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डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर लेवल के 60 फीसदी पोस्ट बाहर से भरेगी मोदी सरकार!

सरकार में सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर स्तर के कुल 650 पद हैं। अब ऐसे में 400 पदों पर प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञों की भर्ती का मतलब है कि प्रशासन के इन अहम पदों के 60 प्रतिशत पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों का कब्जा हो जाएगा।

Author नई दिल्ली | Published on: June 12, 2019 9:50 AM
मोदी सरकार के कद्दावर अफसर पीके मिश्रा, अजीत डोवाल और नृपेन्द्र मिश्रा। (file pic)

केन्द्र की मोदी सरकार प्रशासन के शीर्ष स्तर पर बड़ी संख्या में बाहरी विशेषज्ञों की तैनाती पर विचार कर रही है। खास बात ये है कि ये तैनाती ना सिर्फ जॉइंट सेक्रेटरी, बल्कि लोअर डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर लेवल पर भी हो सकती हैं। सरकार यह कदम प्रशासनिक कामों में विशेषज्ञता और बेहतरी लाने के उद्देश्य से उठा रही है। द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बीती 3 जून को डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के सचिव ने अपने विभाग की एक बैठक ली थी। इस बैठक में सचिव ने एक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत प्राइवेट सेक्टर के करीब 400 विशेषज्ञों को सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर की पोस्ट पर भर्ती करने को कहा गया है।

बता दें कि सरकार में सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर स्तर के कुल 650 पद हैं। अब ऐसे में 400 पदों पर प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञों की भर्ती का मतलब है कि प्रशासन के इन अहम पदों के 60 प्रतिशत पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों का कब्जा हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि अभी तक जॉइंट सेक्रेटरी और डायरेक्टर जैसे पद भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के माध्यम से भरे जाते रहे हैं। वहीं डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के 650 पद केन्द्रीय सचिवालय सर्विस में प्रमोशन द्वारा भरे जाने हैं। सरकार इन पदों पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भर्ती नहीं कर सकती, क्योंकि इसके लिए सरकार को केन्द्रीय सचिवालय सर्विस रूल्स, 2009 में बदलाव करने की जरुरत पड़ेगी। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के अधिकारी फिलहाल निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भर्ती के लिए भर्ती प्रक्रिया और योग्यता मापने की प्रक्रिया को अंतिम रुप देने में जुटे हैं।

सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग में 516 पदों में से 54 पदों पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भर्ती किए जाने पर विचार किया जा रहा है। मौजूदा समय में जॉइंट सेक्रेटरी जैसे अहम पद पर, जिसे आमतौर पर प्रशासन की अहम कड़ी माना जाता है, भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के माध्यम से ही लोग चुने जाते हैं। इसके साथ ही सरकार ने केन्द्रीय मंत्रियों के निजी सचिव और ओएसडी जैसे पदों पर सेवा की अवधि 5 साल तक के लिए सीमित कर दी है। इसका मतलब ये हुआ कि 5 साल के बाद केन्द्रीय मंत्रियों के निजी सचिव और ओएसडी बदल दिए जाएंगे। वहीं मोदी सरकार ने एनएसए अजीत डोवाल के बाद पीएम मोदी के प्रमुख सचिव नृपेन्द्र मिश्रा और अतिरिक्त प्रमुख सचिव पीके मिश्रा को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।

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