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CAA विरोध के चलते तीन दिन में दूसरी बार IIT प्रोफेसर से पूछताछ करेगी NIA? 42 विद्वानों ने जारी की अपील

हालांकि, इस मामले में आईआईटी गुवाहाटी में इतिहास के प्रोफेसर अरूपज्योति सैकिया को बुद्धिजीवी वर्ग का साथ मिला है। 52 वर्षीय प्रोफेसर के समर्थन में 42 विद्वानों ने अपील जारी की है।

Author Edited By Anil Kumar गुवाहाटी | Updated: February 3, 2020 9:17 AM
Arupjyoti Saikiaअरूपज्योति सैकिया असमिया इतिहासकार और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी (IIT-G) में संकाय सदस्य हैं।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने वाले आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी उनसे तीन दिन में दूसरी बार पूछताछ कर सकती है। इससे पहले केंद्रीय जांच एजेंसी ने उनसे शनिवार को पूछताछ की थी। एजेंसी ने उनसे सोमवार को फिर से पूछताछ के लिए उपलब्ध रहने के लिए समन जारी किया है।

जांच एजेंसी की तरफ से समन भेजे जाने के कारण को लेकर आधिकारिक रूप से किसी भी तरह की पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि यह समन 11 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान हुई हिंसा को लेकर जारी किया गया है। बता दें कि असम के मंत्री और भाजपा नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने पिछले महीने कहा था कि सरकार को पता चला है कि शहर में नागरिकता कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में हिंसा भड़काने में अग्रणी शिक्षाविदों की भूमिका रही है।

प्रोफेसर सैकिया के वकील शांतनु ने बताया कि दिसंबर 2019 की शुरुआत में प्रोफेसर को अखिल गोगोई की गिरफ्तारी के मामले में गवाह के रूप में बुलाया गया था। वकील ने बताया कि शनिवार को प्रोफेसर सैकिया से दो घंटे तक पूछताछ की गई थी। इसके अलावा सीआरपीसी की धारा 161 के तह उनका बयान भी दर्ज किया गया था। वर्तमान में अभी उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है और उन्हें सिर्फ गवाह के रूप में बुलाया गया था। प्रोफेसर सैकिया को सोमवार को दुबारा पूछताछ के लिए समन भेजा गया है।

मालूम हो कि कृषक मुक्ति संग्राम समिति के संस्थापक गोगोई को गुवाहाटी में सीएए के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, इस मामले में आईआईटी गुवाहाटी में इतिहास के प्रोफेसर अरूपज्योति सैकिया को बुद्धिजीवी वर्ग का साथ मिला है। 52 वर्षीय प्रोफेसर के समर्थन में 42 विद्वानों ने अपील जारी की है।

इस अपील में प्रोफेसर से एजेंसी की सघन पूछताछ के दौरान उनकी गरिमा बनाए रखने के साथ ही उन्हें सम्मान देने की बात कही गई है। प्रोफेसर सैकिया का समर्थन करने वालों में जाधवपुर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एमिरेट्स सुकांता चौधरी, इतिहासकार रामचंद्र गुहा, सेंटर फॉक स्टडीज इन सोशल साइंसेज के पूर्व निदेशक पार्थ चटर्जी, एकेडेमिशिनन और कॉलमिस्ट प्रताप भानु मेहता, जाधवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुप्रिय चौधरी दिल्ली यूनिवर्सिटी की नंदिनी सुंदर, जेएनयू की निवेदिता मेनन और आईआईटी मद्रास की इनाक्षी भट्टाचार्य शामिल हैं।

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