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नारदा स्टिंगः सिंघवी बोले-ये कोई विरला मामला नहीं, केस ट्रांसफर करने से आरोपियों के अधिकारों का हनन

सिंघवी ऑनलाइन हियरिंग में तकनीकी खराबी की वजह से देर से जुड़ सके। तुषार मेहता ने चुटकी लेते हुए कहा कि उनकी सिंघवी से अपील है कि इन 45 मिनटों की फीस वो चार्ज न करें। सिंघवी का जवाब था कि उन्हें उम्मीद है कि क्लाइंट मिनट के हिसाब से उन्हें पैसे का भुगतान करेंगे।

अपने मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद सीएम ममता ने बोला था सीबीआई दफ्तर पर धावा (फाइल फोटो)

नारदा मामले में टीएमसी नेताओं की तरफ से पैरवी कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये रेयर ऑफ रेयरेस्ट यानि विरला मामला नहीं है। अगर केस को स्पेशल कोर्ट से हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाता है तो आरोपियों के अधिकारों का हनन होगा। उनकी दलील थी कि स्पेशल कोर्ट को भी दोबारा सुनवाई के लिए कोई आधार नहीं मिला।

हाईकोर्ट के पांच जजों की बेंच के समक्ष सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा है कि जिन मामलों में सजा सात साल से कम हो, उनमें नामजद आरोपियों को जेल से रिहा कर दिया जाए। सिंघवी का कहना था कि कोरोना संकट के मद्देनजर ये फैसला सर्वोच्च अदालत ने दिया था। उनकी दलील थी कि 2011 के स्कैम और 2014 के स्टिंग के लिए आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग गले से नीचे नहीं उतरती। उनका कहना था कि टीएमसी नेताओं को केस दर्ज होने के छह साल बाद कोरोना संकट के दौरान गिरफ्तार किया गया। जब सुप्रीम कोर्ट जेल को खाली करने की बात कह रहे है तब एसजी आरोपियों को अरेस्ट कराने पर तुले हैं।

सिंघवी ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भीड़ तंत्र के नाम पर जरूरी चीजों से ध्यान हटाने की कोशिश हो रही है। उनका कहना था कि स्पेशल कोर्ट ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही सुनवाई की और आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपियों को गिरफ्तार करने से पहले कोई नोटिस भी नहीं मिला था।

सिंघवी ने सीबीआई पर तंज कसते हुए कहा कि देखिए, एजेंसी कैसे कानून सिखाने पर तुली है। ये लोग भी नेचुरल जस्टिस की बात कर रहे हैं। उनका कहना था कि अगर किसी और ने इस तरह से हाईकोर्ट के सामने याचिका लगाई होती तो खारिज हो जाती, लेकिन सीबीआई को एलिस इन वंडरलैंड की तर्ज पर विशेष तरजीह मिल रही है।

सुनवाई में हल्के फुल्के लम्हे भी सामने आए। सिंघवी ऑनलाइन हियरिंग में तकनीकी खराबी की वजह से देर से जुड़ सके। तुषार मेहता ने चुटकी लेते हुए कहा कि उनकी सिंघवी से अपील है कि इन 45 मिनटों की फीस वो चार्ज न करें। सिंघवी का जवाब थे कि उन्हें उम्मीद है कि क्लाइंट मिनट के हिसाब से उन्हें पैसे का भुगतान करेंगे। इस दौरान सीएम ममता बनर्जी की तरफ से हलफनामा पेश करने को लेकर दोनों पक्षों में हल्की नोंकझोंक देखने को मिली।

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