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CAA, NRC विवादः ‘असम में 5 लाख से अधिक 1 भी शख्स को दी गई नागरिकता तो छोड़ दूंगा राजनीति’, बीजेपी मंत्री का ऐलान

पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता तरूण गोगोई ने छह जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर धर्म के आधार पर पाकिस्तान के संस्थापक की तरह ‘द्विराष्ट्र के सिद्धांत’ का पालन करने का आरोप लगाया था।

Author गुवाहाटी | Updated: January 14, 2020 12:09 PM
असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा (Express Photo by Amit Mehra)

असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि अगर राज्य में पांच लाख से अधिक एक भी व्यक्ति को नागरिकता दी जाती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने राज्य विधानसभा में कहा कि हिंदू समुदाय का व्यक्ति ‘जिन्ना नहीं हो सकता क्योंकि वह कभी किसी पर हमला नहीं करता’ और वह धर्मनिरपेक्ष होता है। सरमा ने हिंदू बंगालियों को नागरिकता देने का भी समर्थन किया।

बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदुओं को नागरिकता देने का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा , ‘‘एक हिंदू जिन्ना नहीं हो सकता। किसी भी हिंदू राजा ने कोई मस्जिद या मंदिर ध्वस्त नहीं किया है। एक हिंदू हमेशा ही धर्मनिरपेक्ष होता है और किसी पर हमला नहीं करता। हिंदू धर्मनिरपेक्ष हैं।’’ सरमा नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (एनईडीए) के प्रमुख हैं।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता तरूण गोगोई ने छह जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर धर्म के आधार पर पाकिस्तान के संस्थापक की तरह ‘द्विराष्ट्र के सिद्धांत’ का पालन करने का आरोप लगाया था। सरमा ने असम विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) असम समझौते का उल्लंघन नहीं करता है। उन्होंने असम में कथित तौर पर बढ़ती मुस्लिम आबादी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि एआईडीयूएफ प्रमुख अजमल बदरूद्दीन या उनके बेटे या उनके पोते 30 साल बाद अगले मुख्यमंत्री होंगे। इसे कोई नहीं रोक सकता।

वहीं असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि यदि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी के अद्यतन का काम राज्य सरकार को सौंपा गया होता तो वह ‘सही एनआरसी’ होती। सोनोवाल ने सोमवार को विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कहा कि लोगों को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) से भयभीत होने की जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार उनके हितों के विपरीत कुछ भी नहीं करेगी।

उन्होंने सदन में कहा, ‘‘भाजपा सही एनआरसी चाहती है। मैं यह पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अगर असम सरकार को एनआरसी के अद्यतन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी जाती तो यह पूरी तरह से सही एनआरसी होती।’’ सोनोवाल ने अपने संबोधन में कहा कि चूंकि उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एनआरसी की पूरी कवायद हुई इसलिए राज्य की अद्यतन प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘असम सरकार ने अपने 55 हजार कर्मचारी और सुरक्षा से लिए अपना पुलिस बल उपलब्ध कराया था। ’’ सीएए पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग इस लिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इस कानून के बारे में गलत सूचनाएं दी जा रहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कितने लोग नागरिकता के लिए आवेदन करेंगे इस बारे में चर्चाएं अभी काल्पनिक हैं। सीएए राष्ट्रीय कानून है और पूरा भारत इसे लागू करेगा। कृपया करके इस बारे में कयास नहीं लगाएं। अभी नियम नहीं बनें हैं और हमने अपने सुझाव दिए हैं।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार लोग नागरिकता के लिए आवेदन दे दें, इसके बाद सभी आवेदनों की जांच होगी और हो सकता है कि सभी आवेदकों को नागरिकता नहीं मिले। इससे पहले राज्य के वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने विधानसभा में अपने भाषण में कहा था कि सीएए से राज्य में अधिकतम पांच लाख बांग्लादेशी हिंदुओं को फायदा होगा।

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