दलितों के खिलाफ जुर्म में यूपी टॉप पर, महानगरों में लखनऊ अव्वल तो पटना नंबर दो - National Crime Record Bureau Latest Data Lucknow is on top and patna get second position on atrocities against Dalits cases - Jansatta
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दलितों के खिलाफ जुर्म में यूपी टॉप पर, महानगरों में लखनऊ अव्वल तो पटना नंबर दो

देशभर में दलितों पर हुए अत्याचारों के मामले की बात करें तो 2016 में 40,801 केस दर्ज किए गए थे जबकि 2015 में यह आंकड़ा 38,670 था।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ो के सामने आने के बाद यह सिद्धांत सिरे से खारिज हो गया है कि महानगरों में जाति के आधार पर हिंसा नहीं होती है। एनसीआरबी के डाटा के अनुसार हमेशा उत्तर प्रदेश और बिहार में दलितों के खिलाफ अपराध के मामले सामने आते रहे हैं। साल 2016 में जाति के आधार पर हुई हिंसा को लेकर एनसीआरबी ने 19 महानगरों का डाटा जारी किया है जिसमें लखनऊ और पटना को अपराध के मामले में शीर्ष स्थान मिला है। एनसीआरबी के अनुसार 2016 में दलितों के खिलाफ अपराध के उत्तर प्रदेश में 10,426 मामले सामने आए थे और वहीं बिहार दूसरे नंबर रहा जहां पर 5,701 मामले दर्ज किए गए थे।

इस सूची में तीसरा स्थान राजस्थान को मिला है जहां पर दलितों के खिलाफ अपराध के 5,134 मामले दर्ज किए गए थे। 19 महानगरों में 2 मिलियन जनसंख्या है। इन शहरों में सबसे ज्यादा 241 केस केवल लखनऊ में दर्ज किए गए थे। पटना में 241 और जयपुर में 219 मामले दर्ज किए गए थे। इस सूची में चौथा स्थान बेंगलुरु का है जहां पर 207 दलितों के साथ अपराध की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद  139 केस के साथ हैदराबाद इस सूची में पांचवें स्थान पर है। देशभर में दलितों पर हुए अत्याचारों के मामले की बात करें तो 2016 में 40,801 केस दर्ज किए गए थे जबकि 2015 में यह आंकड़ा 38,670 था।

बता दें कि एनसीआरबी साल 2014 से महानगरों में दलितों पर होने वाले अपराधों के मामलों के आंकड़े जुटाने में लगा हुआ है लेकिन यह पहली बार है जब एनसीआरबी ने इन आंकड़ों को जारी किया है। हालांकि इन मामलों को केवल पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। आपको यह भी बता दें कि महानगरों में दलित जनसंख्या का भी कोई डाटा मौजूद नहीं है। सूत्रों के मुताबिक सबसे ज्यादा शहरों में जाति को लेकर हिंसा होती है क्योंकि शहरी दलित अपने हक के लिए काफी जागरुक हैं जिसके परिणामस्वरूप शहरों में ज्यादा मामले दर्ज किए जाते हैं।

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