Nari Shakti Vandan Adhiniyam: देश की संसद और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया। गुरुवार को केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया है जिससे यह आरक्षण साल 2029 में होने वाले आम चुनाव में लागू किया जा सके। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोक सभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संविधान संशोधन विधेयक 2023 पेश किया। जानें महिलाओं के लिए आरक्षण देने वाला यह कानून आखिर है क्या और इसके लागू आने से कौन से बदलाव आएंगे…
पहले 2026 होने वाली जनगणना के आधार पर इस अधिनियम को लागू होना था पर अब 2011 को आधार बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा में पास करवाने के लिए सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखा। हालाँकि विपक्ष का कहना है कि हम महिला आरक्षण के समर्थन में हैं मगर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के खिलाफ हैं। विपक्ष की मांग है कि संसद और विधान सभाओं की वर्तमान संख्या में ही महिला आरक्षण लागू किया जाए।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। बता दें कि अभी लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ 13.6 प्रतिशत है।
यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी लागू होगा। आरक्षित सीटें रोटेशन के आधार पर तय होंगी यानी हर चुनाव में बदल सकती हैं।
लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश में लागू हो जाएगा और इसके बाद महिलाओं को आरक्षण मिलेगा।
इस अधिनियम को लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) करना भी जरूरी है। यही वजह है केंद्र सरकार ने गुरुवार (16 अप्रैल) को परिसीमन विधेयक भी पेश किया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व
महिला आरक्षण अधिनियम लागू होने से राजनीति में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी। फैसला लेने में महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी। लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा मिलेगा।
यह कानून भारत की राजनीति में महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस बिल के लागू होने से राजनीति में महिलाओं की भागीदरी बढ़ेगी और राजनीतिक फैसले लेने में उनकी सहभागिता भी पुरुषों के समान होगी। सिर्फ मतदान ही नहीं बल्कि नीति निर्माण में भी महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अगले आम चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी
2023 में जब 106वां संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ तो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता भी साफ हो गया। लेकिन 2027 में जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू होना था जिससे इस अधिनियम के लागू होने में 2034 तक की देरी हो सकती थी।
लेकिन अब सरकार ने ऐसे संशोधन प्रस्तावित किए हैं जिसके जरिए साल 2011 की जनगणना के डेटा का इस्तेमाल करके इस आरक्षण कानून को लागू किया जा सके। सरकार चाहती है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जा सके।
केंद्र शासित प्रदेश क़ानून (संशोधन) विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 (डीलिमिटेशन बिल 2026) विधेयक 16 से 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में अगर लागू हो जाते हैं तो 2023 में पारित हो चुके नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2029 में होने वाले अगले आम चुनाव में इस आरक्षण का रास्ता साफ हो सकता है।
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देश की राजनीति और भविष्य निर्माण में महिलाओं की भूमिका हमेशा से उल्लेखनीय रही है। भारतीय संविधान सभा में कुल 15 महिला सदस्य थीं। इन महिलाओं ने संविधान के मसौदे को तैयार करने और देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संविधान सभा के बाद महिलाओं ने संसद में भी एंट्री ली। भारतीय लोकतंत्र के सात दशकों के सफर में संसद की संरचना में कई बदलाव आए हैं, लेकिन अब एक बड़ा बदलाव अंतिम चरण में है। पढ़ें पूरी स्पेशल स्टोरी…
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संसद के विस्तारित बजट सत्र में पेश होने वाले तीनों विधेयक महिलाओं के लिए आरक्षण को जल्द लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। इन विधेयकों में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़े कई सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है, लेकिन साथ ही कुछ नए सवाल भी खड़े हो गए हैं, जिन पर संसद में गहन चर्चा होने की संभावना है। पढ़ें पूरी खबर…
