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पीएम पर कांग्रेस का हमला- क्या मोदी आधार, मनरेगा, जीएसटी, आरटीआई मुक्त भारत चाहते हैं?

प्रधानमंत्री मोदी ने एक समाचार चैनल को दिये साक्षात्कार में अपने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि उन्होंने यह बात किसी संगठन या दल के बारे में नहीं कही बल्कि कांग्रेस पार्टी की सोच के बारे में कही थी।

Author नई दिल्ली | January 22, 2018 10:58 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (स्क्रीनशॉट/यूट्यूब)

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ संबंधी अपने नारे पर दी गयी सफाई पर सवाल उठाते हुए आज कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ‘‘विभाजनकारी एवं सांप्रदायिकता’’ की भाजपा, आरएसएस एवं बजरंग दल की संस्कृति को हटाने की बात क्यों नहीं करते। प्रधानमंत्री मोदी ने एक समाचार चैनल को दिये साक्षात्कार में अपने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि उन्होंने यह बात किसी संगठन या दल के बारे में नहीं कही बल्कि कांग्रेस पार्टी की सोच के बारे में कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि स्वयं कांग्रेस पार्टी को भी इस सोच से मुक्त होना चाहिए।

उनके इस स्पष्टीकरण के बारे में प्रतिक्रिया पूछे जाने पर कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल में हमने प्रधानमंत्री मोदी एवं सत्तारूढ़ पार्टी से बार बार सुना है कि कांग्रेस मुक्त भारत। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी कांग्रेस संस्कृति के किस पहलू को हटाना चाहते हैं। क्या वह नेहरूवादी स्तंभ को हटाना चाहते हैं जिसकी आधारशिला पर हमारा गणतंत्र बना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संस्कृति के अन्य पहलु धर्मनिरपेक्षता, गुटनिरपेक्षता, समाजवाद, सौहार्द्र, उदारता आदि किस पहलु को हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि क्या वह उस संस्कृति को हटाना चाहते हैं, ‘‘जिसके अंतर्गत अभी हाल में आपने 10 वर्ष में ऐसी जबरदस्त विकास की दर देखी।’’ उन्होंने कहा कि क्या प्रधानमंत्री आधार, मनरेगा, जीएसटी, आरटीआई, लोकपाल आदि को हटा सकते हैं, जो कांग्रेस की देन रही है।

उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री ‘‘ निश्चित रुप से हमारी संस्कृति को बदलने में आप पूरी तरह से जुटे हैं। क्या आप बाकि संस्कृति की तरफ भी ध्यान देते हैं। ’’ उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री भाजपा, आरएसएस, विहिप, बजरंग दल की सांप्रदायिकता, मतभेद, विभाजन, मनभेद, गैर वैज्ञानिक उटपटांग बातों, आदि को हटा सकते हैं। इस बारे में वह क्यों नहीं बोलते।
प्रधानमंत्री द्वारा लोकसभा एवं राज्यसभा के चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिंघवी ने कहा कि इस मामले में पहले सर्वदलीय बैठक बुलाकर सहमति तैयार की जानी चाहिए। संर्वदलीय सहमति के बिना आप संविधान को परिर्वितत नहीं कर सकते।

माकपा की केन्द्रीय समिति द्वारा कांग्रेस के साथ चुनाव में गठबंधन करने से इंकार किये जाने के बारे में प्रश्न पूछे जाने पर कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘पहला हम दूसरी पार्टियों के मामलों में ना हस्तक्षेप करते हैं, ना बोलते हैं। दूसरा जिस विषय का आपने जिक्र किया, वो विषय अभी अंतिम रुप से निर्णित नहीं हुआ है, उस पार्टी में। ’’ उन्होंने कहा कि माकपा में अभी इस बारे में अंतिम निर्णय होना बाकी है। उन्होंने कहा कि इस समय गठबंधन की बात करना समय से पहले की बात होगी। उन्होंने कहा कि संसद के भीतर और बाहर विभिन्न दलों के बीच मुद्दों को लेकर बेहतर समन्यवय है।
यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस पद्मावत फिल्म का समर्थन करती है, सिंघवी ने कहा कि पार्टी को किसी फिल्म का समर्थन करने की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में देश के सभी लोगों को उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पालन करना चाहिए। भले ही आप उससे असहमत भी क्यों न हों।

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