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चुनाव से पहले ‘मेक इन इंडिया’ को भुनाने की तैयारी में मोदी सरकार, दो मेगा शो की तैयारी

'के-9 वज्र' 155 एमएम स्वचालित होवित्जर 100 तोप बनाने के लिए लगभग 4500 करोड़ रुपये का ठेका आर्मी ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल कम्पीटिशन के जरिए निजी क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो को दिया था।

बोफोर्स घोटाले का खुलासा होने के करीब 30 वर्ष बाद भारत को मई में दो बेहद हल्की हॉवित्जर तोपें मिली थीं। (Photo: Reuters)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे नाकामी के आरोपों का जवाब देने और पीएम मोदी की अतिमहत्वकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता की कहानी चुनावों से पहले भुनाने की कवायद तेज हो गई है। इसके मद्देनजर सरकार आगामी महीनों में दो मेगा शो करने की तैयारी कर रही है। इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक इनमें से एक कार्यक्रम गुजरात में होगा, जहां ‘के-9 वज्र’ तोप का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि ‘एम 777’ अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों की ज्वाइंट फायरिंग एक्सरसाइज महाराष्ट्र में करने की बात चल रही है। बता दें कि ‘के-9 वज्र’ 155 एमएम स्वचालित होवित्जर 100 तोप बनाने के लिए लगभग 4500 करोड़ रुपये का ठेका आर्मी ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल कम्पीटिशन के जरिए निजी क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो को दिया था।

माना जा रहा है कि तोप की पहली खेप कंपनी अगले कुछ सप्ताह में गुजरात के हाजिरा बंदरगाह पर सौंपेगी। इन तोपों को भारत में ही स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। अपने आप चारों दिशा में घूमने वाली ये ‘के-9 वज्र’ तोपें एल एंड टी ने साउथ कोरिया की हान्वा टेकविन के सहयोग से बनाया है और उसकी के9 थंडर तोपों का आधुनिक वर्जन है। एलएंडटी ने इसमें भारतीय सेना की जरूरत के हिसाब से कई सुधार किए हैं और अत्याधुनिक बनाया है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक इसे देश की पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जाएगा। इसकी खासियत है कि यह रेगिस्तान में भी काम करेगा।

दूसरा मेगा शो महाराष्ट्र में अगले महीने हो सकता है जहां अमेरिकी कंपनी बीईए द्वारा निर्मित 145 एमएम 777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपें सुपुर्द की जाएंगी। 700 मिलियन डॉलर मूल्य के इन तोपों के निर्माण और सप्लाई से संबंधित रक्षा सौदे को केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2016 में मंजूरी दी थी और 30 नवंबर को ही इसको लेकर अमेरिका के साथ करार हुआ था। इस करार के मुताबिक जून 2018 तक इन तोपों के भारत पहुंचने की उम्मीद थी। करार के मुताबिक कंपनी दो तोप पहले ही उपलब्ध करा चुकी है। माना जा रहा है कि एम 777 को पाकिस्तान और चीन की सीमा से सटे दुर्गम और ऊंचाई वाले सामरिक केंद्रों पर स्थापित किया जाएगा। रक्षा सूत्रों के मुताबिक एम 777 और वज्र की ज्वाइंट फायरिंग देवलाली रेंज में आनेवाले दिनों में हो सकती है। उसके बाद इसे भारतीय सेना को सुपुर्द कर दिया जाएगा।

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