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रजत शर्मा को पंडित जी बुलाते हैं नरेंद्र मोदी, गुजरात दंगों के बाद सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में मंच भी किया था साझा

छात्र जीवन में एबीवीपी के नेता रहे रजत शर्मा मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली के कॉलेज के जमाने के मित्र हैं।

Author Updated: December 27, 2016 4:14 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और पत्रकार रजत शर्मा। (एजेंसी फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुर्सी संभाले हुए ढाई से अधिक साल हो गए लेकिन उन्होंने अपना कोई मीडिया एडवाइजर नहीं नियुक्त किया है। माना जाता है कि पीएम मोदी पत्रकारों से दूरी बनाए रखते हैं लेकिन एक पत्रकार ऐसे भी हैं जिन्हें एक दशक पहले से पीएम मोदी का करीबी माना जाता है। वो पत्रकार हैं इंडिया टीवी के मालिक और ‘आप की अदालत’ के एंकर रजत शर्मा। शर्मा मौजूदा वित्त मंत्री के कॉलेज के दिनों के दोस्त हैं और माना जाता है कि नरेंद्र मोदी से उनका संपर्क जेटली से उनकी नजदीकी के चलते हुए हुआ था।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने साल 2014 के लोक सभा चुनावों पर लिखी अपनी किताब “द इलेक्शन दैट चेंज्ड इंडिया” में मोदी और शर्मा के आपसी संबंधों के बारे में लिखा है। सरदेसाई ने किताब में बताया है कि मोदी लंबे समय से निजी मुलाकातों के दौरान शर्मा को “पंडितजी” कहते हैं। और पीएम बनने के बाद भी जिन कुछ लोगों की सीधे उन तक पहुंच मानी जाती है उनमें रजत शर्मा भी हैं।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रजत शर्मा के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए एक पत्रकार ने ‘द कारवां’ पत्रिका से कहा, “जहां तक मोदी जी तक पहुंच की बात है तो शर्मा के बाद कोई एक मील तक नहीं है।”

शर्मा मोदी से अपनी नजदीकी को शायद छिपाते भी नहीं हैं। या ये भी कह सकते हैं कि वो इसे जताते भी हैं। सरदेसाई के अनुसार गुजरात दंगों के बाद जब नरेंद्र मोदी चुनाव जीतकर गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो उनके शपथ ग्रहण के दौरान रजत शर्मा भी मंच पर मौजूद थे। जबकि दंगों के तुरंत बाद हुए चुनावों के दौरान राष्ट्रीय मीडिया का बड़ा तबका मोदी के खिलाफ थे। ‘द कारवां’ पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार शर्मा ने कभी भी गुजरात दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी को नहीं घेरा है।

‘द कारवां’ की रिपोर्ट की मानें तो नरेंद्र मोदी के बीजेपी की राजनीति में आगे बढ़ने में भी रजत शर्मा की अहम भूमिका रही है।  रिपोर्ट के अनुसार 1990 के दशक के आखिर में गुजरात बीजेपी में नरेंद्र मोदी और संजय जोशी की प्रतिद्ंवद्विता जगजाहिर थी।  रिपोर्ट के अनुसार 1995 में जब बीजेपी गुजरात की सत्ता में पहली बार आई तो जोशी को बीजेपी का गुजरात का महासचिव बनाया गया और मोदी को उनके गृह राज्य से हटाकर दिल्ली भेज दिया गया था। कहा जाता है कि मोदी जब 2011 में गुजरात के सीएम बने तो वो जोशी से मिले पुराने घाव को भूले नहीं थे। साल 2005 में संजय जोशी का कथित आपत्तिजनक वीडियोे सामने आया और उनका राजनीतिक करियर लड़खड़ा गया। ये अलग बात है कि उस वीडियो-ऑडियो को बाद में जाली पाया गया लेकिन जोशी दोबारा राष्ट्रीय राजनीति में पहले सा कद नहीं हासिल कर पाए। अंदरखाने की कानाफूसियों की मानें तो संजय जोशी का वीडियो लाने में रजत शर्मा की भी भूमिका रही थी।

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