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नरेंद्र मोदी-बराक ओबामा कई क्षेत्रों में मिल कर करेंगे काम, जताया भरोसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-अमेरिका व्यावसायिक सम्मेलन में कहा कि हमने आर्थिक वृद्धि बढ़ाने और लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए पिछले आठ महीने में अथक प्रयास किए हैं। सरकार निवेश को बढ़ावा देने वाला और उद्यमों को पुरस्कृत करने वाला माहौल देगी। मोदी ने कहा कि वे खुद व्यक्तिगत रूप से बड़ी […]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-अमेरिका व्यावसायिक सम्मेलन में कहा कि हमने आर्थिक वृद्धि बढ़ाने और लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए पिछले आठ महीने में अथक प्रयास किए हैं। सरकार निवेश को बढ़ावा देने वाला और उद्यमों को पुरस्कृत करने वाला माहौल देगी। मोदी ने कहा कि वे खुद व्यक्तिगत रूप से बड़ी परियोजनाओं पर नजर रखेंगे। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बौद्धिक संपदा अधिकार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हमें अभी काफी क्षेत्रों में साथ काम करने की जरूरत है।

नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के दिग्गज उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा- मैं व्यक्तिगत रूप से बड़ी परियोजनाओं पर नजर रखूंगा। उन्होंने कहा कि बड़ी परियोजनाओं पर प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी के सुझाव से मैं सहमत हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा-‘एक अच्छा सुझाव आया है कि बड़ी परियोजनाओं पर प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर नजर रखी जाए। मैं इस सुझाव से सहमत हूं। मैं बड़ी परियोजनाओं पर नजर रखने की जिम्मेदारी लेता हूं। मैं उन पर खुद नजर रखूंगा।’

भरोसेमंद कर व्यवस्था का वादा करते हुए मोदी ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के लिए नीतियों में निरंतरता जरूरी है। भारत में हर क्षेत्र में भारी संभावनाए हैं। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए अर्थव्यवस्था में वृद्धि जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत संभावनाओं से परिपूर्ण है। हमारे पास प्रतिभा और अवसर हैं। हम कौशल, आकार और गति पर ध्यान देना चाहते हैं। शांति के लिए समृद्धि कोई गारंटी नहीं है। भारत दुनिया को एक परिवार के रूप में देखता है। व्यवसाय करने के लिहाज से बेहतर शीर्ष 50 देशों में जगह बनाने का हमारा लक्ष्य है।

फोरम को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि दोनों देशों को जिन खास चीजें पर काम करने की जरूरत है उनमें दोनों देशों में कारोबार करना आसान बनाना शामिल है। उन्होंने कहा-‘अब भी कई बाधाएं हैं।’ इसलिए नियमनों को दुरुस्त करने, लालफीताशाही हटाने और नौकरशाही से परे जाने की जरूरत है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत में चार अरब डालर निवेश की घोषणा की जिसमें मेक इन इंडिया कार्यक्रम में मदद के लिए अमेरिका की ओर से निर्यात के वित्त पोषण के लिए एक अरब डालर, लघु व मध्यम उद्यमों के लिए एक अरब डालर और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में दो अरब डालर का निवेश शामिल है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी निर्यातक भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर बहुत चिंतित हैं क्योंकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था तेजी से ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का रूप ले रही है। ओबामा ने कहा कि भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण की ‘कारगर व्यवस्था के अभाव’ में कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसलिए हम वैश्विक मूल्यवर्धन शृंखला के उच्चतम स्तर पर काम करना चाहते हैं।

निवेश लाने के लिए मोदी की सुधार संबंधी पहल का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा-‘हमें व्यापार को दबाने के बजाय इसे बढ़ावा देने की जरूरत है। हमें पारदर्शी, सुसंगत होने और बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण करने की जरूरत है।’

भारत व अमेरिका के दिग्गज उद्यमियों की यहां हुई बैठक में अमेरिकी प्रतिबंधों को तीसरे देश की कंपनी पर लागू करने, कारोबारी माहौल आसान बनाने और बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण जैसे दर्जनों विषयों से जुड़े मुद्दे उठाए गए। भारत-अमेरिका सीईओ फोरम की इस बैठक में भारत के उद्योगपतियों ने दोनों देशों से जुड़े मुद्दों को आपस में साझा किया और सभी मुद्दों को उठाने के बजाए केवल प्रासंगिक क्षेत्रों की बात की।

इस बैठक में बाद में ओबामा व मोदी ने अपनी बात रखी। इसमें भारतीय सीईओ को केवल 18 मिनट का समय दिया गया था। चर्चा को देखने वाले सूत्रों ने बताया कि पांच सीईओ केवल दो-दो मिनट बोले। उसके बाद खुली परिचर्चा हुई जिसमें अन्य सीईओ को अपनी राय रखने का मौका मिला।

एचडीएफसी के दीपक पारेख ने कारोबार करने में द्विपक्षीय सुगमता की बात की तो भारती एंटरप्राइजेज के सुनील मित्तल ने इलेक्ट्रानिक संकुल विकास और स्मार्ट शहर पर विचार रखे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कृषि, नवोन्मेष व कौशल विकास, बायोकान की चेयरमैन किरण मजूमदार शॉ ने दवा उद्योग व बौद्धिक संपदा (आइपी) से जुड़े मुद्दों को उठाया।

तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक दिनेश के सर्राफ ने भारत-अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नहीं होने का जिक्र किया और कहा कि इससे एलएनजी का आयात प्रभावित हो रहा है। मालूम हो कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका से प्रतिस्पर्धी कीमत पर प्राकृतिक गैस की दीर्घकालिक आपूर्ति का आश्वासन चाहता है, लेकिन अमेरिका उन देशों को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति नहीं करता जिनके साथ उसका एफटीए नहीं है। सर्राफ ने रूस व ईरान जैसे देशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध का मुद्दा भी उठाया।

सूत्रों के अनुसार खुली परिचर्चा में कुमार मंगलम बिड़ला ने अमेरिका में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के समक्ष चुनौतियों को उठाया। महिंद्रा ग्रुप के प्रमुख आनंद महिंद्रा ने रक्षा व एकल खिड़की मंजूरी का मुद्दा सामने रखा। आइसीआइसीआइ की सीईओ चंदा कोचर ने अमेरिकी कर अपवंचना कानून व विदेशी खाता कर अनुपालन कानून (एफएटीसीए) के प्रावधानों सहित बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य मुद्दे उठाए।

रिलायंस ग्रुप के प्रमुख अनिल अंबानी ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग की बात की, तो एस्सार के शशि रूइया ने अमेरिका में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) संबंधी पहल पर विचार रखे।

इस बैठक की सह अध्यक्षता टाटा संस के साइरस मिस्त्री व हनीवेल के डेविड एम कोटे ने की। इसमें भारत व अमेरिका की प्रमुख कंपनियों के अधिकारी शामिल हुए। फोरम में 17 सदस्यीय भारतीय दल में अडाणी ग्रुप के प्रमुख गौतम अडाणी, टोरेंट फार्मा के सुधीर मेहता, एसबीआइ प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य, भेल के प्रमुख बी प्रसाद राव शामिल हैं। अमेरिकी टीम में पेप्सीको की इंद्रा नूयी, मैकग्रा हिल फिनांशल के चेयरमैन हेराल्ड मैकग्रा व मास्टरकार्ड के सीईओ अजय बंगा शामिल थे।

 

 

 

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