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आधे बीजेपी सांसदों से खुश नहीं मोदी-शाह की जोड़ी, 2019 में काट सकती है टिकट

पार्टी के कई नेता इस ओर इशारा करते हैं कि मोदी और शाह की जोड़ी बिहार और उत्‍तर प्रदेश के सांसदों से ज्‍यादा खफा है। भाजपा चाहती है कि वह नए और चमकदार चेहरों के साथ अगले साल होने वाले चुनाव में उतरे।

Narendra Modi, Amit Shah, Modi Shah, BJP, BJP meetingपार्टी मुख्‍यालय में भाजपा के संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह। (Photo: PTI)

भारतीय जनता पार्टी अपने वर्तमान लोकसभा सांसदों में से लगभग 50 प्रतिशत का टिकट काट सकती है। पार्टी इस बारे में कोई फैसला सांसदों की अपने क्षेत्र और सदन में परफॉर्मेंस तथा सोशल मीडिया पर उनकी उपस्‍थ‍िति के आधार पर लेगी। ‘द वीक’ से बातचीत में एक वरिष्‍ठ भाजपा नेता ने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह सांसदों के प्रदर्शन का आकलन कर रहे हैं। वे सबसे खुश नहीं हैं। परफॉर्मेंस के आधार पर उम्‍मीदवारों का चुनाव होगा।”

पूर्वी भारत में भाजपा की चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाने वाले इस नेता ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व के साथ सांसदों से मुलाकात की थी। वहां उन्‍होंने स्‍पष्‍ट रूप से कहा था कि जिन्‍होंने परफॉर्म नहीं किया, वे अगली बार टिकट की आस न लगाएं। पार्टी ने 2019 के चुनावों के लिए उम्‍मीदवारों के चयन की योग्‍यताएं तय कर दी हैं।

बीजेपी नेताओं के अनुसार, वरीयता उन सांसदों को दी जाएगी जिन्होंने अपने क्षेत्र में अच्‍छा काम किया हो, केंद्रीय प्रोजेक्‍ट्स को अपने लोकसभा क्षेत्र में बेहतर ढंग से लागू कराया हो और सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहे हों। सोशल मीडिया में दक्ष होने का मतलब इन प्‍लेटफॉर्म पर कई लाख फॉलोअर्स होने से है। एक नेता ने कहा, ”सोशल मीडिया पर जिनकी बड़ी फॉलोइंग है, वे जरूर अपने क्षेत्र में लोकप्रिय हैं।”

पार्टी के कई सांसदों ने बार-बार कहे जाने के बावजूद सोशल मीडिया को गंभीरता से नहीं लिया। कुछ ने तो अपना अकाउंट तक नहीं बनाया है, जबकि कुछ ऐसे प्‍लेटफॉर्म पर मौजूद तो हैं, मगर सक्रिय नहीं। पार्टी के कई नेता इस ओर इशारा करते हैं कि मोदी और शाह की जोड़ी बिहार और उत्‍तर प्रदेश के सांसदों से ज्‍यादा खफा है। भाजपा चाहती है कि वह नए और चमकदार चेहरों के साथ अगले साल होने वाले चुनाव में उतरे।

लोकसभा उपचुनावों में हार के बाद पार्टी में नए चेहरों की मांग तेज हुई है। सत्‍ता में आने के बाद से पार्टी बिहार और पंजाब छोड़कर बाकी विधानसभा चुनाव जीती है, मगर लोकसभा उपचुनावों में पार्टी यह प्रदर्शन दोहराने में नाकाम रही। पार्टी के अनुसार, जहां मोदी और भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं ने प्रचार नहीं किया, वहां पार्टी बुरी तरह हारी।

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