राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को मध्य और दक्षिण कश्मीर के इलाकों में छापेमारी की है। सूत्रों के मुताबिक, श्रीनगर के लाल नजर इलाके और दक्षिण कश्मीर के शोपियां सहित कई जगहों पर एनआईए ने छापेमारी की है।

जांच एजेंसी ने यह छापेमारी प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर को फिर से सक्रिय करने की कोशिशों के मामले में की है। फरवरी 2024 में केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धारा 3(1) के तहत जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर को पांच साल के लिए गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया था। जमाते इस्लामी कश्मीर की स्थापना 1953 में हुई थी।

मुस्लिम राइटविंग संगठन जमात-ए-इस्लामी की स्थापना 1941 में हुई थी। भारत विभाजन के संस्थापक मौलाना मौदूदी पाकिस्तान चले गये। जमात-ए-इस्लामी के भारत में रह गये सदस्यों ने जमाते इस्लामी हिन्द और जमाते इस्लामी जम्मू-कश्मीर का गठन किया।

भारत विरोधी प्रचार में शामिल होने का आरोप

जमात-ए-इस्लामी का गठन 1941 में हुआ था और इस पर जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद और भारत विरोधी प्रचार में शामिल होने का आरोप है। इस संगठन पर यह भी आरोप है कि इसने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया है।

जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि यह कदम नरेंद्र मोदी सरकार की आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उठाया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि एनआईए ने शोपियां के इमाम साहिब इलाके में स्थित दारुल उलूम में तड़के छापा मारा। यह शिक्षण संस्थान सैकड़ों छात्रों को शिक्षा देता है। एनआईए की एक अन्य टीम ने जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख शहजादा औरंगजेब के मोलू चित्रगाम में स्थित घर पर भी छापा मारा।

जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेरर पर बड़ा प्रहार

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश में नारको-टेरर के खिलाफ चलाए गए अपने एक ऑपरेशन में गिरफ्तार किए गए कथित मादक पदार्थों के तस्करों के कम से कम 116 पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।