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हेरल्ड मामला: सोनिया-राहुल को कोर्ट में जमानत, बाहर सियासत

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को नेशनल हेरल्ड मामले में शनिवार को जमानत मिल गई। हाई कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी निचली अदालत में पेश हुए..

Author नई दिल्ली | December 20, 2015 01:17 am
जमानत मिलने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट से बाहर आते सोनिया गांधी और राहुल गांधी।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को नेशनल हेरल्ड मामले में शनिवार को जमानत मिल गई। हाई कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी निचली अदालत में पेश हुए। सोनिया गांधी के जमानती एके एंटनी और राहुल गांधी की जमानती उनकी बहन प्रियंका वाड्रा बनीं। अदालत ने इन्हें 50 हजार के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि के आधार पर जमानत दे दी। सुनवाई की अगली तारीख अगले साल 20 फरवरी के लिए तय कर दी।

अदालत में मोतीलाल वोरा को छोड़कर सभी आरोपी करीब 20 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान खड़े रहे। हालांकि अदालत ने शिकायतकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी का वह अनुरोध ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने सोनिया और राहुल के पासपोर्ट अदालत में जमा करने की मांग की थी। अदालत इस बात से सहमत नहीं हुई कि सोनिया और राहुल प्रभावशाली होने के कारण देश छोड़कर भाग सकते हैं।

कड़ी सुरक्षा के बीच आठ दिसंबर को भेजे गए समन पर तामील करते हुए अपने वकीलों के साथ सोनिया राहुल व तीन अन्य आरोपी मोतीलाल बोरा, आस्कर फर्नांडीज और सुमन दूबे दिल्ली में पटियाला हाउस अदालत परिसर में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन की अदालत में पेश हुए। यह मामला सुब्रमण्यम स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत पर आधारित है जिसमें इन पर धोखधड़ी, साजिश और आपराधिक विश्वाघात का आरोप लगाए गए हैं। ये सभी 2010 में बनाई गई कंपनी यंग इंडिया के निदेशक हैं। इसने ही नेशनल हेरल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स के कर्ज ले लिए थे।

गुलाम नबी आजाद ऑस्कर फर्नांडिज के जमानती बने। जबकि अजय माकन और वीके हरि प्रसाद क्रम से सुमन दूबे व मोतीलाल बोरा के जमानती बने। एक अन्य आरोपी सैम पित्रोदा को चिकित्सा आधार पर निजी रूप से पेश होने से छूट दे दी गई। मजिस्ट्रेट ने इन्हें जमानत देते हुए कहा कि जाने-माने लोग हैं और इनके गहरे राजनीतिक आधार हैं और इनके देश छोड़कर भागने की कोई आशंका नहीं है।

स्वामी ने कहा कि उनका यह दावा कि वे जमानत नहीं लेंगे गलत साबित हो गया है। इससे पहले मनमोहन सिंह और मल्लिकार्जुन खरगे, अंबिका सोनी, शीला दीक्षित, अश्विनी कुमार, मीरा कुमार समेत अनेक कांग्रेसी नेता अदालत परिसर पहुंचे जहां तीन बजे मामले की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई शुरू होने पर स्वामी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सोनिया और राहुल समेत अन्य आरोपी काफी प्रभावशाली लोग हैं और वे देश छोड़कर भाग सकते हैं। इनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाएं। इन पर यात्रा पाबंदी लगा दी जाए।

कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी समेत कांग्रेस के कई वकीलों ने अदालत को बताया कि ये लोग समाज में गहरे रूप से जुड़े हैं। उच्च पदों पर है। इनके खिलाफ पहले कोई आरोप नहीं हैं। इस मामले में अदालत ने आठ दिसंबर को समन जारी किए थे। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें आरोपी के रूप में मौजूद होने के लिए जारी समन खारिज करने से इनकार कर दिया था।

सुनवाई के बाद सिब्बल व सिंघवी ने पत्रकारों से कहा कि अदालत ने स्वामी का अनुरोध ठुकरा दिया और नेताओं को बिना शर्त जमानत दे दिया। उन्होंने कहा कि मुझे अदालत के आदेश से रत्ती भर की असंतुष्टि का कोई कारण नहीं दिखता है। स्वामी ने कांग्रेस की इन आलोचनाओं को ठुकरा दिया कि वह भाजपा की शह पर राजनीतिक बदले का काम कर रहे हैं। स्वामी ने कहा कि इस मामले में साक्ष्य को देखें और बदले की कार्रवाई को नहीं। मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि सुनवाई की अगली तारीख पर किसी भी आरोपी को व्यक्तिगत रूप से मौजूद होने की छूट नहीं दी जाएगी। स्वामी को सुनवाई की अगली तारीख को अपनी शिकायत के समर्थन में उपयुक्त दस्तावेज लाने का निर्देश दिया अदालत ने।

सोनिया, राहुल, बोरा (कांग्रेस कोषाध्यक्ष), फर्नांडीज (कांग्रेस महासचिव), दूबे और पित्रोदा को आइपीसी की धारा 403 (बेईमानी से संपत्ति की हेराफेरी), धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत समन भेजे गए थे।

जमानत और ‘जंग’
जमानत मिलने के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार अपने विरोधियों को निशाना बना रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं और हमारी लड़ाई जारी रहेगी। वहीं राहुल गांधी ने कहा, ‘मोदी जी झूठे इल्जाम लगवाते हैं और सोचते हैं कि विपक्ष झुक जाएगा। मैं और कांग्रेस पार्टी नहीं झुकेंगे। हम एक इंच पीछे नहीं जाएंगे’।

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