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मानवाधिकार पर पश्चिमी देशों का पैमाना भारत में नहीं चलेगा- बोले अमित शाह

26वें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मौके पर बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा, "नक्सलियों या कश्मीर में आतंकियों द्वारा लोगों को प्रभावित करने की तुलना में कोई और बड़ा मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं हो सकता।"

Author October 13, 2019 10:12 AM
26वें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह। (फोटो सोर्स: पीटीआई)

भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने देश में मानवाधिकारों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत के संदर्भ में मानवाधिकार का पैमाना पश्चिमी देश नहीं हो सकते हैं। मंगलवार को शाह ने कहा कि भारत की मानवाधिकार नीति हिरासत में मौत और पुलिसिया अत्याचार के बजाय उग्रवादियों या माओवादियों द्वारा मारे गए नागरिकों के अधिकारों पर केंद्रित होने चाहिए। 26वें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मौके पर बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा, “नक्सलियों या कश्मीर में आतंकियों द्वारा लोगों को प्रभावित करने की तुलना में कोई और बड़ा मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं हो सकता।”

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मानवाधिकारों के मानकों को भारतीय मुद्दों पर आंख बंद करके लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सरकार द्वारा नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, “औरतों के पास शौचालय नहीं होना और खाना पकाने का सुरक्षित तरीका नहीं होना मानवाधिकार का मुद्दा है। मोदी सरकार ने ऐसी परिस्थितियों से लाखों को लोगों को बाहर निकालने का काम सुनिश्चित किया है।” गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत उस दिशा की ओर बढ़ रहा है जहां किसी भी प्रकार के मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा।

अमित शाह ने कहा कि भारत में मानवाधिकारों स्वत: निर्मित ढांचा है। हमारे पारिवारक मूल्यों में महिलाओं और बच्चों को विशेष सुरक्षा देना शामिल है। गांव के गरीबों की देखभाल करना धर्म का हिस्सा माना जाता है।” इस दौरान एनएचआरसी के चेयरपर्सन और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू ने कहा कि सरकार ने आयोग का पूरा समर्थन किया है। आयोग के मुताबिक 2018-19 में कानूनी मामलों का बैकलॉग काफी कम हो गया है और सिर्फ 2017 के बाद दर्ज किए गए मामले ही वर्तमान में लंबित हैं। जानकारी के मुताबिक एनएचआरसी ने 691 मामलों की सुनवाई की और फैसला दिया। इन मामलों में 25.38 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया।

हालांकि, हिरासत में मौत और एक्स्ट्रा जूडिशल कीलिंग्स के मामले पर अमित शाह ने चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि इसे रोकना हमारा दायित्व है। लेकिन हर किसी की जिदंगी में सम्मान और शांति सुनिश्चित कराना भी हमारा कर्तव्य है। शाह ने कहा कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की शिक्षा देती है। विश्व को परिवार के नजरिए से देखना की सोच मानवाधिकार की सबसे बड़ी अवधारणा है।

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