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खुद अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश में मोदी और अखिलेश

समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच उत्तर प्रदेश में अपनी पीठ खुद थपथपाने की प्रतिस्पर्धा छिड़ने जा रही है। 15 मार्च को अखिलेश यादव की सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर समाजवादी पार्टी प्रदेश की जनता को अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी देने की कोशिश में है। उधर भाजपा […]

Author Published on: March 3, 2015 9:41 AM

समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच उत्तर प्रदेश में अपनी पीठ खुद थपथपाने की प्रतिस्पर्धा छिड़ने जा रही है। 15 मार्च को अखिलेश यादव की सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर समाजवादी पार्टी प्रदेश की जनता को अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी देने की कोशिश में है। उधर भाजपा अप्रैल से प्रदेश की जनता को इस बात की जानकारी देगी कि अब तक नरेंद्र मोदी की सरकार ने उनके हितों को ध्यान में रखकर दरअसल किया क्या है?

जनता के हितों में किए गए कार्यों की जानकारी खुद-ब-खुद उसे हो जाती है। राजनीति का यह सर्वमान्य सूत्र है। लेकिन इस सूत्र से संभवतया समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी इत्तफाक नहीं रखतीं। लगातार तीन वर्षों से अखिलेश यादव को इस बात का मलाल है कि उनकी सरकार के अधिकारी जनता के हित को ध्यान में रखकर किए गए कार्यों की जानकारी उन तक पहुंचा पाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कई मर्तबा उन्होंने अपना यह दर्द सार्वजनिक भी किया है। यही वजह है कि अब इस काम की जिम्मेदारी समाजवादी पार्टी को सौंपी गई है। पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता से कहा गया है कि सरकार के तीन वर्ष पूरे होने का जश्न वे लखनऊ आने की बजाय अपने गृह नगर में रहकर मनाएं।

सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के घोषणापत्र के माध्यम से जनता से किए गए सभी वादों को सरकार पूरा कर चुकी है। धरातल पर उनका अनुपालन कितना हुआ है, इसकी पड़ताल करने के लिए अप्रैल से मुख्यमंत्री खुद जिलों का औचक निरीक्षण करेंगे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि प्रदेश में बीते तीन वर्षों में निवेश का माहौल बनाने की सभी कोशिशों को लचर कानून व्यवस्था और खस्ताहाल सड़क ने हाशिए पर ला खड़ा किया है। निवेश के सरकारी दावों की हकीकत जनता के सामने है। इस हकीकत की जानकारी होने के बाद से समाजवादी खेमा बेचैन है। उसे दो वर्ष बाद उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की चिंता अभी से सता रही है। इस चिंता से मुक्ति पाने के तमाम रास्ते तलाशे जा रहे हैं। इन्हीं में एक अपनी पीठ खुद थपथपाने का सूत्र भी है।

उधर भारतीय जनता पार्टी ने मार्च में सदस्यता अभियान के पूर्ण होने के बाद अप्रैल से पूरे प्रदेश में व्यापक जनसंपर्क अभियान छेड़ने की रणनीति बनाई है। भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं, रेल व आम बजट में केंद्र सरकार ने जनता को जो सहूलियतें दी हैं, उनकी पूरी जानकारी इस अभियान के तहत उन तक पहुंचाई जाएगी। जानकारों का मानना है कि रेल व आम बजट से उपजे नाउम्मीदी के बादलों से पार्टी सकते में है। अच्छे दिनों के आने की उम्मीद जगाने के बाद उस पर खरा उतरने की चुनौती ने प्रदेश के भाजपा नेताओं को बेचैन कर रखा है। प्रदेश के कई वरिष्ठ भाजपा नेता बजट को लेकर गहन विचार-विमर्श करते नजर आ रहे हैं। इस बात पर लगातार मंथन जारी है कि आखिर बजट की व्याख्या किन संदर्भों को आगे रखकर की जाए ताकि प्रदेश की जनता को इसे सहजता से समझाया जा सके। अभी तक प्रदेश के भाजपा नेताओं ने अप्रैल व मई महीने में प्रदेश की जनता को केंद्र सरकार की अब तक की उपलब्धियों की जानकारी देने की ठानी है। देखना दिलचस्प होगा कि वे किस तरह केंद्र की उपलब्धियों को जनता को समझा पाने का रास्ता निकाल पाते हैं।

केंद्र व राज्य सरकार का अब तक का कार्यकाल क्या प्रदेश की जनता के ह्रदय में स्थान बना पाया है? यह यक्ष प्रश्न है। लचर कानून व्यवस्था, बिजली की कमी और खस्ताहाल सड़कों ने उत्तर प्रदेश को पस्त कर रखा है। बेरोजगारी दूर करने के केंद्र व राज्य सरकार के दावे अब तक हकीकत में तब्दील नहीं हो सके हैं। इस वजह से उपजी चुनौती सपा और भाजपा दोनों ही खेमे में बेचैनी पैदा कर रही है। अच्छे दिनों के आने की जनता-जनार्दन की प्रतीक्षा और लंबी होती जा रही है। ऐसे में दो पाटों के बीच फंसे उत्तर वासियों के समक्ष खुद अपनी पीठ थपथपाने के कई दृश्य अगले कुछ महीनों में उपस्थित होने वाले हैं। गौर करने वाली बात यह होगी कि क्या सपा और भाजपा राजनीति के बेहद जानकार कहे जाने वाले इस प्रदेश के लोगों को अपनी तरह से समझा पाने में कामयाब हो पाएंगे? इस सवाल का जवाब उत्तर प्रदेश में दोनों ही राजनीतिक दलों का सियासी भविष्य तय करने जा रहा है।

 

अंशुमान शुक्ल

 

 

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