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बोध गया को आध्यात्मिक राजधानी बनाएंगे: मोदी

बोध गया को ‘ज्ञान प्राप्ति की भूमि’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार इस स्थल को आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित..

Author बोध गया | September 6, 2015 8:58 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम बोध गया को विकसित करेंगे ताकि यह आध्यात्मिक राजधानी बन सके और भारत व बौद्ध जगत के बीच सांस्कृतिक रिश्ते के रूप में स्थापित हो सके।” (Source: Express photo by Prashant Ravi)

बोध गया को ‘ज्ञान प्राप्ति की भूमि’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार इस स्थल को आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करेगी ताकि यह भारत और बौद्ध जगत के बीच सांस्कृतिक रिश्ते के रूप में स्थापित हो सके।

प्रधानमंत्री ने महाबोधि मंदिर का दौरा करने के बाद कहा कि दुनिया भर के बौद्ध बोध गया को तीर्थस्थल के रूप में देखते हैं। हम बोध गया को विकसित करेंगे ताकि यह आध्यात्मिक राजधानी बन सके और भारत व बौद्ध जगत के बीच सांस्कृतिक रिश्ते के रूप में स्थापित हो सके। भारत सरकार इस पवित्र स्थल से उन सभी बौद्ध राष्ट्रों को हरसंभव मदद देगी जिसकी उन्हें अपनी आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए जरूरत है।

बुद्ध को भारत के ‘ताज का माणिक’ बताते हुए मोदी ने कहा कि वह बुद्ध को केवल हिंदूवाद के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए भी एक सुधारक के रूप में देखते हैं। बुद्ध ने नए विश्व दृष्टिकोण को पेश किया जो सभी के अस्तित्व के लिए महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत पूजा के सभी माध्यमों को स्वीकार करता है। यही बात है जो भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखती है। मोदी ने कहा कि भारत में हिंदूवाद का यह गुण कई महान आध्यात्मिक गुरुओं की उपज है और बुद्ध उनमें सबसे प्रमुख हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बुद्ध और भगवान कृष्ण ने विश्व को बहुत कुछ सिखाया है। कृष्ण ने महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले अपना संदेश दिया और बुद्ध ने हमेशा युद्धों से ऊपर उठने पर जोर दिया। दोनों ने ही सिद्धांतों और प्रक्रियाओं को बहुत अधिक महत्त्व दिया। बुद्ध ने आठ सूत्री और पंचशील का मार्ग दिया तो श्रीकृष्ण ने कर्म योग के रूप में जिंदगी का अनमोल पाठ पढ़ाया। दोनों दिव्य आत्माओं में लोगों को एक साथ लाने और मतभेदों से ऊपर उठने की ताकत थी। उनकी शिक्षाएं व्यावहारिक, शाश्वत और आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।

दिल्ली में ‘संघर्ष से बचाव और पर्यावरणीय चेतना’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय हिंदू बौद्ध सम्मेलन के संबंध में मोदी ने कहा कि इस सम्मेलन की विषयवस्तु एक तरह से इन दोनों महान विभूतियों के बताए मूल्यों व आदर्शों से प्रेरित थीं। मेरे विचार से विविधतापूर्ण विश्व के आदर्श विकास में यह एक सकारात्मक मोड़ है। मैं निजी रूप से ‘संघर्ष से बचाव और पर्यावरणीय चेतना’ पर हिंदू-बौद्ध सम्मेलन को ऐसे विश्व में अहम घटनाक्रम मानता हूं जिसके पास दोनों ही मुद्दों पर ठोस विचारों का अभाव है।

कई हिंदू विद्वानों के बुद्ध की सराहना किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन ने यह उम्मीद जगाई है कि संघर्ष से परे जाकर सांस्कृतिक समरसता और विश्व शांति पर संवाद का प्रारूप सृजित किया जाए। बोध गया को ‘ज्ञानदीप्ति की धरती’ बताते हुए उन्होंने कहा कि बुद्ध ने विश्व को नैतिकता की एक संपूर्ण व्यवस्था दी। वह समानता के महान शिक्षक थे। सालों पहले बोध गया को सिद्धार्थ मिला लेकिन बोध गया ने विश्व को भगवान बुद्ध दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व स्तर पर सोच में जो बदलाव आया है उसने हिंदू, बौद्ध समाजों के लिए अपने सर्वसम्मत विचारों को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने के लिए एक जैविक व्यवस्था सृजित की है। उनकी इच्छा है कि यह ज्ञान भावी पीढ़ियों तक इस तरीके से पहुंचे कि वे व्यावहारिक रूप से इसके साथ खुद को जोड़ सकें। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की अवधारणा संघर्ष समाधान से संघर्ष से बचाव और पर्यावरण नियमन से पर्यावरणीय चेतना में बदलाव को आधार बनाकर की गई। सम्मेलन में इन दोनों मुद्दों पर व्यापक सर्वसम्मति बनती नजर आ रही है। यह अभूतपूर्व घटनाक्रम है जो संयोगवश ऐसे समय हुआ जब एशिया आर्थिक व सांस्कृतिक परिघटना के रूप में उत्कर्ष की ओर है।

संघर्षों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इनमें से अधिकतर धार्मिक असहिष्णुता से संचालित होते हैं। सम्मेलन में प्रतिभागी इस सहमति पर दिखे कि किसी व्यक्ति के अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता में कोई समस्या नहीं है। जब चरमपंथी तत्त्व अपनी विचारधाराओं को दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं तो संघर्ष की संभावना बनती है। मोदी ने कहा कि सम्मेलन में इस बात पर भी सहमति बनती दिखी कि धर्म की दार्शनिक समझ जो प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर देती है, वह सतत विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है।

मोदी जवाहर लाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद बोध गया आने वाले तीसरे प्रधानमंत्री हैं। यहां मोदी का स्वागत बोध गया मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव एन दोरजी और अन्य सदस्यों ने किया। प्रधानमंत्री ने यहां भगवान बुद्ध को नमन किया और बौद्ध भिक्षुओं ने मंत्र पढ़े। वह महाबोधि वृक्ष के दर्शन करने भी गए। मोदी ने कुछ समय बौद्ध संस्कृति और विरासत को दर्शाने वाली प्रदर्शनी में भी बिताया। सम्मेलन में कई बौद्ध देशों के प्रतिनिधियों, राजनयिकों और बौद्ध भिक्षुओं ने भाग लिया।

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