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हर चार में से तीन कंपनियों को मिल जाएगा कर्मचारियों को किसी भी क्षण निकालने का अधिकार- मोदी सरकार के प्रस्तावित क़ानून से बढ़ी चिंता

कई जानकारों का मानना है कि यूएस में कंपनियों के पास अपनी इच्छा के मुताबिक कर्मचारियों को हटाने का अधिकार है और अगर मोदी सरकार का यह कानून अमल में आता है तो देश में भी अमूमन यहीं स्थिति हो जाएगी

कई जानकार मानते हैं कि इससे कंपनियों को कर्मचारियों को हटाने की ताकत मिल जाएगी।

मोदी सरकार के नए प्रस्तावित कानून के तहत अब हर चार में से तीन कंपनियों को अपने कर्मचारियों को किसी भी क्षण कंपनी से निकालने का अधिकार मिल सकता है। मोदी सरकार में श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने औद्योगिक संबंध संहिता-2020 विधेयक लोकसभा में पेश किया है। श्रम सुधारों से जुड़े तीन बिलों को शनिवार को पेश करते हुए गंगवार ने कहा, ”इन विधेयकों को संसद की स्‍थायी समिति के पास भेजा गया था। समिति की 233 में से 174 यानी 74 फीसदी को हमने स्‍वीकार किया है…इन बिलों में औद्योगिक संबंध संहिता-2020, व्‍यावसायिक सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य एवं कार्य परिस्थिति संहिता-2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 शामिल हैं।

हालांकि इस प्रस्तावित कानून के बाद कंपनी में कर्मचारियों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि प्रस्तावित कानून में फैक्ट्रियां कर्मचारियों को हटाने या उन्हें दंडित करने या प्रोमोशन में भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए जरुरी नियमों से आजाद हो जाएगी।

दरअसल इसे लेकर अभी जो नियम है उसके मुताबिक 100 से कम कर्मचारियों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान या संस्थान ही पूर्व सरकारी मंजूरी के बिना कर्मचारियों को रख और हटा सकते थे। इस साल की शुरुआत में संसदीय समिति ने 300 से कम स्टाफ वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति के बिना कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने या कंपनी बंद करने का अधिकार देने की बात कही थी।

कई जानकारों का मानना है कि यूएस में कंपनियों के पास अपनी इच्छा के मुताबिक कर्मचारियों को हटाने का अधिकार है और अगर मोदी सरकार का यह कानून अमल में आता है तो देश में भी अमूमन यहीं स्थिति हो जाएगी क्योंकि यहां हर चार में से तीन फैक्ट्रियों में 300 से कम कर्मचारी हैं।

बता दें कि अब तक 100 कर्मचारी से कम वाली कंपनियां ही सरकार से मंजूरी के बगैर उन्‍हें रख और हटा सकती थीं। नए लेबर कोड में सरकार ने एक सेक्‍शन जोड़ा है। कहा जा रहा है कि इसमें छंटनी और प्रतिष्‍ठान बंद करने की अनुमति उन्‍हें मिलेगी जिनमें साल में औसतन रोज कम से कम 300 कर्मचारी हों।

ये कानून राज्‍य सरकारों को भर्ती, नियुक्ति और फैक्‍ट्री व प्रतिष्‍ठानों में काम के घंटों को तय करने की आजादी देंगे। इसके अलावा सरकार को सभी को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने में भी मदद मिलेगी।

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