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‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ छोड़ GST में करें सुधार तो दूर हो सकती है आर्थिक मंदी, पूर्व PM ने नकदी बढ़ाने समेत सुझाए 5 उपाय

यूपीए काल में प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह को गांधी परिवार का बेहद खास माना जाता है। अहम बात यह भी है कि उन्हें 1990 में देश में हुए आर्थिक सुधारों का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 12, 2019 9:25 PM
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः प्रेमनाथ पांडे)

पूर्व प्रधानमंत्री, अर्थशास्त्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डॉ.मनमोहन सिंह ने देश में मौजूदा आर्थिक मंदी (Economic Slowdown) के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र के नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सरीखे फैसलों की वजह से यह स्लोडाउन की स्थिति पनपी है।

हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर चिंता जताने के साथ ही इस चुनौती से निपटने के लिए पांच उपाय बताए हैं। पूर्व पीएम ने इसके साथ ही मोदी सरकार से अपील की है कि वह ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ की अपनी आदत से बाज आ जाए। उन्होंने पांच सुझावों में यह भी कहा है कि सरकार को नकदी बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।

डॉ.सिंह ने ‘दैनिक भास्कर’ को दिए साक्षात्कार में बताया, “मोदी सरकार को हेडलाइन मैनेजमेंट से बाहर आना होगा। पहले ही काफी वक्त जाया हो चुका है। विभिन्न ऐलान करने के बजाय, उन्हें आर्थिक ढांचे को दुरुस्त करने को लेकर प्रयास करने चाहिए।”

उन्होंने सुझाव दिया- मौजूदा आर्थिक संकट से देश को उबारने के लिए केंद्र को विशेषज्ञों और सभी स्टेकहोल्डर्स को ध्यान से सुनना चाहिए। अर्थव्यवस्था को वापस ट्रैक पर लाने के लिए उन्हें जीएसटी को ‘लॉजिकल’ (तार्किक) बनाना होगा। दूसरा काम कृषि क्षेत्र और ग्रामीण उपभोग को रफ्तार देने के लिए नए तरीके इजाद करने होंगे।

सिंह ने यहां कांग्रेसी घोषणा-पत्र का हवाला दिया और कहा, “ऐसे ‘ठोस विकल्प’ होने चाहिए, जिनकी वजह से पैसा लोगों के हाथ तक सीधे पहुंचे।” तीसरी सलाह देते हुए वह बोले- पूंजी के निर्माण के लिए पूरी व्यवस्था में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ानी होगी।

पूर्व पीएम ने चौथे सजेशन के तौर पर कहा, “टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अफोर्डेबल हाउसिंग सरीखे प्रमुख श्रम आधारित क्षेत्रों को पुनःजीवित करना होगा। इस काम के लिए इजी लोन्स की जरूरत पड़ेगी। खासकर एमएसएमई के लिए।”

उनका यह भी मानना है, “हमें नए निर्यात के मौकों को भी पहचानना और हासिल करना होगा, जो कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर की वजह से पैदा हो रही हैं। याद रखें कि वृत्ताकार और ढांचागत समस्याओं का हल बेहद जरूरी है, तभी जाकर तीन से चार साल में हम ऊंची विकास दर हासिल कर सकेंगे।”

यूपीए काल में प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह को गांधी परिवार का बेहद खास माना जाता है। अहम बात यह भी है कि उन्हें 1990 में देश में हुए आर्थिक सुधारों का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है।

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