Narendra Modi breaks silence on church attacks, says govt committed to religious freedom - Jansatta
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किसी धर्म के ख़िलाफ़ हिंसा बर्दाश्त नहीं: नरेंद्र मोदी

गिरजाघरों पर हाल में हुए हमलों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि उनकी सरकार किसी भी धार्मिक समूह को नफरत फैलाने की इजाजत नहीं देगी और किसी तरह की धार्मिक हिंसा के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘‘सभी धर्मों को समान रूप से […]

Author February 17, 2015 6:47 PM
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘‘सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान देती है। (फ़ोटो-पीटीआई)

गिरजाघरों पर हाल में हुए हमलों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि उनकी सरकार किसी भी धार्मिक समूह को नफरत फैलाने की इजाजत नहीं देगी और किसी तरह की धार्मिक हिंसा के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘‘सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान देती है।’’ विपक्षी दलों और ईसाई समूहों ने प्रधानमंत्री पर पांच चर्चों और दिल्ली में एक इसाई स्कूल पर हमले पर आंख मूंदने का आरोप लगाया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आस्था की पूर्ण स्वतंत्रता हो और यह कि किसी जोर जबर्दस्ती या अनुचित प्रभाव के बिना हर किसी को अपनी पसंद के धर्म पर कायम रहने या अपनाने का निर्विवाद अधिकार है।

मोदी ने यहां एक समारोह में कहा, ‘‘मेरी सरकार अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक से ताल्लुक रखने वाले किसी भी धार्मिक समूह को दूसरों के खिलाफ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से घृणा फैलाने की इजाजत नहीं देगी। मेरी सरकार सभी धर्मों को समान सम्मान प्रदान करती है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने यहां विज्ञान भवन में के ई चवारा और मदर यूफरेशिया को संत की उपाधि दिए जाने के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए।

मोदी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘हम किसी भी कारण से किसी धर्म के खिलाफ हिंसा को स्वीकार नहीं कर सकते और मैं ऐसी हिंसा की कड़ी निंदा करता हूं। मेरी सरकार इस संबंध में कड़ी कार्रवाई करेगी।’’

धर्म के आधार पर विश्व में भेदभाव और शत्रुता बढ़ने तथा इस मुद्दे के वैश्विक चिंता का विषय बनने को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी आस्थाओं के लिए आपसी सम्मान की प्राचीन भारतीय अवधारणा अब वैश्विक संवाद के रूप में विस्तार पा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जिसे यदि उचित तरीके से पार नहीं किया गया तो ‘‘यह हमें धर्मांधता, उन्मादी कट्टरपंथ और रक्तपात के अंधे युग में वापस फेंक सकता है।’’उन्होंने इसके साथ ही कहा कि विश्व के तीसरी सहस्राब्दि में प्रवेश करने तक भी धर्मो के बीच इस समरसतापूर्ण सम्मिलन को हासिल नहीं किया जा सका है।’’

भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी का उद्धरण देते हुए मोदी ने कहा कि सभी धर्मो के प्रति समान रूप से सम्मान की भावना प्रत्येक भारतीय के डीएनए में होनी चाहिए।

समरसता की पैरवी करते हुए प्रधानमंत्री ने सभी धार्मिक समूहों से अपने प्राचीन राष्ट्र की उस सच्ची भावना के साथ संयम, आपसी सम्मान और सहिष्णुता के साथ काम करने को कहा जिसका जिक्र संविधान और हेग घोषणापत्र में किया गया है।

मोदी की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस बयान के बाद आयी है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में पिछले कुछ सालों में सभी धार्मिक आस्थाओं ने ‘‘असहिष्णुता की जिन गतिविधियों’’ का अनुभव किया है, वो महात्मा गांधी को स्तंभित कर देतीं।

प्रधानमंत्री ने अंग्रजी में अपने संबोधन में कहा कि विश्व में धार्मिक आधार पर विभाजन और वैमनस्य की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। इस संदर्भ में सभी आस्थाओं के लिए आपसी सम्मान की प्राचीन भारतीय अवधारणा अब वैश्विक संवाद के रूप में विस्तार पा रही है।

मोदी ने कहा कि आपसी सद्व्यवहार की लंबे समय से महसूस की जा रही जरूरत की परिणति के रूप में दि हेग में दिसंबर 2008 में ‘मानवाधिकार में आस्था’ विषयक सम्मेलन बुलाया गया। उन्होंने कहा,‘‘अपने ऐतिहासिक घोषणापत्र में उन्होंने इस बात को परिभाषित किया कि आस्था की आजादी क्या है और इसकी सुरक्षा कैसे की जाए। भारत की ओर से और अपनी सरकार की ओर से मैं घोषणा करता हूं कि मेरी सरकार इस घोषणापत्र के हर शब्द पर कायम है। मेरी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आस्था की पूर्ण स्वतंत्रता हो और हर किसी को यह अधिकार हो कि वह बिना किसी दबाव के अपनी पसंद के धर्म का पालन कर सके या उसे अपना सके।’’

अपने विकास मंत्र ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि आसान शब्दों में इसका मतलब है हर टेबल पर खाना, हर बच्चा स्कूल में, हर किसी को नौकरी और हर परिवार को शौचालय के साथ मकान और बिजली।

उन्होंने कहा, ‘‘यह भारत को गौरव प्रदान करेगा। हम एकता से ही इसे प्राप्त कर सकते हैं। एकता हमें मजबूत बनाती है। विभाजन हमें कमजोर करता है। मैं पूरी ईमानदारी से सभी भारतीयों और यहां मौजूद आप सब से इस विशाल कार्य में समर्थन का अनुरोध करता हूं।’’

इस मौके पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली में चर्चों पर हमलों की हाल की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये अस्वीकार्य अपवाद हैं। उन्होंने कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ मामला चलेगा और ऐसे लोगों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है।

राज्यसभा के उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा कि हमले की घटनायें अपवाद हैं और इससे सरकार सख्ती से निपटेगी। उन्होंने याद दिलाया कि केरल में हिन्दू शासकों ने राज्य में चर्चों के लिए भूमि देकर ईसाई धर्म को समृद्ध होने में मदद की थी।

आर्चबिशप एन्ड्रयू थजाह और अनिल काउटों ने अपने संबोधन में चर्चों पर हमले पर चिंता जताई और उम्मीद जताई कि सरकार उचित कार्रवाई करेगी। थजाह ने कहा कि मिशनरी स्कूल धर्मान्तरण पर नहीं बल्कि शिक्षा पर केन्द्रित हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ऐसे संस्थानों से ही शिक्षा प्राप्त कर आए हैं।

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