक, चिकित्सकों के अलावा, बीएससी (नर्सिंग), बीडीएस, बीफार्मा डिग्री धारकों को भी इसकी इजाजत दे सके।

ब्रिज कोर्स का मसला
विधेयक में इसके लिए सीधे-सीधे किसी ब्रिज कोर्स का जिक्र तो नहीं किया गया है, लेकिन इसमें कहा गया है कि लाइसेंस जारी करने के लिए जरूरी मानदंड आयोग का गठन होने के बाद तैयार किए जाएंगे। किसी भी सूरत में इस श्रेणी में जारी करने वाले लाइसेंस की संख्या पंजीकृत चिकित्सकों की संख्या के एक तिहाई से अधिक नहीं होगी। विधेयक के मुताबिक सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाता प्राथमिक स्तर पर अपने स्तर पर मरीजों को कुछ खास दवाएं दे सकेंगे। प्रस्तावित विधेयक में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता के तरीकों में बदलाव का सुझाव है। मान्यता के लिए सालाना रीन्यूअल की जरूरत नहीं होगी। कॉलेज को अपने स्तर पर सीटें बढ़ाने की छूट होगी। अधिकतम सीमा अभी जैसी 250 ही रखी जाएगी।

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग का स्वरूप
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग में 25 सदस्य होंगे, जिन्हें एक सर्च कमेटी चुनेगी। कैबिनेट सचिव इसके प्रमुख होंगे। विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि आयोग के गठन के साथ ही प्रस्तावित नेशनल एग्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) शुरू नहीं होगी। इसे आयोग के गठन से तीन साल के भीतर शुरू किया जाएगा। जब तक नेक्स्ट शुरू नहीं होता परीक्षा की पुरानी व्यवस्था ही कायम रहेगी।

एमसीआइ भंग का प्रस्ताव क्यों
परिवार एवं कल्याण पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी 92वीं रिपोर्ट में एमसीआइ की आलोचना करते हुए कहा, ‘सक्षम चिकित्सक तैयार करने और गुणवत्ता बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पाया। गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा अपने निम्नतम स्तर पर है। चिकित्सा शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था सही ढंग के पेशेवरों को तैयार नहीं कर पा रही। देश की आधारभूत स्वास्थ्य जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं, क्योंकि मेडिकल शिक्षा और पाठ्यक्रम को हमारी स्वास्थ्य प्रणाली के मुताबिक तैयार नहीं किया गया है। मेडिकल कॉलेजों से पढ़कर निकलने वाले कई लोग तो गरीबों के लिए बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों या जिला स्तर तक भी काम करने के योग्य नहीं हैं।

स्थायी समिति की राय का आधार
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने अपनी 92वीं रिपोर्ट में आयुर्विज्ञान शिक्षा और चिकित्सा व्यवसाय की विनियामक पद्धति का पुनर्गठन और सुधार की सिफारिश की है। सिफारिश डॉ. रंजीत रायचौधरी की अध्यक्षता वाले विशेष समूह द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में मॉडर्न डेंटल कालेज रिसर्च सेंटर व अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में दो मई 2016 को केंद्र सरकार को रायचौधरी समिति की सिफारिशों पर विचार करने और समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। लोकसभा में 29 दिसंबर 2017 को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक 2017 लाया गया। इसे विचार के लिए संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया। समिति ने बाद में इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट पेश की। सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 28 मार्च, 2018 को लोकसभा में लंबित विधेयक के संबंध में शासकीय संशोधन प्रस्तुत किया था लेकिन 16वीं लोकसभा के विघटन के कारण इसे विचार एवं पारित किए जाने के लिए नहीं लाया जा सका।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 Bangalore Section 144 News: बेंगलुरू कमिश्नर ने वापस लिया शराब की बिक्री पर रोक वाला फैसला
2 Video: चेन्नई में बीच सड़क पर कॉलेज स्टूडेंट्स ने खूब भांजे गंडासे, खूनी हमले में दूसरे ग्रुप के कई छात्र घायल
3 कर्नाटक: बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट, बेंगलुरू में अगले 48 घंटे तक धारा 144 लागू
ये पढ़ा क्या?
X