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नरेंद्र मोदी के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को झटका, जमीन देने को तैयार नहीं गांववाले, शिवसेना ने भी की अड़ंगा लगाने की तैयारी

पीएम मोदी की बुलेट ट्रेन परियोजना देश की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना है, जिसकी कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। सरकार ने इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए 2018 के अंत तक जमीन अधिग्रहण का लक्ष्य रखा है। साथ ही इस पर जनवरी 2019 से काम शुरू होना है।

जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटो सोर्स- पीटीआई

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का महात्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को साल 2022 तक पूरा होना था अब इसमें अड़चने पैदा होती दिख रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र के पालघर जिले में मोदी सरकार की इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए जमीन मिलने में मुश्किल हो सकती है। दरअसल इस मसले पर स्थानीय समुदाय और जनजातीय लोग विरोध में उतर आए हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक पालघर जिले के 70 से ज्यादा आदिवासी गांव के लोगों ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अपनी जमीन देने से मना कर दिया है। इस इलाके से गुजरने वाली इस रेल परियोजना के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन की भी तैयारी की जा रही है। बता दें, पीएम मोदी की बुलेट ट्रेन परियोजना देश की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना है, जिसकी कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। सरकार ने इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए 2018 के अंत तक जमीन अधिग्रहण का लक्ष्य रखा है। साथ ही इस पर जनवरी 2019 से काम शुरू होना है। इस हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का करीब 110 किलोमीटर का हिस्सा महाराष्ट्र के पालघर जिले से होकर गुजरता है।

वहीं इस पर रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हमें विरोध झेलना पड़ रहा है। लेकिन हमें उम्मीद है कि इस प्रॉजेक्ट पर काम टाइमलाइन के भीतर ही शुरू हो जाएगा। हम जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को सर्किल रेट से 5 गुना अधिक दाम ऑफर कर रहे हैं।”

रेल मंत्रालय के इस अधिकारी ने यह भी कहा कि “पालघर जिले के कुछ गांवों में 200 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण को लेकर कुछ विरोध है। इनमें से ज्यादातर आदिवासी गांव हैं और इनमें विकास की खासी कमी है। स्थानीय राजनीति भी यहां विरोध को हवा दे रही है, जबकि यह प्रॉजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का होने के साथ ही लोकल डिवेलपमेंट में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।”

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