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बाबा रामदेव: जो ठानने के बाद मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पतंजलि लौटे

2013 में रामदेव ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को पंतजलि योग पीठ बुलाया और संतों के सामने उन्हें देश का भावी प्रधानमंत्री घोषित किया।

मार्च 2014 में रामलीला मैदान में एक साथ बाबा रामदेव और नरेंद्र मोदी। (Source: Indian Express/Ravi Kanojia)

योग गुरु स्वामी रामदेव ने इस रामनवमी को अपने संन्यासी जीवन के 22 बसंत पूरे कर लिए। 1995 में रामनवमी के दिन हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के सैय्यद अलीपुर गांव के रहने वाले रामकृष्ण यादव को उनके गुरु ने हरिद्वार की उपनगरी कनखल में संन्यास की दीक्षा दी थी। दीक्षा लेने के बाद वे स्वामी रामदेव बन गए। योग की कलाओं के साथ- साथ रामदेव ने आयुर्वेद के क्षेत्र में जो विशाल साम्राज्य खड़ा किया है, उसने उन्हें योग गुरु के साथ कारोबार गुरु भी बना दिया है। आज पतंजलि के उत्पादों का टर्न ओवर दस हजार करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।  रामदेव की जीवन-यात्रा में आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण उनके सबसे करीबी रहे हैं। संन्यास लेने के बाद रामदेव ने योग की दुनिया में ऐसी अलख जगाई कि आज पूरी दुनिया में विश्व योग दिवस मनाया जा रहा है।

रामदेव 1993 में हरिद्वार आए और कनखल के श्री पंचायती उदासीन बड़ा अखाड़ा में पनाह ली। कनखल में आढ़त की दुकान चलाने वाले लाला प्रदुम्न अग्रवाल बताते हैं कि 20 साल पहले स्वामी रामदेव आचार्य बालकृष्ण के साथ साइकिल से उनकी दुकान में चीनी लेने आते थे और दिव्य योग आश्रम में दोनों आयुर्वेदिक दवाएं बनाकर बाजार में बेचा करते थे। कनखल के बुजुर्ग दुकानदार रामनाथ बताते है कि 19-20 साल पहले स्वामी रामदेव एक आम इंसान की तरह कनखल में घूमा करते थे। ज्योतिषविद और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी रहे डॉक्टर प्रदीप जोशी बताते हैं कि छात्र जीवन में स्वामी रामदेव आर्य समाजी संस्थाओं और स्कूल कॉलेजों में हवन करवाया करते थे। उनकी संस्कृत के ओजस्वी वक्ता के रूप में अच्छी पहचान बनने लगी और वे कनखल के दिव्य योग मंदिर में ही योग की कक्षाओं का संचालन करने लगे। तीर्थ पुरोहित समाज से जुड़े पंडित कौशल सिखौला का कहना है कि करीब 17 साल पहले तीर्थ पुरोहित समाज के लोगों ने ज्वालापुर के पांड़ोवाला क्षेत्र में उनका योग शिविर लगवाया था। इसके बाद रामदेव के योग शिविरों का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि वह आज तक नहीं थमा।

1995 में रामदेव ने दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। इसके बाद 2006 में हरिद्वार-दिल्ली राजमार्ग पर महर्षि दयानंद ग्राम में पतंजलि योगपीठ की स्थापना की। 2010 के कुंभ मेले में स्वामी रामदेव ने हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र पदार्था गांव में हजारों एकड़ जमीन में पतंजलि मेगा फूड पार्क की स्थापना की। इस फूड पार्क की पहचान देश के सबसे बड़े फूड पार्क के रूप में होने लगी। स्वामी रामदेव योग शिविरों के मंचों से पतंजलि के उत्पादों का प्रचार करते नजर आए। और देखते ही देखते स्वामी रामदेव योग गुरु के साथ पतंजलि फूड पार्क के उत्पादों के ब्रांड एंबेसडर के रूप में प्रसिद्ध हो गए। योग, आयुर्वेद के अलावा रामदेव ने शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम रखा। पतंजलि योग और आयुर्वेद विश्वविद्यालय व बच्चों की शिक्षा के लिए आचार्यकुलम की स्थापना की। स्वामी रामदेव की योजना पूरे देश के हर जिले में आचार्यकुलम की स्थापना करने की है। रामदेव अपने संस्कृत विद्यालयों में संस्कृत व्याकरण की कक्षा भी लेते हैं। ब्रिटिश हाउस आॅफ कॉमन्स, लंदन और अमेरिका के न्यूजर्सी में उन्हें योग के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित किया गया है। ब्रिटेन, नेपाल, अमेरिका, कनाडा, मॉरीशस में पंतजलि योगपीठ की शाखाएं चल रही हैं। 2015 -16 में पतंजलि आयुर्वेद का पांच हजार करोड़ का कारोबार हुआ था।

रामदेव 5 जून 2011 को उस वक्त चर्चा में आए जब दिल्ली के रामलीला मैदान में देर रात उन पर और उनके समर्थकों पर दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया और रामदेव महिला के कपड़ों में वहां से निकले। स्वामी रामदेव ने कालेधन के खिलाफ 2011 में पूरे देश में आंदोलन चलाया और अपने योग शिविरों में भी उन्होंने कालेधन को लेकर यूपीए सरकार पर करारी चोट की, जिसका उन्हें खासा नुकसान हुआ। उनके संस्थानों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कई मुकदमे ठोक डाले। रामदेव के संस्थान से जुड़े देश के कई उद्योगपतियों ने उनसे किनारा कर लिया। 2013 में रामदेव ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को पंतजलि योग पीठ बुलाया और संतों के सामने उन्हें देश का भावी प्रधानमंत्री घोषित किया। करीब एक साल तक स्वामी रामदेव पंतजलि योगपीठ नहीं आए और मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पूरे देश का दौरा किया। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही वे पतंजलि लौटे। उन्होंने इसे ‘संकल्प पूर्ति अभियान’ का नाम दिया।

केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद भाजपा के राष्टÑीय अध्यक्ष अमित शाह, राष्टÑीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री, कई राज्यों के राज्यपाल और आलाधिकारी पतंजलि योगपीठ में मत्था टेक चुके हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी एक भी दफा यहां नहीं आए हैं। जबकि पतंजलि में ही मोदी को भावी प्रधानमंत्री घोषित कर रामदेव इसे पूरा करने के अभियान में जुट गए थे। फिलहाल, स्वामी रामदेव ने खुद को राजनीति से दूर कर लिया है। वे सभी दलों के नेताओं से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं ताकि भाजपा और मोदी ठप्पे से मुक्ति पा सकें। यह योग-राजनीति में उनकी नई क्रिया है।

 

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