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देश की हर भाषा अनमोल, हिंदी से जोड़ने पर मातृभाषा होगी ताकतवर: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की हर भाषा को अमूल्य बताते हुए कहा कि भारत में भाषाओं का अनमोल खजाना है और अगर इन्हें हिंदी से जोड़ा जाए तो मातृभाषा मजबूत होगी..

Author भोपाल | September 11, 2015 01:02 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाव दिया कि देश की एकता के लिये हिन्दी सहित देश की भाषाओं की समृद्धि के लिये कभी हिन्दी-तमिल, कभी हिन्दी-बांग्ला, कभी हिन्दी-डोगरी की कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिये। (पीटीआई फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की हर भाषा को अमूल्य बताते हुए कहा कि भारत में भाषाओं का अनमोल खजाना है और अगर इन्हें हिंदी से जोड़ा जाए तो मातृभाषा मजबूत होगी। मोदी ने यहां गुरुवार को 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए आगाह किया ‘‘भाषा की भक्ति बहिष्कृत करने वाली नहीं होनी चाहिए बल्कि यह सम्मिलित करने वाली, सबको जोड़ने वाली होनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि भाषा के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिये क्योंकि जब जब ऐसा हुआ है उस भाषा का विकास होने के बजाय उसकी गति मंद ही हुई है। मोदी ने सुझाव दिया कि देश की एकता के लिये हिन्दी सहित देश की भाषाओं की समृद्धि के लिये कभी हिन्दी-तमिल, कभी हिन्दी-बांग्ला, कभी हिन्दी-डोगरी की कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिये। इससे हिन्दुस्तान की सभी बोलियों और भाषाओं में जो उत्तम है उन्हें हिन्दी को उन्नत बनाने में मदद मिलेगी और ऐसे प्रयास समय समय पर होते रहने चाहिये।

उन्होंने कहा कि भाषाशास्त्रियों का मानना है कि 21वीं सदी के अंत तक विश्व की 6,000 में से 90 प्रतिशत भाषाएं लुप्त हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम इस चेतावनी को नहीं समझें और अपनी भाषाओं के संरक्षण के प्रयास नहीं किये तो हमें उसी तरह रोना पड़ेगा जैसे डायनासोर या कई अन्य जीवजन्तु एवं पेड़ पौधों की प्रजातियों के लुप्त होने पर रोना पड़ रहा है।

विकसित हो रही डिजिटल भाषाओं का जिक्र करते हुए मोदी ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा, ‘‘आने वाले दिनों में डिजिटल दुनिया में अंग्रेजी, चीनी और हिन्दी का दबदबा बढ़ने वाला है।’’

मोदी ने कहा कि भारत में भाषाओं का अनमोल खजाना है। इन भाषाओं को हिन्दी से जोड़ने पर राष्ट्रभाषा और ताकतवर होती जायेगी। प्रधानमंत्री ने हिन्दी सहित देश की अन्य भाषाओं को उन्नत और समृद्ध बनाने के लिये एक सुझाव यह भी दिया कि सबको धीरे धीरे यह आदत डालनी चाहिये कि देश की जितनी भी भाषाएं हैं उन्हें अपनी लिपि में लिखने के साथ ही देवनागरी लिपि में भी लिखा जाए ।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, विनोबा भावे और राजगोपालाचारी आदि के इस प्रयास को अगर आगे बढ़ाया गया होता तो राष्ट्र की एकता के लिये देश की सभी भाषाओं में समन्वय का काम हो चुका होता। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा का आंदोलन देश के गैर हिन्दी भाषी लोगों ने चलाया।

मोदी ने कहा कि भाषा जड़ नहीं हो सकती, जीवन की तरह भाषा में भी चेतना होती है। उन्होंने कहा कि किसी चीज के लुप्त हो जाने पर उसके मूल्य का पता चलता है। इसलिये हर पीढ़ी का दायित्व है कि वह अपनी भाषा को समृद्ध करे और संजोये।

भारत का कद बढ़ने के साथ हिन्दी के प्रति दुनिया में बढ़ते रुझान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस भी देश में मैं जाता हूं वहां के लोग उनसे ‘सबका साथ, सबका विकास’ का जिक्र करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा और रूस के पुतिन भी टूटी फूटी हिन्दी में ही सही मुझसे ‘सबका साथ सबका विकास’ के बारे में पूछते हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और डिजीटल होती जा रही है। हिन्दी और भारतीय भाषाओं को डिजीटल भाषाओं के अनुरूप कैसे बनाया जाये इस पर विचार करना हम सबका दायित्व है। उन्होंने कहा कि भाषा एक बहुत बड़ा बाजार बनने वाला है और हिन्दी का उसमें बड़ा महत्व होगा।

भारत में 32 साल बाद हो रहे विश्व हिन्दी सम्मेलन में लगभग 40 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मोदी के अलावा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा, केन््रदीय मंत्रियों में रविशंकर प्रसाद, हर्षवर्धन, वीके सिंह, किरण रिजीजू, और मॉरीशस की शिक्षा मंत्री लीला देवी आदि मंच पर उपस्थित थीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार के हिन्दी महाकुंभ में हिन्दी भाषा पर बल देने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक भाषा होती है तब तक उसकी ताकत का अंदाजा लोग नहीं समझते लेकिन जब भाषा लुप्त हो जाती है और सदियों बाद उसका सुराग मिलता है और पुरातत्वविद् उन्हें पढ़ने का प्रयास करते हैं तब भाषा के संकट और उसके महत्व का अहसास होता है।

उन्होंने कहा कि किसी पौधे या प्राणी की एक प्रजाति के लुप्त होने के कगार पर आने पर उसे बचाने के प्रयास में दुनिया अरबों रुपया खर्च करती है। इसी तरह भाषाओं का भी महत्व है और उन्हें लुप्त होने से पहले ही बचाने के प्रयास होने चाहिये।

उन्होंने कहा कि हमारी हिन्दी भाषा बड़ी संख्या में विदेशों में भी फैली हुई है और देश के सिने जगत ने फिल्मों के जरिये इसके विस्तार में बड़ा काम किया है। आने वाले दिनों में हिन्दी का महत्व और अधिक बढ़ने वाला है।

उल्लेखनीय है कि इस बार विश्व हिन्दी सम्मेलन का समापन सत्र मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन के सम्बोधन से होगा। वह ‘‘अच्छी हिन्दी कैसे बोलें’’ विषय पर अपनी बात रखेंगे।

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