प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंबेडकर जंयती के अवसर पर देश की जनता को शुभकामनाएं दीं। साथ ही राष्ट्र की आधी आबादी के नाम एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने नारी शक्ति वंदन योजना का जिक्र करते हुए देश की महिलाओं से आशीर्वाद मांगा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का आभास है कि देश की आधी आबादी इस बदलाव को लेकर काफी उत्साहित है। हर तरफ खुशी की लहर है।
देश की आधी आबादी के लिए लिखे पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा –
14 अप्रैल, भारत के इतिहास का बहुत महत्वपूर्ण दिन है। आज भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयंती है। समस्त देशवासी राष्ट्र निर्माण में उनके अमिट योगदान के लिए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन कर रहे हैं। मैं भी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए बहुत प्रेरणादायक है।
संविधान ने हमें जिस समानता और समावेशी भावना का मार्ग दिखाया है, उस सर्वोच्च भावना पर चलते हुए 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा होने जा रही है। संसद के आने वाले सत्र में यह संवैधानिक संशोधन पारित हो, इसके लिए मैं आप सभी, विशेषकर देशभर की करोड़ों माताओं-बहनों का आशीर्वाद चाहता हूं।
मुझे विश्वास है कि पूरा सदन मिलकर इस ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन को पारित करेगा और विधायी संस्थाओं में देश की नारी शक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। मैं देख रहा हूं कि इसे लेकर हर तरफ जोश और उत्साह का माहौल है। देशभर की माताएं और बहनें इस बात पर खुशी जाहिर कर रही हैं कि उन्हें विकसित भारत के निर्माण में, देश की नीतियों के निर्धारण में और अधिक मजबूती से अपना योगदान देने का अवसर मिलने वाला है।
हमारी नारी शक्ति देश के विकास में अपनी अमिट छाप छोड़ रही है। यह देखकर बहुत खुशी होती है कि वे हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रही हैं। 21वीं सदी में दुनिया साइंस और इनोवेशन के दम पर आगे बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में भी महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्टार्टअप्स वर्ल्ड में ऐसी कई कंपनियां हैं, जिनमें महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। एकेडमिक्स, लिटरेचर, आर्ट, म्यूजिक, सिनेमा, डांस और हेरिटेज के क्षेत्र में भी उनकी उपलब्धियां बहुत प्रेरक हैं।
खेल के मैदान में भी इस बड़े बदलाव को साफ देखा जा सकता है। भारतीय महिला खिलाड़ी अधिक मेडल जीत रही हैं और नए-नए रिकॉर्ड बना रही हैं। साथ ही, वे समाज की पुरानी सोच को भी बदल रही हैं। उनकी ये सफलताएं अनगिनत बेटियों को खेलों में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
देशभर में जमीनी स्तर पर काम कर रहे अनगिनत सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और लखपति दीदियां यह दिखा रही हैं कि आत्मनिर्भरता कैसे हासिल की जाती है। वे यह भी साबित कर रही हैं कि अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी कैसे सशक्त बनाया जा सकता है।
इन सभी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम विधायी निकायों में भी उनकी हिस्सेदारी बढ़ाएं। यह ऐसा विषय है जिस पर पिछले कई दशकों से व्यापक सहमति बनी हुई है। करीब सौ वर्ष पहले, जब सरदार पटेल अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की पहल की थी।
भारत के स्वतंत्र होते ही महिलाओं और पुरुषों को मतदान का समान अधिकार मिला। वहीं, दुनिया के कई अन्य देशों में महिलाओं को यह अधिकार पाने के लिए वर्षों, यहां तक कि सदियों तक इंतजार करना पड़ा।
पिछले तीन-चार दशकों में विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए गए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं रहे। कुछ अवसर तो ऐसे आए जब हम लक्ष्य पाने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन फिर भी हमें सफलता नहीं मिल सकी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विषय पर सदैव सर्वसम्मति रही, वह आज तक अपने तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है।
हम 2047 में अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेंगे। देश, विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधी आबादी, यानी देश की नारी शक्ति की आकांक्षाओं के साथ पूरा न्याय हो। जब हमारी माताएं, बहनें और बेटियां नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी, तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी। इसी भावना से 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था। 16 अप्रैल से जिस संविधान संशोधन पर चर्चा होने जा रही है, उसके मूल में भी यही भावना है।
2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के आरक्षण के साथ होते हैं, तो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ज्यादा मजबूत और सशक्त बनेगी। इसके लिए संसद में आने वाले विधेयक का पारित होना बेहद जरूरी है। इसमें किसी भी तरह की देरी दुर्भाग्यपूर्ण होगी और यह देश की नारी शक्ति के साथ अन्याय होगा। देश की बेटियों को उनके इस अधिकार के लिए अनंतकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। विधायी संस्थाओं में नारी शक्ति की आवाज ज्यादा सशक्त होने से लोकतंत्र की आवाज मजबूत होगी।
मुझे विश्वास है कि आप भी नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के संसद में पारित होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मेरा विनम्र आग्रह है कि आप अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखकर संसद के इस ऐतिहासिक सत्र में हिस्सा लेने के लिए उनका उत्साह बढ़ाएं। उन्हें याद दिलाएं कि वे कुछ ऐसा करने जा रहे हैं, जिसे सदियों तक याद किया जाएगा। इससे उनका मनोबल निश्चित रूप से बढ़ेगा।
मैं इस अवसर पर आप सभी को आने वाले सभी त्योहारों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मेरी कामना है कि आप सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए।
गौरतलब है कि देश एक ऐतिहासिक फैसले की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करने जा रही है। इसके तहत लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीट आरक्षित रहेंगे। इस योजना के तहत सरकार का इरादा 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन (सीमा-निर्धारण) करने के बाद लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 तक ले जाने का है। ये 50 फीसदी की वृद्धि है और इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। जून 2024 में गठित 18वीं लोकसभा में कुल 74 महिला सदस्य (सांसद) चुनकर आई हैं।
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केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार आने वाले दिनों में एक ऐतिहासिक फैसला लेने वाली है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने जा रही है। इस पर चर्चा करने के लिए लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जो16 अप्रैल से शुरू होगा और 18 तक चलेगा। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
