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केंद्र ने हटाई जीडीपी के आंकड़ों वाली रिपोर्ट, दस फीसदी बताई थी मनमोहन काल की विकास दर

बैक सीरीज़ के आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा था कि यूपीए सरकारों ने बेहतरीन विकास किया और 140 मिलियन गरीबी दूर की।

GPD business newsभारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह। (पीटीआई)

यूपीए शासनकाल के दौरान बेहतर आर्थिक प्रदर्शन दिखाने वाली जीडीपी आंकड़ें की एक रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने इसके मूल स्थान से हटा दिया। सरकार ने इसे महज मसौदा भर बताते हुए कहा कि इसे कहीं उद्धृत ना किया जाए। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने साथ ही ये भी कहा कि ये आधिकारिक अनुमान नहीं हैं और डेटा आधिकारिक तौर पर बाद में जारी किया जाएगा।

रियल सेक्टर स्टैटिस्टिक्स की समिति की रिपोर्ट के आधार पर जीडीपी पर बैक सीरीज़ के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था 1991 के उदारीकरण के बाद 2006-07 में तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 10.08 प्रतिशत की विकास दर देखी।

25 जुलाई को सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की वेबसाइट पर बैक-सीरीज जीडीपी विकास रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। लेकिन पिछले सप्ताह के अंत में मीडिया द्वारा रिपोर्ट किए जाने के बाद यह विवादास्पद हो गया और इससे सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच बहस शुरू हो गई।

रिपोर्ट को बाद में मंत्रालय की वेबसाइट के रिपोर्ट अनुभाग में अपने मूल वेब पते से हटा दिया गया था और वेबसाइट के राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के ड्राफ्ट रिपोर्ट्स’ अनुभाग में रियल सेक्टर स्टैटिस्टिक्स पर ‘ड्राफ्ट रिपोर्ट’ के रूप में ‘अबाउट अस ’ के तहत पोस्ट कर दिया गया।

बैक सीरीज़ के आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा था कि यूपीए सरकारों ने बेहतरीन विकास किया और 140 मिलियन गरीबी दूर की।

उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा, “सत्य की जीत हुई है। जीडीपी की पिछली श्रृंखला की गणना ने साबित कर दिया है कि आर्थिक विकास का सबसे अच्छा साल 2004-2014 था।“

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