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खानदानी कांग्रेसी हैं ‘मध्यस्थ’ कारोबारी सज्जन जिंदल

कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक पाकिस्तान यात्रा के पीछे जिस उद्योगपति का हाथ होने का आरोप लगा रही है वे जिंदल परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस्पात कारोबारी सज्जन जिंदल हैं..

Author नई दिल्ली | December 27, 2015 5:52 AM
सज्जन जिंदल (फाइल फोटो)

कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक पाकिस्तान यात्रा के पीछे जिस उद्योगपति का हाथ होने का आरोप लगा रही है वे जिंदल परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस्पात कारोबारी सज्जन जिंदल हैं। हालांकि दिलचस्प यह है कि जिंदल का पूरा खानदान हमेशा से कांग्रेसी रहा है। उद्योग जगत में चर्चा है कि नरेंद्र मोदी को नवाज शरीफ के करीब लाने में जिंदल समूह के सज्जन जिंदल की अहम भूमिका रही जो कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के काफी करीब हैं। सज्जन जिंदल व नवाज शरीफ की नजदीकियों का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि पिछले साल जब नवाज शरीफ भारत आए तो वे 27 मई, 2014 को आपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद सज्जन जिंदल से मिलने के लिए मुंबई स्थित उनके घर पर चाय पीने गए थे। इसके बाद तीन जून, 2014 को दोनों नेताओं की काठमांडू में सार्क सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई।

इसे भी संयोग ही कहा जाएगा कि जब मोदी पाक प्रधानमंत्री की नातिन की शादी में अचानक हिस्सा लेने के लिए पहुंचे तो वहां सज्जन जिंदल सपत्नीक मौजूद थे। वे इस विवाह में हिस्सा लेने के लिए चार्टर्ड विमान से आए हुए थे। उन्होंने इस बारे में ट्वीट भी किया कि मैं भी शादी में हिस्सा लेने के लिए लाहौर आया हुआ हूं। नवाज शरीफ का परिवार भी मूलत: व्यापार और उद्योग से जुड़ा हुआ है। कई देशों जैसे अफगास्तिान में उनके व जिंदल परिवार के व्यावसायिक हित हैं।

इस संबंधों के पीछे इस्पात का धंधा भी छिपा हुआ है। अफगानिस्तान के बमियान इलाके में जहां कभी तालिबान ने बुद्ध की ऐतिहासिक प्रतिमा को उड़ाया था, लौह अयस्क की बेहद अच्छी खाने हैं। इन खदानों में एफिस्को (अफगान आयरन एंड स्टील कंसोर्टियम) में स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल),जेएसडब्लू (सज्जन जिंदल) जेएसपीएल (पूर्व कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल) व मोनेट इस्पात (जिंदल के रिश्तेदार संदीप जाजोदिया) की हिस्सेदारी है। इस लौह अयस्क की गुणवत्ता 60 फीसद है। इसके इस्तेमाल के लिए 20 लाख टन रोजाना की क्षमता वाला संयंत्र लगाने की योजना है जिसमें जेएसपीएल की हिस्सेदारी-16 फीसद, जेएसडब्लू की 8 फीसद ,मोनेट इस्पात की चार फीसदी व बाकी सेल की होगी। ये लोग चाहते हैं कि पाकिस्तान इस लौह अयस्क को कराची के जरिए भारत के दक्षिणी व पश्चिमी तट पर लाने की इजाजत दे दे वरना इसे रूस के रास्ते लाना पड़ेगा। अब इसे रूस के रास्ते लाने का खर्च इतना ज्यादा हो जाएगा कि इससे इस्पात बनाना घाटे का सौदा साबित होगा।

इसीलिए ये उद्योगपति पाकिस्तान के साथ मधुर संबंध बनाने की कोशिश करते आए हैं। वैसे पाकिस्तानी व्यापारी व उद्योगपति चाहते हैं कि भारत के साथ उनका व्यापार बढ़े ताकि वे भी सस्ती दरों पर सामान बेच कर मुनाफा कमा सकें। अभी भी बहुत सा सामान खाड़ी के देशों से होकर पाकिस्तान पहुंचता है जिससे उसकी लागत बढ़ जाती है। इस संबंध में जब जिंदल समूह से बात की गई तो उन्होंने किसी भी तथ्य का खंडन या पुष्टि नहीं की।

यहां यह बताना जरूरी हो जाता है कि हरियाणा के हिसार जिले के जिंदल परिवार का कांग्रेस से पुराना नाता रहा है। दिवंगत ओमप्रकाश जिंदल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा व विधानसभा में पहुंचे थे। उनके पुत्र नवीन जिंदल भी कांग्रेस से ही सांसद थे। ओमप्रकाश जिंदल की पत्नी सावित्री जिंदल भी हरियाणा में पिछली हुड्डा सरकार में मंत्री थीं।

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