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Facebook, whatsapp और Twitter पर बड़ा एक्शन लेने जा रही मोदी सरकार, ये की तैयारी

केंद्र की मोदी सरकार निकट भविष्य में उन लोगों पर कार्रवाई का चाबुक चला सकती है जो सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग जैसी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। पेप्सिको, आईटीसी और पतंजलि जैसी कंपनियों ने फेसबुक, गूगल और यूट्यूब के जरिये उन्हें बदनाम करने वाले वीडियो आदि सामग्री को डिलीट करवाने के लिए अदालत का हस्तक्षेप मांगा है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फोटो सोर्स- pixabay)

केंद्र की मोदी सरकार निकट भविष्य में उन लोगों पर कार्रवाई का चाबुक चला सकती है जो सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग जैसी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। पेप्सिको, आईटीसी और पतंजलि जैसी कंपनियों ने फेसबुक, गूगल और यूट्यूब के जरिये उन्हें बदनाम करने वाले वीडियो आदि सामग्री को डिलीट करवाने के लिए अदालत का हस्तक्षेप मांगा है। सोमवार (30 जुलाई) को राज्यसभा में इस बाबत सरकार से सवाल किया गया। सरकार से पूछा गया है कि उसने सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं और क्या वह सोशल मीडिया और इसके यूजर्स के लिए किसी नई नीति पर काम कर रही है? इस पर सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि नई चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार कुछ दिशानिर्देशों को और मजबूत करेगी। उन्होने कहा, ”नियमों के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्धारित तत्परता का पालन करना जरूरी होगा, जिसमें यूजर्स को अन्य बातों के साथ-साथ यह सूचना देना जरूरी है कि वे कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल ऐसी किसी भी ऐसी सामग्री को होस्ट, डिस्प्ले, अपलोड, मोडीफाई, पब्लिश, ट्रांसमिट, अपडेट और शेयर करने के लिए नहीं करेंगे जो हानिकारिक, आपत्तिजनक और नाबालिगों को नुकसान पहुंचाने वाली और किसी भी मायने में गैरकानूनी हो।”

फेसबुक के पास सामुदायिक मानक दिशानिर्देश हैं और वह कथित तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी और दुर्भावनापूर्ण सामग्री के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। साल की शुरुआत में, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब स्थापित करने की योजना बनाई थी। इसे जिलों में स्थापित करना था, जिनके माध्यम से ट्रेंड करने वाले समाचारों पर नजर रखनी थी। ये हब केंद्र की प्रमुख योजनाओं पर प्रतिक्रिया इकट्ठा करने में भी मदद करते। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक परियोजना के अंतर्गत सरकार हर जिले में आंख और कान की तरह काम करने वाले मीडियाकर्मियों की भर्तियां कॉन्ट्रैक्च्युअल (संविदा) बेस पर करना चाहती थी। ये मीडियाकर्मी सरकार को जमीनी स्तर से रियल टाइम अपडेट्स पहुंचाते।

हाल में मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (बीईसीआईएल) ने परियोजना के लिए एक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदा जारी की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन डेटा की निगरानी के लिए सोशल मीडिया हब स्थापित करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्णय पर गंभीरता से ध्यान दिया है और माना है कि यह निगरानी की स्थिति बनाने जैसा होगा।

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