Nasik TCS Controversy: महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टीसीएस (TCS) कार्यालय में अवैध धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न मामले की एक बड़ी घटना सामने आई है। सोमवार, 6 जुलाई को सत्र न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दो आरोपियों को जमानत दे दी, जबकि एक अन्य मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया।
कोर्ट ने इस मामले में महिला आरोपी निदा खान को अपराधी के दो महीने बाद अदालत से जमानत दी है। इसके अलावा तौसीफ अख्तर को भी कोर्ट ने जमानत संबंधित राहत दे दी है। हालांकि, दानिश शेख को अदालत से कोई राहत नहीं मिली और उसकी जमानत खारिज कर दी गई।
एसआईटी कर रही मामले की जांच
नासिक पुलिस की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) नासिक टीसीएस इकाई में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के संबंध में दर्ज कुल नौ मामलों की जांच कर रही है, जिनमें से एक मामला देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में और आठ मुंबई नाका में दर्ज किए गए हैं।
मई 2026 में हुई थी गिरफ्तारी
निदा खान का नाम देवलाली कैंप मामले में आया था, उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और टीसीएस के एक कर्मचारी को इस्लामी परंपराओं का पालन करने के लिए ‘प्रभावित’ करने का आरोप था। उन्हें मई 2026 में गिरफ्तार किया गया था, जब वह तीन महीने की गर्भवती थीं।
जमानत की सुनवाई के दौरान निदा खान के वकील बाबा सैयद ने तर्क दिया कि चूंकि पहले ही आरोप पत्र दायर किया जा चुका है, इसलिए उसका लगातार हिरासत में रहना निरंतर हिरासत अनावश्यक है, साथ ही उन्होंने चिकित्सा कारणों से जमानत का अनुरोध भी किया।
दानिश शेख की याचिका खारिज
अदालत ने दानिश शेख की याचिका खारिज करते हुए कहा कि टीसीएस मामले में उन पर गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी दानिश ने पीड़िता से झूठ बोलकर और शादी का वादा करके उसका विश्वास जीता और बाद में उससे यौन संबंध बनाए, जबकि वह पहले से ही शादीशुदा है। इसमें यह भी कहा गया कि अभियोजन पक्ष ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि यदि आवेदक को जांच के इस चरण में जमानत पर रिहा किया जाता है तो महत्वपूर्ण गवाहों पर संभावित रूप से प्रभाव पड़ सकता है।
अदालत ने कहा, “समग्र परिस्थितियों, पीड़ित पर हुए आघात और कथित अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, मुकदमे में महत्वपूर्ण गवाहों के साक्ष्य दर्ज होने तक उसे जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए।”
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