ताज़ा खबर
 

एनएसए वार्ता रद्द: कांग्रेस ने कहा, पाकिस्तान की इच्छा पूरी की मोदी सरकार ने

भारत-पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता रद्द होने के लिए कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है..

Author August 24, 2015 09:42 am
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पाकिस्तानी समकक्ष सरताज अजीज।

भारत-पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता रद्द होने के लिए कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्त अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से भारत सरकार ने बिना तैयारी किए, बिना ध्यान केंद्रित किए, अस्थायी तौर पर, पर्याप्त काम नहीं कर इसके (पाकिस्तान) हाथों में खेल गई।’’ राजनीतिक दलों ने निराशा जताई।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने उम्मीद जताई कि वार्ता का टूटना अस्थायी है जबकि अलगाववादियों ने इसके लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस ने भी नरेन्द्र मोदी सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के हाथों में खेल गई और आतंकवाद पर वार्ता से पाकिस्तान को हटने का अवसर दे दिया जिसका भाजपा ने जोरदार खंडन किया।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने वार्ता रद्द करने के लिए अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराया। फारूक के बेटे और एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर निराशा जताते हुए कहा कि पिछले वर्ष के प्रस्तावित वार्ता के अनुभव से उनको यही उम्मीद थी जब भारत ने हुर्रियत के मुद्दे पर विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी थी। सईद ने निराशा जताई और उम्मीद जताई कि ‘‘वार्ता का टूटना अस्थायी होगा।’’

मुख्यमंत्री ने परोक्ष तौर पर पाकिस्तान और अलगाववादियों को भी नसीहत देते हुए कहा, ‘‘एनएसए जैसी सभी द्विपक्षीय वार्ताओं में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समग्र भागीदारी के लिए जोर देना अपेक्षित नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की द्विपक्षीय वार्ता के अचानक रद्द हो जाने से वह निराश हैं और उम्मीद जताई कि वार्ता का टूटना ‘‘अस्थायी होगा और उफा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने जो सिलसिला शुरू किया था वह व्यर्थ नहीं जाएगा।’’

उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और पाकिस्तान ‘‘जल्द ही सार्थक वार्ता शुरू करेंगे’’ और संबंधों को सामान्य करने में नयी दिल्ली ने जो पहल की है उस पर इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया सकारात्मक होगी। सईद ने कहा कि वह चाहते हैं कि दोनों देश ‘‘अविश्वास की खाई को पाट दें।’’

दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्त अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से भारत सरकार ने बिना तैयारी किए, बिना ध्यान केंद्रित किए, अस्थायी तौर पर, पर्याप्त काम नहीं कर इसके (पाकिस्तान) हाथों में खेल गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें काफी दुख है कि इस तरह से वार्ता तोड़कर पिछले दस वर्षों की उपलब्धियों को झटका लगा है। आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर वार्ता से हटने का पाकिस्तान को कोई अवसर नहीं दिया जाना चाहिए था।’’

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोपों से इंकार किया और कहा कि ‘‘मजबूत’’ सरकार ने हुर्रियत नेताओं से मिलने के कार्यक्रम को ‘‘मिशन इंपासिबल’’ बनाकर ‘‘अच्छी कूटनीति’’ की।

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी मोदी सरकार के साथ खड़ी दिखी और कहा कि एनएसए वार्ता में पाकिस्तान का अलगाववादी नेताओं से मिलने पर जोर देना सही नहीं था और वार्ता तथा आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते।

फारूक अब्दुल्ला ने वार्ता के रद्द होने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और इसके लिए अलगाववादी नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर के इन स्वघोषित चैंपियन को थोड़ा साहस दिखाना चाहिए और खुद को पीछे कर लेना चाहिए। जल्दबाजी क्या थी? हुर्रियत और अन्य अलगाववादी नेताओं को पाकिस्तान से धन मिलता है। पाकिस्तान उनके दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘स्वागत में उनकी उपस्थिति से क्या हासिल होता है? वे आसानी से इससे बच सकते थे।’’
उमर ने कहा, ‘‘घटनाओं से मैं काफी निराश हूं।’’ उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इसी मुद्दे पर जब विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द हुई थी तभी से मैं चिंतित था।

हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने वार्ता को रद्द करने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। मीरवाइज ने कहा, ‘‘वार्ता करने के एक और अवसर को दोनों देशों ने गंवा दिया। ताबूत में अंतिम कील विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ठोक दी जब उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि कश्मीर पर कोई वार्ता नहीं होगी। आगे बढ़ने के बजाए हम पीछे जा रहे हैं।’’

उन्होंने दुख जताया कि भाजपा और उसके सहयोगी पीडीपी ने आश्वासन दिया था कि वे सभी विचारधारा के लोगों से बात करेंगे। हुर्रियत ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि वे जो कहते हैं और जो करते हैं उसमें काफी अंतर है।’’

उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कश्मीर पर कश्मीरियों के साथ बात करेगी। एक अन्य अलगाववादी नेता शब्बीर शाह ने कहा कि वार्ता रद्द होने से वह निराश हैं। वह दक्षिण दिल्ली स्थित एक अतिथि गृह में नजरबंद हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि वार्ता से पहले सरकार ने पाकिस्तान के समक्ष कोई पूर्व शर्त नहीं रखी थी।’’
हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने भी एनएसए वार्ता के रद्द होने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया लेकिन कहा, ‘‘यह हमारे लिए और पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक जीत है।’’

कट्टरपंथी समूह के प्रवक्ता अयाज अकबर ने कहा, ‘‘दुनिया के बीच संदेश गया है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय विवाद नहीं है और जम्मू-कश्मीर के लोग इसमें अहम पक्ष हैं। सरकार का अतिवादी रुख व्यावहारिक नहीं है। नयी दिल्ली कब तक यह नीति अपनाएगी।’’

माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने कहा कि जो लोग शांति प्रक्रिया को मजबूत करना चाहते थे उनके लिए यह ‘‘काफी निराशाजनक’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘वार्ता को रद्द करने से दोनों तरफ के कट्टरपंथियों और अतिवादियों को ही समर्थन मिला है।’’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App