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अमित शाह की सूरत रैली फ्लॉप होने पर PM नरेंद्र मोदी ने आनंदीबेन पटेल को बुलाया

पाटीदारों के विरोध के कारण बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री विजय रूपानी और गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जीतू वगहानी अपना भाषण पूरा नहीं कर पाए थे।

Author नई दिल्ली | September 10, 2016 5:05 PM
गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सूरत रैली को लेकर समन जारी किया है। जानकारी के मुताबिक करीब एक महीने पहले गुजरात के सीएम का पद छोड़ चुकीं आनंदीबेन प्राइवेट प्लेन से दिल्ली के लिए रवाना हुईं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में हुई सूरत रैली में पाटीदारों के हंगामे के कारण रैली फ्लॉप होने के कारण आनंदीबेन को पीएम ने दिल्ली बुलाया। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी और आनंदीबेन पटेल के बीच गुजरात की स्थिति को लेकर चर्चा होगी।

पाटीदारों के विरोध के कारण बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री विजय रूपानी और गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जीतू वघहानी अपना भाषण पूरा नहीं कर पाए थे। गुजरात में बीजेपी के खिलाफ इस तरह का प्रदर्शन सामान्य नहीं है। भाजपा सरकार में पाटीदार समुदाय का विश्वास दिखाने के लिए रियल एस्टेट डेवलपर्स और हीरा कारोबारियों ने राजस्व समारोह का आयोजन किया था, जिसमें बीजेपी के पाटीदार नेताओं को सम्मानित किया जाना था। साथ ही पाटीदार अमानत आंदोलन समिति को यह संदेश देना था कि पाटीदार बीजेपी की तरफ वापस आ रहे हैं। रैली को सफल बनाने के लिए गुजरात सरकार ने पूरी तैयारी की हुई थी।

गौरतलब है कि आनंदीबेन पटेल को पाटीदार आंदोलन और दलित अत्याचार के मुद्दे पर अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि पटेल ने इसके लिए उम्र को कारण बताया था। गुजरात में नरेंद्र मोदी के शासनकाल में आनंदीबेन पटेल और अमित शाह दोनों मोदी के सबसे करीबी माने जाते थे। 2014 में पीएम मोदी के दिल्ली कूच करने के बाद आनंदीबेन पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया तो शाह को पार्टी की अध्यक्षता मिली। लेकिन मोदी उनके बीच के राजनीतिक द्वेष को कम नहीं कर सके।

सूरत रैली के वेन्यू की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा गुजरात के गृहमंत्री रहे अमित शाह ने खुद किया था। रैली में दो आईजी, एक डीआईजी, 6 डीसीपी, 13 एसीपी, 29 इंस्पेक्टर और 70 सब-इंस्पेक्टर समेत 2000 पुलिस वालों को तैनात किया गया था, लेकिन वे लोग पास (PAAS) समर्थकों को पहचानने में असफल रहे थे।

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