ताज़ा खबर
 

मोदी सरकार में लगातार घट रही पुरुष कामगारों की संख्‍या, रोकी गई NSSO रिपोर्ट के आंकड़ों से खुलासा

सरकार के इस कदम के विरोध में नेशनल स्टेटिकल कमीशन के कार्यवाहक चेयरपर्सन पीसी मोहनन और एक सदस्य जेवी मीनाक्षी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

मोदी सरकार के कार्यकाल में पुरुष कामगारों की संख्या में काफी गिरावट आयी है। (PTI Photo)

केन्द्र की मोदी सरकार रोजगार के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है। सत्ता में आने से पहले भाजपा ने हर साल युवाओं को करोड़ो रोजगार देने का ऐलान किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद से सरकार अपना यह वादा पूरा करने में नाकाम रही। अब नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) की एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में पुरुष कामगारों की संख्या घट रही है। साल 2017-18 में NSSO द्वारा किए गए Periodic Labour Force Survey (PLFS) में खुलासा हुआ है कि साल 1993-94 के बाद 2017-18 में पुरुष कामगारों की संख्या में 28.6 करोड़ की गिरावट आयी है। द इंडियन एक्सप्रेस ने इस रिपोर्ट का रिव्यू किया है। साल 1993-94 में यह संख्या 21.9 करोड़ थी, वहीं साल 2011-12 में यह आंकड़ा 30.4 करोड़ था। इस सर्वे से पता चलता है कि पिछले पांच सालों के दौरान देश में रोजगार के बेहद ही कम मौके पैदा हुए हैं।

सरकार ने जारी नहीं की रिपोर्टः खास बात ये है कि सरकार ने इस रिपोर्ट को जारी करने से फिलहाल रोक दिया है। माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए यह फैसला किया गया है। उल्लेखनीय है कि सरकार के इस कदम के विरोध में नेशनल स्टेटिकल कमीशन के कार्यवाहक चेयरपर्सन पीसी मोहनन और एक सदस्य जेवी मीनाक्षी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पीसी मोहनन ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में बताया था कि ‘सामान्य परिपाटी यह है कि NSSO अपने निष्कर्षों को आयोग के सामने रखता है और एक बार अनुमोदित किए जाने के बाद रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में जारी कर दी जाती है। हमने NSSO सर्वे को दिसंबर (2018) की शुरुआत में स्वीकृति दे दी थी, लेकिन करीब दो महीने गुजर जाने के बाद भी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।’

इस रिपोर्ट में देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों का अलग-अलग डाटा भी दिया गया है। जिसके मुताबिक शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर 7.1 प्रतिशत रही, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 5.8 प्रतिशत है। पहचान जाहिर ना करने की शर्त पर एक विशेषज्ञ ने बताया कि अभी इस डाटा का और अध्ययन किया जाना है, लेकिन यह बात साफ है कि नौकरियों में कमी आयी है और रोजगार के नए मौके भी पैदा नहीं हुए हैं।

NSSO के डाटा के अनुसार, साल 2011-12 से लेकर साल 2017-18 के बीच देश के ग्रामीण इलाकों में 4.3 करोड़ नौकरियां कम हुईं। वहीं इस दौरान शहरी इलाकों में 40 लाख नौकरियां कम हुई। ग्रामीण इलाकों में महिला रोजगार में 68 प्रतिशत की कमी आयी। शहरों में पुरुष कामगारों को रोजगार में 96 प्रतिशत की कमी आयी है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2011-12 से अब तक देश में कुल 4.7 करोड़ रोजगार कम हुए हैं, जो कि सऊदी अरब की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है।

PLFS की रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी शिक्षा पाने वाले कामगारों के प्रतिशत में कमी देखी गई है, जिसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। साल 2011-12 से लेकर 2017-18 तक रोजगार की वोकेशनल/टेक्नीकल ट्रेनिंग पाने वालों की संख्या में 2.2 प्रतिशत की गिरावट आयी है।

Next Stories
1 लोकसभा चुनाव से पहले मिला देश को पहला लोकपाल, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को मिली जिम्मेदारी
2 BJP के खिलाफ एकजुट हुए 70 संगठन, 50 शहरों में चलाएंगे एंटी मोदी कैंपेन
3 Kerala Sthree Sakthi Lottery SS-149 Today Results: 60 लाख रुपए तक का इनाम घोषित, जानिए कैसे करें इनाम का दावा
ये पढ़ा क्या?
X