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नरेंद्र मोदी ने कहा- गरीब दिलदार तो अमीर रहते हैं कर्ज उड़ाने के फेर में

मोदी ने कहा कि दलितों और आदिवासियों में भी उतनी ही प्रतिभा और कौशल है, जितना आप और हम में है।

Author नोएडा | April 6, 2016 2:32 AM
स्टैंड अप इंडिया की शुरुआत के मौके पर मंगलवार को आयोजित खास समारोह को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

कर्ज उड़ाऊ कारोबारियों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां कहा कि जहां गरीब लोग ईमानदार और दिलदार हैं, वहीं कुछ अमीर कर्जदार कर्जा लेकर रफूचक्कर होने के रास्ते तलाशते हैं। केंद्र सरकार के अहम वित्तीय समावेशी कार्यक्रम स्टैंड अप इंडिया की शुरुआत के मौके पर मंगलवार को आयोजित खास समारोह में मोदी ने कहा कि दलितों और आदिवासियों में भी उतनी ही प्रतिभा और कौशल है, जितना आप और हम में है। अगर उन्हें हुनर, समझ और सामर्थ्य के अनुसार सुविधा दी जाए तो वे कामयाबी का इतिहास रच सकते हैं। स्टार्टअप, स्टैंड अप इंडिया योजना इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार ने शुरू की हैं।

इस अवसर पर मोदी ने सेक्टर- 62 में भारतीय माइक्रो क्रेडिट (बीएमसी) कार्यक्रम में 5100 ई रिक्शा वितरित किए। दलित, आदिवासियों और महिलाओं को सशक्त बनाने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत बाबू जगजीवन राम की जयंती पर किए जाने पर मोदी ने लोगों को बधाई दी। जगजीवन राम को देश का महापुरुष बताते हुए मोदी ने तंज किया कि पिछली सरकारों ने उनके योगदान को भुला दिया। उन्होंने कहा, मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी जगजीवन राम ने ईमानदारी और सच्चाई का रास्ता अपनाया। केवल प्रतिभा के सहारे मिलने वाली तरक्की को ही उन्होंने जीवन का आधार माना था। उनके कृषि मंत्री कार्यकाल के दौरान देश में पहली हरित क्रांति हुई। देश ने 1971 की जंग उनके रक्षा मंत्री रहते हुए जीती।

मोदी ने कहा कि समाज के सबसे आखिरी आदमी को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सरकार ने कई महत्त्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की है। इसके सफल संचालन के लिए एक नीति तैयार की गई है। स्टार्टअप, स्टैंड अप इंडिया इसी नीति के तहत शुरू हुई है। इस नीति के तहत देश की 1.25 लाख बैंक शाखाएं एक दलित या अदिवासी और एक महिला को 10 लाख से एक करोड़ रुपए का ऋण देंगी। बैंकों की शाखाएं अपने-अपने इलाकों में कर्ज देंगी ताकि पूरे देश में समान तौर पर इस योजना का फायदा पहुंच सके। महिलाओं और दलितों को यह ऋण बगैर गारंटी से मिल सके, इसके लिए सरकार ने दिशा-निर्देश तय कर दिए हैं।

उन्होंने बताया कि देश में छह करोड़ से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिन्हें छोटे कारोबार चलाने के लिए अभी तक कर्ज मिल पाना संभव नहीं था। जनधन योजना के तहत खोले गए खातों से लोगों को बैंक और बैंकिंग प्रणाली की जानकारी मिली। इसके चलते 3.25 करोड़ से ज्यादा लोगों के खुद व्यवसायी बनाने का सपना साकार होगा। खास तौर पर दलित, गरीबों और महिलाओं में इससे नई चेतना जागेगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि दलित और महिला, दोनों वर्गों से बड़े पैमाने पर उद्यमी खड़े हों। लघु उद्योग के विकास को देश की बेरोजगारी दूर करने का सबसे बड़ा माध्यम साबित करने की दिशा में यह प्रयास देश की तरक्की में मील का पत्थर साबित होगा।

इससे पहले तय कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री शाम चार बजे सेक्टर- 62 पहुंचे। हैलीपैड पर उतरने के बाद मोबाइल ऐप से ई रिक्शा बुककर उसमें सवार होकर मंच तक पहुंचे। उनके साथ उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और केंद्रीय राज्यमंत्री व गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ महेश शर्मा भी ई रिक्शा में सवार हुए। मंच तक पहुंचने पर मोबाइल के जरिए ई रिक्शा के किराए का भुगतान भी किया।

इससे पहले मोदी ने बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों के स्टालों और ई रिक्शा का भी निरीक्षण किया। ई रिक्शा लेने वाले लाभार्थियों के परिवार के साथ चाय पर भी चर्चा कर उनके जीवन यापन के बारे में जानकारी ली। मंच पर रिमोट का बटन दबाकर स्टैंड अप इंडिया का लोगो लांच करने के बाद एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शित की गई। उन्होंने नया व्यवसाय स्थापित करने वाले करीब एक दर्जन महिलाओं, पुरुषों को चेक भी प्रदान किए। साथ ही सांकेतिक तौर पर 10 लाभार्थियों को ई रिक्शा की किट सौंपी। किट लेने वाली सभी महिलाएं थीं।

इससे पहले अपने संबोधन में जेटली ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने बड़े व्यवसायी और नीति निर्माण के क्षेत्र से आगे बढ़कर पहली बार सीधे आम आदमी से जुड़ने की योजनाओं पर अमल शुरू किया है। जनधन योजना के तहत 18 करोड़ देशवासियों के पहली बार बैंक खाते खोले गए हैं। हर आदमी को बीमा और पेंशन का लाभ देने के लिए 12.35 करोड़ लोगों को बीमा योजना में पंजीकरण कराया है।

आधार कार्ड के जरिए हर महीने पेंशन सीधे खातों में पहुंच रही है। तीसरी और सबसे अहम योजना गरीबों को साहूकारों के चुंगल से मुक्त कराने के लिए छोटे ऋण उपलब्ध कराने के लिए मुद्रा योजना पिछले साल से शुरू की गई है। इस योजना के तहत 31 मार्च, 2016 तक 1.22 लाख करोड़ रुपए के ऋण बांटे गए हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसे डेढ़ गुना अधिक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है जिसमें 70 फीसद महिलाओं को शामिल किया जाएगा।

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