रोहित की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री का बयान अपमानजनक : छात्र - Jansatta
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रोहित की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री का बयान अपमानजनक : छात्र

दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को अपमानजनक करार देते हुए हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के आंदोलनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन तेज करने का शनिवार को संकल्प लिया।

Author हैदराबाद | January 24, 2016 12:30 AM
नागपुर के दीक्षाभूमि में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोधार्थी रोहित वेमुला के लिए इंसाफ मांगते छात्र और बौद्ध भिक्षु। (पीटीआई फाइल फोटो)

दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को अपमानजनक करार देते हुए हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के आंदोलनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन तेज करने का शनिवार को संकल्प लिया। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री की निष्क्रियता उनके राजनीतिक हितों को परिलक्षित करती है। भावुक मोदी ने शुक्रवार को लखनऊ में कहा था- मेरे ही देश के जवान बेटे रोहित को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। मां भारती ने अपना लाल खो दिया। कारण और राजनीति अपनी जगह पर होंगे लेकिन सचाई यह है। मैं उसके परिवार की पीड़ा को समझ सकता हूं।

इन छात्रों ने मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा की अपील भी खारिज कर दी जिन्होंने यहां के दौरे के दौरान उन्हें इंसाफ का आश्वासन देते हुए अांदोलन खत्म करने की अपील की थी। केंद्र ने विश्वविद्यालय से निलंबन के बाद रोहित के आत्महत्या करने की घटना की जांच के लिए शुक्रवार को ही न्यायिक आयोग के गठन का फैसला किया था।

छात्रों के आंदोलन के अगुआ ज्वायंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने मोदी के बयान पर असंतोष जताते हुए सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। जेएसी ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शोक संदेश हासिल करना बहुत ही अपमानजनक है, जिन्होंने अपने शोक संदेश में रोहित वेमुला को भारत माता की संतान बताया। ज्वायंट एक्शन कमेटी फोर सोशल जस्टिस रोहित की मौत पर राजनीति की कड़े शब्दों में निंदा करती है।

जेएसी ने कहा कि रोहित वेमुला और अन्य सामाजिक बहिष्कृत लोग हमेशा से हिंदुत्व और मनुवादी राजनीति के खिलाफ रहे हैं, जिसका भाजपा के मंत्री गर्व से समर्थन करते हैं। उसने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज किया, पुरुष पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं के साथ बुरा बर्ताव किया और उन्हें हिरासत में लिया। हैदराबाद विश्वविद्यालय में जो कुछ हुआ, उस पूरे मामले में उनकी सहभागिता और निष्क्रियता से साफतौर पर उनका राजनीतिक हित परिलक्षित होता है। उसने पूछा कि क्या मोदी रोहित वेमुला और अन्य सामाजिक बहिष्कृत शोध छात्रों के साथ हुई नाइंसाफी के लिए भाजपा मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

इसी बीच छात्रों की भूख हड़ताल शनिवार को सातवें दिन भी जारी है। अनशन पर बैठे छात्रों में शामिल जी प्रभाकर ने कहा कि डॉक्टरों के इन छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताए जाने के बाद भी वे अपना अनशन जारी रखना चाहेंगे क्योंकि हमारी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। जेएसी ने कहा कि जब तक हमारी सभी मांगें मान नहीं ली जातीं, छात्र वर्तमान संघर्ष तेज करेंगे। उनकी मांगों में कुलपति को हटाना, रोहित की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करना, छात्रों के खिलाफ झूठे मामले हटाना, उनका निलंबन बिना शर्त हटाना, रोहित के परिवार के एक सदस्य को नौकरी और 50 लाख रुपए का मुआवजा देना शामिल हैं।

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