लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि ट्रेड डील की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अमेरिका के दबाव के सामने सरेंडर कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने यह बात उन चर्चाओं को लेकर कही है जिनके मुताबिक, केंद्र सरकार ने बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या RuPay डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क न लगाने का निर्देश दिया है।

केंद्र सरकार ने हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं।

यूपीआई पर फीस लगाने का रास्ता खोला- राहुल

राहुल गांधी ने मंगलवार को अपने X हैंडल पर कहा, “मोदी सरकार ने चुपचाप यूपीआई पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। अब 2,000 रुपये से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजेक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ 5% हो लेकिन UPI की कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “केंद्र सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।”

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। राहुल ने कहा, “US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।”

क्या ट्रंप को खुश करने के लिए कर रहे?

इसके अलावा कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या यह सब डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए अमेरिकी कंपनियों के लिए डिजिटल भुगतान का रास्ता खोलने के मकसद से किया जा रहा है?

रमेश ने कहा कि संशोधित Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत हाल में एक अधिसूचना जारी की गई है, जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को केवल 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने से रोकती है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने को लेकर कोई सुरक्षा नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, ”साफ तौर पर हम सभी से यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूलने की जमीन तैयार की जा रही है।”

जयराम रमेश ने कहा कि भविष्य में इसी तरह की किसी अन्य अधिसूचना के जरिये यह सीमा बदली जा सकती है। उन्होंने कहा, ”जहां तक हमें पता है, सरकार रोजमर्रा के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यूपीआई लेनदेन पर भी शुल्क लगा सकती है।”

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BRICS बिजनेस फोरम 2026 के ओपनिंग सेशन को संबोधित करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में अहम पहल की है। भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने हर साल 250 बिलियन से ज्यादा ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है और यह दुनिया भर में वॉल्यूम के हिसाब से आधे से ज़्यादा है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।