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नरेंद्र मोदी ने बिहार को दिखाया ‘जंगल राज’ का डर और ‘विकास’ का सपना

बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का चुनावी बिगुल फूंकते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भाजपा के पूर्व गठबंधन सहयोगी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार.
Author July 26, 2015 11:26 am
मुजफ्फरपुर में रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का चुनावी बिगुल फूंकते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भाजपा के पूर्व गठबंधन सहयोगी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। उन्होंने लालू प्रसाद के साथ हाथ मिलाने को लेकर उनकी आलोचना करते हुए जद (एकी) नेता के डीएनए में खोट बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति ने प्रदेश के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और पहले घोषित 50,000 करोड़ रुपए के पैकेज से बड़ा पैकेज देने का वादा किया। पटना में 5,000 करोड़ की लागत वाली परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि पैकेज की घोषणा संसद के मानसून सत्र के बाद की जाएगी क्योंकि सत्र समाप्ति तक उनके ‘होंठ सिले’ हुए हैं।

पिछले साल मई में प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार बिहार दौरे पर आए मोदी ने नीतीश और लालू के हाल में एक-दूसरे के लिए की गई टिप्पणियों में सांप और जहर शब्द के इस्तेमाल को लेकर उन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश के लोगों को यह जहर पीने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।

नीतीश को यह याद दिलाते हुए कि उन्होंने ही कभी लालू पर ‘जंगल राज’ का आरोप लगाया था, मोदी ने कहा कि जद (एकी) नेता अब प्रदेश को वापस उसी दौर में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मतदाताओं से ऐसे लोगों को खारिज करने की अपील करते हुए कहा कि उनपर दोबारा विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने बिहार का भविष्य बदलने के लिए राजग को दो-तिहाई बहुमत से जीत दिलाने का अनुरोध किया।

बाद में यहां जनसभा में मोदी ने कहा कि नीतीश राजनीतिक छुआछूत में विश्वास रखते हैं। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटते हुए कहा कि कैसे उन्हें रात्रिभोज पर आमंत्रित करके जद (एकी) नेता ने भोज रद्द कर दिया था और किस तरह उन्हें नासंपद करने की वजह से दो साल पहले भाजपा से संबंध तोड़ लिए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे नापसंद करने की वजह से नीतीश ने प्रदेश के विकास का गला घोंट दिया। उन्होंने मतदाताओं से पूछा कि क्या ऐसे लोगों को माफ करके वे ऐसे ‘डीएनए’ का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों में नीतीश ने जोर देकर कहा था यदि वे पूरे बिहार को बिजली मुहैया कराने में असफल रहे तो 2015 में फिर से वोट मांगने नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, ‘बिजली नहीं आई है, लेकिन वे वोट मांगने जरूर आ गए हैं। उन्होंने आपका विश्वास तोड़ा है। मुझे छोड़िए, उन्होंने तो आपकी पीठ में भी छुरा घोंपा है। ऐसे लोगों पर फिर विश्वास नहीं किया जा सकता। नीतीश के डीएनए में ही कुछ खोट लगता है, क्योंकि लोकतंत्र का डीएनए ऐसा नहीं है। लोकतंत्र में आप अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी सम्मान देते हैं’।

दलित कार्ड खेलते हुए मोदी ने कहा कि नीतीश ने राजनीतिक छुआछूत का भाव अपनाया है, न सिर्फ मेरे साथ बल्कि महादलित पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ भी। जद (एकी) में रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने मांझी अब राजग का हिस्सा बन गए हैं। लालकृष्ण आडवाणी का महत्त्व कम करने को लेकर उनकी आलोचना करने वाले नीतीश पर पलटवार करते हुए मोदी ने मुख्यमंत्री द्वारा जॉर्ज फर्नांडिज के साथ किए गए व्यवहार का हवाला दिया। मोदी ने कहा, ‘आपने जॉर्ज फर्नांडिज के साथ क्या किया? आपने सुशील कुमार मोदी (भाजपा नेता) के साथ क्या किया? दोनों ने आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। बिहार के लोगों को इस डीएनए को समझना चाहिए’।

नीतीश के नेतृत्व को स्वीकार करने के संबंध में की गई लालू की ‘जहर पीने’ वाली टिप्पणी पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुटकी ली। लालू की इस टिप्पणी के जवाब में नीतीश ने कहा था कि वे ‘चंदन का वृक्ष’ हैं जिसे अपने आसपास मौजूद ‘सांपों’ से फर्क नहीं पड़ता। मोदी ने कहा, ‘कौन सांप है और कौन सांप नहीं है, कौन जहर पीता है और कौन दूसरे को पिला रहा है, यह आपका आपसी मामला है। यह आपको आपस में कमरे में तय करना चाहिए। बिहार के लोगों को जहर पीने पर मजबूर ना करें। लालू ने अपने हितों और परिजनों के लाभ के लिए ऐसा करने का फैसला किया है, लेकिन वे बिहार के लोगों को अपने साथ जहर पीने के लिए क्यों मजबूर कर रहे हैं’।

दो साल पहले उन्हें राजग का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुने जाने के विरोध में नीतीश के भाजपा से संबंध तोड़ने का हवाला देते हुए मोदी ने कहा, ‘मैं समझ सकता हूं कि आप किसी व्यक्ति को पसंद नहीं करते, आपको उसका चेहरा पसंद न हो। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी हो सकती है। लेकिन, अगर आप मेरे इतना ही खिलाफ थे तो, मुझे कमरे के भीतर थप्पड़ मार सकते थे या मेरा गला घोंट सकते थे। लेकिन सिर्फ एक व्यक्ति के कारण आपने बिहार के विकास का गला घोंट दिया। क्या लोकतंत्र ऐसे काम करता है? राजनीति में मतभेद हो सकते हैं। मुझे बहुत दुख है, उससे नहीं जो आपने मेरे साथ किया, बल्कि उससे जो आपने बिहार के लोगों के साथ किया’।

नीतीश कुमार के सार्वजनिक रूप से उनके प्रति नापसंदगी की घोषणाओं का हवाला देते हुए मोदी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने मुझे रात्रिभोज पर आमंत्रित किया था। लेकिन फिर मेरी थाली छीन ली। क्या कोई आपको रात्रिभोज पर आमंत्रित करके आपकी थाली छीन सकता है’।

मोदी ने राजद को ‘रोजाना जंगल राज का डर’ बताते हुए कहा कि लोगों को इसे वापस नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार को तेजी से प्रगति करने के लिए केंद्र और प्रदेश दोनों सरकारों का समर्थन चाहिए। मोदी ने कहा कि चुनाव को महज 100 दिन रह गए हैं और प्रदेश के लोग सत्तारूढ़ जद (एकी) और सहयोगियों को ‘बांध कर’ रवाना कर देंगे क्योंकि बिहार ऐसे लोगों को कभी स्वीकार नहीं कर सकता।

चुनाव नहीं, संकट में देंं पैकेज
हमें बिहार को वित्तीय पैकेज दिए जाने से कोई समस्या नहीं है। लेकिन धनराशि पहले वहां दी जानी चाहिए जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। विशेष पैकेज संकट की स्थिति के लिए होना चाहिए, चुनावों के लिए नहीं। – उद्धव ठाकरे, शिवसेना प्रमुख

नीचा दिखाने की कोशिश
मोदी बिहार को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। वे एक की प्रशंसा कर रहे हैं, दूसरे की आलोचना। यह हमें विभाजित करने की स्पष्ट रणनीति है। वे कुमार और मेरे बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। -लालू प्रसाद यादव, राजद अध्यक्ष

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