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मोदी सरकार ने मांगी अफसरों की सर्विस प्रोफाइल! जानें ब्यूरोक्रेसी को दुरुस्त करने का क्या है प्लान

कुछ अधिकारियों का कहना है कि 17 सितंबर को जारी हुआ सर्कुलर एक रुटीन प्रक्रिया है, जबकि कुछ अधिकारियों का कहना है कि सर्कुलर के तहत जो जानकारियां मांगी गई हैं, वह रुटीन से कहीं ज्यादा है।

Narendra Modiप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (AP Photo/Michael Wyke)

केन्द्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) ने सभी मंत्रालयों को एक नोटिस भेजकर अफसरों की सर्विस प्रोफाइल मंगवायी है। इसके तहत अफसरों की सर्विस प्रोफाइल के साथ ही, कैडर और उनके अधीन आने वाली पोस्ट की जानकारी मांगी गई है। माना जा रहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार अफसरों की नियुक्ति और प्रमोशन पॉलिसी में बड़े बदलाव करने की योजना बना रही है।

डीओपीटी (DoPT) ने बीती 17 सितंबर को यह सर्कुलर जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि कार्यबल, प्लानिंग और पॉलिसी को नियोजित करने के लिए यह जानकारी मांगी जा रही है। मंत्रालयों और विभिन्न विभागों को एक पूर्व नियत फॉरमेट के तहत सितंबर अंत तक यह जानकारी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

ईटीनाउ की एक खबर के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग का यह कदम ब्यूरोक्रेसी के समान कैडर को मिलाकर उन्हें और तर्कसंगत बनाना है। बदलावों के तहत अधिकारियों की भूमिका भी बदली जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, ‘कैडर की बहुलता को मिलाकर उनका सममिश्रण किया जा सकता है। साथ ही कुछ इंजीनियरिंग सेवाओं का भी मिश्रण किया जा सकता है। इस तरह यह पूरी प्रक्रिया ब्यूरोक्रेसी को तर्कसंगत बनाने के लिए की जा रही है।’

कुछ अधिकारियों का कहना है कि 17 सितंबर को जारी हुआ सर्कुलर एक रुटीन प्रक्रिया है, जबकि कुछ अधिकारियों का कहना है कि सर्कुलर के तहत जो जानकारियां मांगी गई हैं, वह रुटीन से कहीं ज्यादा है। खबर के अनुसार, सर्कुलर में मंत्रालयों और विभागों से जो जानकारी मांगी गई है, उनमें विभिन्न कैडर में नियुक्ति की प्रक्रिया, करियर में भविष्य की योजना, प्रमोशन के मानदंड, बीते 5 सालों में हुई नियुक्तियां, अधिकारियों की ट्रेनिंग और उनकी प्रतिनियुक्ति जैसी जानकारी मांगी गई है।

इसके साथ ही मोदी सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट सीमा घटाने का प्रस्ताव भी दिया है। इस प्रस्ताव के तहत किसी कर्मचारी के सेवा में अधिकतम 33 साल पूरे होने पर या फिर 60 साल की उम्र पूरी करने पर, जो भी पहले हो जाए, रिटायरमेंट देने का प्रस्ताव दिया है। बता दें कि अभी भी सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है, लेकिन केन्द्रीय यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और केन्द्रीय सरकार के अधीन आने वाले डॉक्टरों के लिए यह 65 साल है। अधिकारियों के अनुसार, सरकार बेरोजगारी की समस्या से कुछ राहत पाने के लिए यह कदम उठा सकती है।

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