जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल ने कहा है कि FIR के तीन साल बाद भी CBI ने उनके खिलाफ 538 करोड़ रुपये के लोन साइफनिंग केस में चार्जशीट फाइल नहीं की है। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फाइल किए गए इस जुड़े हुए केस में डिस्चार्ज अर्जी दी है। वहीं ED ने उनकी अर्जी का विरोध करते हुए कहा है कि यह उन्हें बरी करने का आधार नहीं हो सकता। ED ने नरेश गोयल को (एविएशन कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन थे) जेट एयरवेज़ का ‘अल्टीमेट कंट्रोलिंग माइंड’ बताया है।

क्या है जेट एयरवेज डूबने का कारण?

नरेश गोयल की अर्जी में यह भी कहा गया है कि लोन देने वालों के एक ग्रुप ने कथित कर्ज वसूलने के लिए पहले ही सही कार्रवाई शुरू कर दी है। नरेश गोयल ने लोन साइफनिंग से भी इनकार किया है। नरेश गोयल ने दावा किया है कि जेट एयरवेज को लो-कॉस्ट एयरलाइंस से कॉम्पिटिशन और एविएशन फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी सहित उनके कंट्रोल से बाहर के कारणों से आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा और इसी कारण एयरलाइन को घाटा हुआ।

केनरा बैंक की शिकायत के बाद CBI ने 3 मई 2023 को एक FIR दर्ज की थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नरेश गोयल और दूसरों ने एयरलाइन के ऑपरेशन के लिए दिए गए लोन का इस्तेमाल पर्सनल इस्तेमाल के लिए किया, जिसमें भारत, लंदन और दुबई में प्रॉपर्टी खरीदना शामिल है। कुछ ही दिनों में ED ने CBI केस के आधार पर एक शिकायत दर्ज की, जिसमें पैसे को ऑफशोर अकाउंट में कथित तौर पर लॉन्ड्रिंग करने की जांच की गई।

तीन साल में कोई चार्जशीट नहीं- गोयल

नरेश गोयल की अर्जी में कहा गया है, “CBI पिछले 3 सालों से FIR के संबंध में जांच कर रही है और इस नतीजे पर नहीं पहुंची है कि आवेदक ने कोई क्राइम किया है और मौजूदा क्राइम में पैसा असल में क्राइम से मिला पैसा है। सबसे पहले, एक प्रिडिकेट ऑफेंस होना चाहिए, CBI ने अब तक वैलिड प्रिडिकेट ऑफेंस का खुलासा नहीं किया है।” साथ ही किसी भी सरकारी कर्मचारी का नाम भी नहीं लिया गया है, भले ही CBI ने FIR में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट का इस्तेमाल किया हो।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के अनुसार, जिसके तहत ED ने नरेश गोयल के खिलाफ केस दर्ज किया है, प्रिडिकेट ऑफेंस के बिना मनी-लॉन्ड्रिंग का केस नहीं चल सकता। लेकिन CBI ने भी नरेश गोयल को अभी तक क्लीन चिट नहीं दी है। इसलिए ED ने कहा है कि FIR फाइल न करना उनके केस से उन्हें डिस्चार्ज करने का कोई सही आधार नहीं हो सकता।

ED ने कहा, “आरोपियों के काम देश की आर्थिक हेल्थ की नींव पर हमला करते हैं, जो सही बिजनेस खर्चों की आड़ में कॉर्पोरेट एसेट्स को ऑफशोर ट्रस्ट और रिलेटेड-पार्टी अकाउंट में सोची-समझी रकम डालने को दिखाते हैं।”

ED ने किया था गिरफ्तार

नरेश गोयल को ED ने सितंबर 2023 में गिरफ्तार किया था और 2024 में मेडिकल ग्राउंड पर बेल दे दी थी। अपनी अर्जी में नरेश गोयल ने कहा है कि 2024 में अपनी पत्नी अनीता गोयल की मौत के बाद से उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम बनी हुई हैं और वे इमोशनली भी कमज़ोर हैं। नरेश गोयल ने दावा किया है कि केनरा बैंक द्वारा दी गई 538.62 करोड़ रुपये की फैसिलिटी में से 365.57 करोड़ रुपये नॉन-फंड बेस्ड थे, जो लेटर ऑफ क्रेडिट के रूप में थे और सीधे वेंडर्स को दिए गए। बाकी की रकम तेल कंपनियों और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को पेमेंट के रूप में दिए गए।

ED ने आरोप लगाया कि एयरलाइन के ऑपरेशन के पेमेंट समेत खर्चों को बढ़ाकर दिखाकर फंड का इस्तेमाल अपने पर्सनल फायदे के लिए किया गया।एयरलाइन जेट एयरवेज ने 2019 में ऑपरेशन रोक दिया था, जिससे स्टाफ की नौकरियां चली गईं। नरेश गोयल की अर्जी में कहा गया है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 2024 में लिक्विडेशन की कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें दावा किया गया था कि एयरवेज के एसेट्स, जिसमें एयरक्राफ्ट की ज़मीन, बिल्डिंग, गाड़ियां, हैंगर शामिल हैं, की बिक्री से 3500 करोड़ रुपये से ज़्यादा मिलेंगे, जिसका इस्तेमाल कर्ज़ चुकाने के लिए किया जाएगा।

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