Nida Khan News: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की कर्मचारी निदा खान को गुरुवार देर रात छत्रपति संभाजी नगर के नारेगांव इलाके में एक दो मंजिला घर से गिरफ्तार किया गया। यहां पर वह चार रिश्तेदारों के साथ रह रही थीं। यह गिरफ्तारी छत्रपति संभाजी नगर पुलिस और नासिक पुलिस की तरफ से चलाए गए ऑपरेशन के बाद हुई है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि टेक्निकल सर्विलांस से निदा खान के ठिकाने का पता लगाने में मदद मिली, जबकि उनके परिवार ने कहा कि उन्होंने सभी कानूनी विकल्प आजमा लिए हैं और उन्हें उनकी गिरफ्तारी की उम्मीद है। परिवार के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हम उसकी गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे, इसका मुख्य कारण यह था कि हम जानते थे कि वह निर्दोष है और दूसरा कारण यह था कि वह गर्भवती है और हमें डर था कि जेल का उसके और नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा। हमने सभी कानूनी विकल्पों का पालन करने की कोशिश की और अब हम आगे जो भी होगा उसे स्वीकार कर चुके हैं।”

कहां पर छिपी थी निदा खान?

पुलिस ने बताया कि खान अपनी मां, चाची और दो रिश्तेदारों के साथ कौसर पार्क इलाके में स्थित बंगले में मिलीं। घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद, यह घर आसपास की इमारतों से अलग-थलग है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने पिछले पखवाड़े में घर में हलचल देखी थी और उनका मानना ​​​​था कि हाल ही में एक नया परिवार वहां रहने आया है।

नासिक टीसीएस मामले में खान एकमात्र महिला आरोपी हैं और विवाद सामने आने के बाद दर्ज की गई पहली शिकायत एफआईआर 156 में उनका नाम है। उन पर यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की कई धाराओं के तहत अपराधों सहित कई आरोप हैं।

निदा खान पर क्या-क्या आरोप?

पुलिस का आरोप है कि खान हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले एक समूह का हिस्सा थी। एफआईआर में नामजद अन्य दो आरोपी दानिश शेख और तौसीफ अत्तार हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया था कि खान टीसीएस की एचआर टीम का हिस्सा थी और उसने अपनी स्थिति का दुरुपयोग करके अन्य लड़कियों को फंसाया था।

उसके परिवार के अनुसार, नासिक की रहने वाली 26 साल की युवती पिछले चार वर्षों से टीसीएस में काम कर रही थी और पति के ट्रांसफर के बाद पिछले साल कंपनी के मुंबई कार्यालय में उसका तबादला हो गया था। परिवार ने इस बात से इनकार किया है कि वह एचआर डिपार्टमेंट का हिस्सा थी।

उनके परिवार का दावा है कि खान 10 अप्रैल तक काम पर आती रहीं, जब आरोप सार्वजनिक होने के बाद उन्हें कथित तौर पर कार्यालय न आने के लिए कहा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि 26 मार्च को एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने उनसे कभी पूछताछ नहीं की। खान के पिता ने इससे पहले द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “पुलिस के पास उसका फोन नंबर और पता था, फिर भी जांच में सहयोग करने के लिए हमसे कभी संपर्क नहीं किया गया।”

उन्होंने उन खबरों का भी खंडन किया कि खान एचआर डिपार्टमेंट में काम करती थीं और कहा कि वह एक सहयोगी के रूप में कार्यरत थीं और उन्हें प्रति माह 15000 रुपये का वेतन मिलता था। उन्होंने कहा, “जैसा कि बताया जा रहा था, वह एचआर डिपार्टमेंट से नहीं है। शुरू में हमने सोचा कि ये खबरें किसी और के बारे में हैं। टीवी चैनलों पर उसकी तस्वीरें प्रसारित होने के बाद ही हमें एहसास हुआ कि वे हमारी बेटी के बारे में बात कर रहे थे।”

निदा खान ने सरेंडर करने से परहेज किया

उसके परिवार का कहना है कि खान ने सरेंडर करने से इसलिए परहेज किया क्योंकि वह चार महीने की गर्भवती है और डॉक्टरों ने उसे आराम करने की सलाह दी थी। पुलिस ने इससे पहले 17 अप्रैल को मुंब्रा स्थित उनके पति के आवास पर खान की तलाश की थी, लेकिन उन्हें ढूंढने में असफल रही। उनके पति से पूछताछ की गई और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि खान बाद में गिरफ्तारी से बचने के लिए छत्रपति संभाजी नगर चली गई। इस मामले ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया जब एआईएमआईएम सांसद इम्तियाज जलील ने 21 अप्रैल को कहा कि उन्होंने खान, उसकी मां और चाची से उस समय मुलाकात की थी जब वे फरार थीं और वे उनका समर्थन करेंगे।

शुक्रवार को महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने पूर्व एआईएमआईएम सांसद इम्तियाज जलील पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि खान को फरार रहने के दौरान मदद मिली थी। उन्होंने कहा कि जलील ने खान के पक्ष में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया था। नासिक पुलिस से मिली जानकारी का हवाला देते हुए शिरसाट ने दावा किया कि खान छत्रपति संभाजीनगर में एआईएमआईएम पार्षद मतीन मजीद पटेल के आवास पर पांच दिन तक रुकी थीं। पढ़ें पूरी खबर…