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अपनी मातृभाषा में पढ़ सकेंगे छोटे बच्चे, भाषा का विकल्प बढ़ा, जानिए- नई शिक्षा नीति में क्या हुए अहम बदलाव?

कैबिनेट ने मानव संसाधान विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय (एजुकेशन मिनिस्ट्री) करने के फैसले पर भी मुहर लगा दी।

अपनी मातृभाषा में पढ़ सकेंगे छोटे बच्चे, भाषा का विकल्प बढ़ा, जानिए- नई शिक्षा नीति में क्या हुए अहम बदलाव?
यूनियन कैबिनेट ने बुधवार 29 जुलाई को देश में नई शिक्षा नीति लागू किए जाने को हरी झंडी दे दी है। (प्रतीकात्मक फोटो)

केंद्रीय कैबनेट ने बुधवार को देश की नई एजुकेशन पॉलिसी (NEP-2020) को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD मिनिस्ट्री) के नाम को भी बदलकर शिक्षा मंत्रालय (एजुकेशन मिनिस्ट्री) कर दिया गया है। इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाले पैनल ने कुछ समय पहले ही नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट एचआरडी मिनिस्टर रमेश पोखरियाल निशंक को सौंप दिया था।

नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकार भारतीय शिक्षा के पूरे ढांचे को ही बदलने पर ध्यान देना चाहती है, ताकि ऐसा सिस्टम विकसित किया जा सके, जो 21वीं सदी के लक्ष्य के हिसाब से हो और भारत की परंपराओं से भी जुड़ा रहे।

क्या हैं नई शिक्षा नीति के प्रावधान?
नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी एजुकेशन (3-6 साल के बच्चों के लिए) का 2025 तक वैश्वीकरण किया जाना है। साथ ही सभी के लिए आधारभूत साक्षरता मुहैया कराना है। इसके अलावा सभी को शिक्षा मुहैया कराने के लक्ष्य के साथ NEP में 2030 तक 3 से 18 साल के बच्चों के लिए शिक्षा को अनिवार्य किया जाना है।

New Education Policy 2020: तय होगी फीस, ई-लर्निंग पर भी जोर के अवाला ये बदलाव

नई शिक्षा नीति में सरकार ने छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके लिए 3 से 18 साल के छात्रों के लिए 5+3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है। इसके तहत छात्रों की शुरुआती स्टेज की पढ़ाई के लिए 5 साल का प्रोग्राम तय किया गया है। इनमें 3 साल प्री-प्राइमरी और क्लास-1 और 2 को जोड़ा गया है। इसके बाद क्लास-3, 4 और 5 को अगले स्टेज में रखा गया है। क्लास-6, 7, 8 को तीन साल के प्रोग्राम में बांटा गया है। आखिर क्लास-9, 10, 11, 12 को हाई स्टेज में रखा गया है।

छात्रों को आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज, साइंस, स्पोर्ट्स और वोकेशनल सब्जेक्ट में ज्यादा छूट और कई सब्जेक्ट्स के विकल्प देने का भी प्रावधान किया गया है। ताकि छात्र अफनी पसंद के विषय पर ज्यादा ध्यान दे सकें। इसके अलावा चूंकि स्टूडेंट्स 2 से 8 साल की उम्र में जल्दी भाषाएं सीख जाते हैं। इसलिए उन्हें शुरुआत से ही स्थानीय भाषा के साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्रावधान रखा गया है। गौरतलब है कि तीन भाषाओं का फॉर्मेट 1968 से ही शिक्षा नीति में शामिल है।

नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों के लिए क्लास-6 से क्लास-8 तक एक शास्त्रीय भाषा सिखाने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वे नई भाषा सीखने के साथ कुछ अहम भाषाओं के संरक्षण में भी शामिल रहें। सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में क्लास-6 से 8वीं के बीच कम से कम दो साल का लैंग्वेज कोर्स प्रस्तावित है। दूसरी तरफ छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पढ़ाई के साथ फिजिकल एजुकेशन को जरूरी बनाने का नियम भी रखा गयया है। सभी छात्रों के लिए स्कूल के हर स्तर पर खेल, योगा, मार्शल आर्ट्स, डांस, गार्डनिंग जैसी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज भी सुनिश्चित की जाएंगी।

हर राज्य में शिक्षा नियामक तय करने के लिए अथॉरिटी का गठन
नई शिक्षा नीति में एक खास बात यह है कि इसमें हर राज्य के लिए स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण तैयार किए जाएंगे, जो राज्यों में शिक्षा के स्तर और नियमों को लागू कराएंगे। वहीं रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की भी स्थापना की जाएगी। इसके जरिए बेहतरीन रिसर्च प्रस्तावों को समीक्षा के बाद फंडिंग प्रदान की जाएगी। नई नीति में एक राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करेंगे। यह पैनल देश में शिक्षा के जरियों को विकसित करने, उन्हें लागू करने, उसका मूल्यांकन और पुनर्निरीक्षण करने का काम करेगा।

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