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किसानों को अकेला नहीं छोड़ सकते, मिलजुल कर निकालें समस्या का हल: नरेंद्र मोदी

देश में किसानों की आत्महत्या की समस्या को बहुत पुरानी और व्यापक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि किसानों की जिंगदी से बड़ी और कोई चीज नहीं है...

अब भूमि अध्यादेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा। संसद का सत्र शुरू होने के छह सप्ताह के भीतर यदि इसे कानून में नहीं बदला जा सका, तो यह अध्यादेश समाप्त हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद में किसानों की आत्महत्याओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वे अपनी सरकार सहित पूर्व की सरकारों द्वारा इस बारे में हुई गलतियों पर विचार करने और सभी के सुझावों से समस्या का निदान निकालने के लिए तैयार हैं ताकि हमारे किसान जान न दें।

राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान एक किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना पर लोकसभा में हुई चर्चा पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के जवाब के बीच प्रधानमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कई वर्षों से किसानों की आत्महत्या पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। कल (बुधवार) की घटना से पूरे देश में पीड़ा है और उसकी अभिव्यक्ति आज (गुरुवार को) सदन में भी हुई। मैं भी इस पीड़ा में सहभागी हूं। किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।

मोदी बोले- हमें यह सोचना होगा कि हम कहां गलत रहे, कौन से गलत रास्ते पर चल पड़े। पहले क्या गलतियां रहीं और पिछले 10 महीने में क्या गलतियां हुई। हमें किसानों की समस्या का समाधान खोजना है। हम सबका संकल्प होना चाहिए कि हम मिलकर समस्या का समाधान कैसे करें। समस्या बहुत पुरानी, गहरी और व्यापक है और उसे उसी रूप में लेना होगा। जो भी अच्छे सुझाव आएंगे, सरकार उसे लेने को तैयार है। किसान की जिंदगी और इंसान की जिंदगी से बड़ी कोई चीज नहीं है।

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सभी दलों के सदस्यों से इस समस्या के निदान के बारे में सुझाव मांगते हुए उन्होंने कहा- सुझाव दीजिए, किसानों को अकेला नहीं छोड़ सकते। अब अपने किसानों को न मरने दें, इतनी ही विनती करता हूं। इससे पहले विपक्षी सदस्यों ने सदन में इस विषय को जोरदार ढंग से उठाया। जिससे प्रश्नकाल की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सदस्यों द्वारा अपनी बात रखे जाने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा इसका जवाब दिए जाने के समय प्रधानमंत्री सदन में आए और सिंह के बयान के बाद उन्होंने कहा- सदन की पीड़ा से अपने को जोड़ते हुए मैं यह कहना चाहूंगा कि यह पीड़ा बहुत पुरानी और गहरी है और हमें सोचना होगा कि हम गलत कहां रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भिन्न-भिन्न सरकारों ने समय-समय पर किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए कार्य किए हैं। सरकारें जो भी कर सकती थीं, उन्होंने किया। इससे पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सदस्यों की चिंताओं पर अपनी बात रखते हुए बुधवार की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बताया।

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