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नोटबंदी पर उद्योगपतियों ने वित्त राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल को सुनाई पीड़ा, बदले में मंत्री ने सुनाए पीएम नरेन्द्र मोदी की महानता के गलत किस्से

लघु उद्योग भारती के पूर्व महासचिव ओ पी गुप्ता ने उद्योगपतियों की कठिनाइयों को गिनाया। उन्होंने कहा, "नोटबंदी की वजह से कई दुकानें बंद हो गई हैं। कैश क्रंच की वजह से मांग में 50 फीसदी की गिरावट आ गई है।

Cash crisis, Note ban, Arjun Meghwal, Finance Minister for state, Laghu Udyog Bharti, tells a Modiji tale, Prime Minister, Narendra Modi, Demonetisation, cashless economyकेंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल। Source – PTI

नोटबंदी के बाद लघु उद्योगों के मालिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात की और उनसे आर्थिक मोर्चे पर हो रही परेशानियों से निजात दिलाने की गुजारिश की। उद्योगपतियों ने मेघवाल से कहा कि नोटबंदी की वजह से कैश की कमी हो गई है। इसका असर उनके धंधे पर पड़ रहा है, उत्पादन ठप हो गया है। कामगार नहीं मिल रहे हैं। उनलोगों ने मंत्री से ‘रेड राज’ और ‘टैक्स टेररिज्म’ खत्म करने की अपील की क्योंकि आयकर के अधिकारी आए दिन छापेमारी कर उनकी रकम के ब्लैक मनी करार दे रहे हैं।

बदले में मंत्री जी ने उद्योपतियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महानता के किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि कैसे मोदी जी ने आजादी, विश्व बंधुत्व और समानता के दर्शन को पश्चिमी देशों का नहीं बल्कि उसे भारतीय दर्शन का अंग बताया और कैसे मोदी जी ने चीन को इस बात के लिए राजी किया कि वो सर्जिकल स्ट्राइक पर भारत का विरोध न करे। वित्त राज्य मंत्री ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि मोदी राज में आपको घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना घबराहट के आपलोग मोदी जी की आर्थिक नीतियों पर भरोसा करें। उन्होंने कहा कि आपको जल्द ही कम ब्याज दरें भी मिलेंगी।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्था लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित एक सेमिनार में अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, “हो सकता है कि अभी आपको कुछ दिनों के लिए परेशानी हो लेकिन लंबे समय के लिए यह आपके लिए फायदेमंद है। तब आप खुश होंगे और मुझे सम्मानित करने के लिए दोबारा बुलाएंगे। सरकार आपके और देश के हित में काम कर रही है।” इस सेमिनार में संस्था ने मंत्री जी को एक सर्वे रिपोर्ट पेश किया जिसमें नोटबंदी के बाद उपजी विकट स्थिति की तस्वीर पेश की गई थी।

लघु उद्योग भारती के पूर्व महासचिव ओ पी गुप्ता ने उद्योगपतियों द्वारा झेली जा रही कठिनाइयों को गिनाया। उन्होंने कहा, “नोटबंदी की वजह से कई दुकानें बंद हो गई हैं। कैश क्रंच की वजह से मांग में 50 फीसदी की गिरावट आ गई है। कामगार काम छोड़कर जा रहे हैं। लोन पेमेंट चुकता नहीं करने पर बैंक डिफॉल्टर घोषित कर रहा है। 70 फीसदी लघु उद्योगपति मंदी की आहट से परेशान हैं। अगर तुरंत सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए तो लघु उद्योगों की कमर टूट जाएगी।” गुप्ता ने कहा, “प्रधानमंत्री मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेन्स की बात करते हैं लेकिन वो बात जमीन पर नहीं हो रही है। टैक्स ऑफिशियल्स को अधिक शक्ति दे दी गई है। इससे टैक्स टेररिज्म आ चुका है। वास्तविक धन को भी ब्लैक मनी कहकर परेशान किया जा रहा है।”

मेघवाल ने कहा कि पीएम मोदी जन संघ नेता दीनदयाल उपाध्याय के आर्थिक प्रारूप के पक्षधर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को पीएम तक पहुंचाएंगे और उस बारे में ठोस कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मेघवाल ने लोगों से पूछा कि क्या ढाई वर्षों में मोदी जी किसी करप्शन में शामिल दिखे? भीड़ ने इसका जवाब दिया-नहीं।
इसके बाद मंत्री जी ने कहा, फिर क्यों आपलोग यह महसूस करते हैं कि आपकी रीढ़ टूट जाएगी?
इसके बाद मंत्री मेघवाल ने पीएम मोदी की महानता के गलत किस्से सुनाए। उन्होंने कहा, अभी हाल ही में जी-20 देशों की एक बैठक चीन में हुई थी। उस बैठक में पश्चिमी देश के किसी राष्ट्राध्यक्ष ने कहा कि पश्चिमी देशों ने दुनिया को आजादी, समानता और विश्व बंधुत्व का नारा दिया। मेघवाल ने कहा, “यह सुनकर मोदी जी बेचैन हो गए।वह बोलना चाहते थे। उन्हें कहा गया कि जब आपकी बारी आएगी तो आप कुछ कहिएगा। तो मोदी जी ने कहा आप अपना रुख बदलिए क्योंकि मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है। इसके बाद मोदी जी ने वहां लोगों के बताया कि आजादी, समानता और बंधुत्व का विचार भारतीय है न कि पश्चिमी देशों का। इसके बाद पश्चिमी देशों के नेताओं ने पूछा कैसे?”

बकौल मेघवाल, इसके बाद मोदी जी ने सभी पश्चिमी नेताओं को बताया कि आजादी का कॉन्सेप्ट बिहार के वैशाली से आया जहां दुनिया का पहला लोकतंत्र विकसित हुआ था। समानता का कॉन्सेप्ट भगवान बुद्ध ने दिया था, जो भारतीय थे और विश्व बंधुत्व का कॉन्सेप्ट गुरुगोविंद सिंह ने दिया था। मोदी जी ने जवाब देते समय चीन के नेतचा की तरफ देखा जिन्होंने हां में सिर हिलाकर हामी भरी।

हालांकि, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जी 20 में दिए गए बयान की तहकीकात की गई तो पता चला कि उन्होंने न तो इस तरह का कोई बयान दिया न ही विदेशी मेहमानों के सामने ऐसी कोई चर्चा हुई।

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